
जनपद में अमोनियम सल्फेट उर्वरक भ्रमित नाम से बिक रही है,रोक की मांग
हापुड, सीमन (ehapurnews.com):अमोनियम सल्फेट उर्वरक को भ्रामक रूप से “भारत एनपीके” के नाम से विक्रय कर किसानों को गुमराह किए जाने, संभावित उर्वरक घोटाले की जांच तथा दोषियों के विरुद्ध उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत कठोर कार्रवाई किए जाने एवं बिक्री पर रोक लगाने के संबंध में गुरुवार को भाकियू अराजनैतिक के जिलाध्यक्ष पवन हुण के नेतृत्व मे किसानो का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी कविता मीना से मिला और बताया कि जनपद मुरादाबाद में कृषि विभाग उर्वरक अनुभाग लखनऊ द्वारा 200 मीट्रिक टन एनपीके निजी क्षेत्र में आपूर्ति हेतु HURL को आबंटन किया था। किसानों द्वारा हमारे संज्ञान में लाया गया कि निजी दुकानों पर किसानों को बड़ा एनपीके एवं छोटा अमोनियम सल्फेट लिखकर किसानों को भ्रम में डालकर बेचा जा रहा है, प्रथम दृष्टया यह पैकेजिंग किसानों को भ्रमित करने, उत्पाद की वास्तविक पहचान छिपाने तथा एनपीके उर्वरक का आभास कराने का प्रयास प्रतीत होता है, यह स्थिति केवल भ्रामक व्यापारिक गतिविधि नहीं बल्कि उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 (FCO-1985) की भावना एवं प्रावधानों का उल्लंघन है। किसी भी उर्वरक की पहचान, संरचना एवं श्रेणी के संबंध में भ्रम उत्पन्न करना किसानों के साथ धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। कृषि निदेशालय, उत्तर प्रदेश द्वारा भी पूर्व में जारी पत्रांक-1873 दिनांक 21.09.2016 एवं पत्रांक-1483 दिनांक 15.12.2021 के माध्यम से स्पष्ट किया जा चुका है कि भ्रामक नामों, पैकेजिंग अथवा प्रस्तुतीकरण के माध्यम से उर्वरकों का विक्रय दंडनीय कृत्य है तथा ऐसे मामलों में उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत कार्रवाई किया जाना आवश्यक है उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत कार्रवाई किया जाना आवश्यक है। किसान बैग पर प्रमुखता से लिखे नाम एवं सरकारी व्यवस्था पर भरोसा करके उर्वरक खरीदता है। अधिकांश किसान सूक्ष्म अक्षरों में अंकित तकनीकी विवरण नहीं पढ़ पाते। ऐसे में यदि किसी अमोनियम सल्फेट बैग पर बड़े अक्षरों में “भारत एनपीके” अंकित किया जाए तो किसान स्वाभाविक रूप से उसे एनपीके उर्वरक समझेगा। यह स्थिति किसानों को आर्थिक हानि पहुंचाने के साथ-साथ फसल उत्पादन को भी प्रभावित कर सकती है। यहां पर विषय यह है कि क्या वानस्पति घी को शुद्ध गाय का घी कहकर कैसे बेचा जा सकता है
विशेष चिंता का विषय यह है कि यह आपूर्ति मुख्यतः गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में की जा रही है। गन्ना फसल में संतुलित पोषण हेतु नाइट्रोजन, फास्फोरस एवं पोटाश तीनों प्रमुख तत्व आवश्यक हैं। एनपीके उर्वरक का उद्देश्य यही संतुलित पोषण प्रदान करना है। जबकि अमोनियम सल्फेट केवल नाइट्रोजन एवं सल्फर का स्रोत है। यदि किसान एनपीके समझकर अमोनियम सल्फेट का प्रयोग करता है तो फसल में आवश्यक फास्फोरस एवं पोटाश की कमी उत्पन्न हो सकती है, जिससे उत्पादन, गुणवत्ता एवं किसान की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) स्पष्ट करना चाहती है कि अमोनियम सल्फेट उर्वरक के विक्रय पर कोई आपत्ति नहीं है। आपत्ति केवल इस बात पर है कि यदि किसी उर्वरक को उसकी वास्तविक पहचान से हटकर भ्रामक तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है अथवा एनपीके का आभास उत्पन्न कर बेचा जा रहा है, तो यह किसानों के साथ छल, कृषि उत्पादन के साथ खिलवाड़ तथा नियामकीय व्यवस्था की अवमानना है। जनपद में एचयूआरएल के एनपीके लिखे अमोनियम सल्फेट की बिक्री पर रोक लगाते हुए इनके विरुद्ध उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत कार्यवाही कराने का कष्ट करें ! साथ में कटार सिंह, मोनू त्यागी, रवि भाटी, अशोक राणा, महेंद्र त्यागी, राजवीर भाटी, ओमप्रकाश त्यागी, बब्लू चौधरी, योगेन्द्र सिंह।
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