
नागपंचमी पर्व श्रावण मास के तीसरे सोमवार को विशिष्ट योग संयोग के साथ आज मनाया जाएगा
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित के0 सी0 पाण्डेय काशीवाले ने बताया कि श्रावण शुक्ल पंचमी तिथि 16 अगस्त की सायं 4.52 से प्रारम्भ होकर 17 अगस्त सोमवार की सायं 5 बजेतक रहेगा नागपंचमी का विस्तारपूर्वक वर्णन भविष्यपुराण के ब्राह्मपर्व, स्कंदपुराण और महाभारत ग्रन्थ मे मिलता है वर्णन के अनुसार राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के काटने से हुई थी इससे क्रोधित होकर राजा जनमेजय ने जब सर्पयज्ञ किया था जिससे सभी सर्प मरने लगे तक्षक आदि नागों के विनती पर आस्तिक मुनि ने आकर सर्पयज्ञ बंद कराया था और नागों की रक्षा की थी और नागों से वचन भी लिया था उस दिन श्रावण शुक्ल पंचमी तिथि थी आस्तिक मुनि ने कहा – “आज जो मेरी बात मानकर नागों की पूजा करेगा उसे सर्प का भय नहीं होगा तभी से नागपंचमी पर्व मनाने की परंपरा शुरू हुई। श्रावणे मासि शुक्लायां पंचम्यां नागपूजनम्। कृत्वा मुच्येत सर्पेभ्यो वंशवृद्धिकरं भवेत्॥अर्थात श्रावण मास की शुक्ल पंचमी को नाग पूजा करने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है और वंश की वृद्धि होती है इस बार अतः नागपंचमी को सुबह से ही भगवान शिव के साथ नागपूजन शुभयोग एवं रवि योग में राहु-केतु ग्रह से पीड़ित या कुंडली में बने कालसर्प दोष,पीड़ित चन्द्रमा से बने केमद्रुम दोष तथा पितृदोष निवारण के लिए लाभकारी रहेगा भगवान शिव का पूजन कर शिवलिंग पर चांदी अथवा ताँबे से बने नाग-नागिन के जोड़े को चढ़ाकर निम्लिखित मंत्र “सर्वे नागाः प्रीयन्तां मे ये केचित् पृथिवीतले ।। ये च हेलिमरीचिस्था येऽन्तरे दिवि संस्थिताः । ये नदीषु महानागा ये सरस्वतिगामिनः । ये च वापीतडागेषु तेषु सर्वेषु वै नमः ॥ द्वारा प्रार्थना करना चाहिए कालसर्प दोष शान्ति व निवारण के लिए नागपंचमी वर्ष का सबसे उत्तम दिन है इस दिन पूजन करने से कुल में वासुकि, तक्षक, कालिय, मणिभद्र, ऐरावत, धृतराष्ट्र, कर्कोटक तथा धनञ्जय-ये सभी बड़े-बड़े नाग अभय दान देते हैं तथा कुल में सर्प का भय नहीं रहता धर्म ग्रंथों के अनुसार इस दिन मुख्य दरवाज़े अथवा रसोई के द्वार पर प्रमुख विषधर साँपो का प्रतीक बनाकर पूजन करने से सर्पों का भय नहीं रहता तथा घर के प्रत्येक स्थानों पर दूध -खील या दही-खील सापों के निमित्त ऱखना चाहिए नागपंचमी के दिन राहु -केतु एवं शिव मंत्रो का अधिकतम जप करने अथवा कराने के साथ भगवान भोलेनाथ का रुद्राभिषेक करने से विघ्न एवं कष्टों से मुक्ति मिलती है इस दिन उज्जैन, नाशिक एवं प्रयागराज में कालसर्प शान्ति का विशेष महत्त्व है वर्ष में मात्र नागपंचमी के दिन खुलने वाले उज्जैन के प्रसिद्ध नागचंद्रेश्वर मंदिर में लाखों लोग दर्शन करते है इसका विशेष पौराणिक महत्त्व है मान्यतानुसार दर्शन मात्र से राहु केतु पीड़ित को भय एवं कष्टमुक्ति मिलता है नागपंचमी के दिन व प्रतिदिन मंत्र – ॐ कुरुकुल्ले फट् स्वाहा। मंत्र पढ़ने से सर्प का भय नहीं रहता नागपंचमी के दिन परम्परा में कालसर्प दोष शान्ति पूजन गंगा, यमुना नर्मदा व अन्य पवित्र नदी के किनारे भी कराया जाता है ब्राह्मण को भोजन कराकर स्वर्णनाग का दान वस्त्र आदि के साथ श्रद्धा से करना चाहिए 18 अगस्त मंगलवार को मंगला गौरी व्रत किया जाएगा।
एलर्जी, चर्म रोग, गुप्त रोग की पीड़ित महिलाएं अब रविवार को भी डॉ. रुचिका गुप्ता से ले सकेंगी परामर्श: 8979824365




















