
श्रावण कृष्णपक्ष शिवरात्री पूजन विधि,विभिन्न द्रव्यों से रुद्राभिषेक के बारे में जाने ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय से 9634408321
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): देवलोक कॉलोनी स्थित श्री ज्योतिष कार्यालय के ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय ने बताया ज्योतिषशास्त्र एवं वैदिक पंचांग अनुसार श्रावण कृष्ण शिवरात्रि 11 अगस्त दिन मंगलवार को शास्त्रोक्त हैं ! व्रत और पूजा1 अगस्त 2026, मंगलवार को करें!शिवरात्रि की पूजा आमतौर पर निशिता काल या रात्रि के चार पहरों में की जाती हैं !कावड़ का जल भगवन शिव पर 10 /11 दिन मंगलवार के प्रातः 5 बजकर 30 से होगा !कावड़ का जल भगवन शिव पर त्रियोदशी के समापन और चतुर्दशी के प्रवेश में अर्पित किया जाता हैं ! 11 अगस्त को प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लें,शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, धतूरा, भांग, पुष्प,भस्म ,दूबघास और फल अर्पित करें! नमः शिवाय का जप करें और शिव चालीसा,रुद्राष्टकपढ़ें!इस रात्रि में जागरण और शिव पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता हैं !श्रावण शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का बहुत शुभ दिन माना जाता है,और इस दिन उपवास, रुद्राभिषेक और रात्रि पूजा का विशेष महत्व हैं !शिवरात्रि की चारों प्रहर की पूजा रात में क्रम से की जाती है। हर प्रहर में अलग अभिषेक और मंत्र जप का विधान हैं !पहला प्रहर इसमें भगवान शिव का दूध से अभिषेक किया जाता हैं !दूसरा प्रहर इसमें दही से अभिषेक किया जाता हैं !तीसरा प्रहर इसमें घी से अभिषेक किया जाताहैं !चौथा प्रहर इसमें शहद और जल की धारा से अभिषेक किया जाताहैं !चार प्रहर की पूजा का समय प्रथम प्रहर सायं 6:19बजे से रात्रि 9:26बजे तक द्वितीय प्रहर 9:26 बजे से मध्यरात्रि 12:52बजे तक तृतीय प्रहरमध्यरात्रि 12:52 से रात्रि 3:59 तक चतुर्थ प्रहर प्रातः3:59बजे से प्रातः 7:06बजे तक अभिषेक करना शुभ और कल्याणप्रद रहेगा !
ज्योतिर्विद प्रीति पाण्डेय ने बताया
रुद्राभिषेक भगवान शिव को प्रसन्न करने का अत्यंत प्रभावशाली वैदिक अनुष्ठान हैं। शास्त्रों के अनुसार विभिन्न द्रव्यों से रुद्राभिषेक करने पर अलग-अलग प्रकार के शुभ फल प्राप्त होते हैं। यदि अभिषेक रुद्राध्याय (नमक–चमक) किया जाए तो उसका फल और अधिक श्रेष्ठ माना जाता है।विभिन्न द्रव्यों से रुद्राभिषेक के लाभ शुद्ध जल – समस्त पापों का क्षय, मन की शांति और जीवन में सुख-समृद्धि।,गंगाजल – पवित्रता, पुण्य की प्राप्ति और आध्यात्मिक उन्नति।,दूध – उत्तम स्वास्थ्य, संतान सुख और पारिवारिक सुख-शांति।दही – धन-धान्य, यश और प्रतिष्ठा में वृद्धि।,घी – तेज, आयु, ऐश्वर्य और रोगों से रक्षा।
शहद – वाणी में मधुरता, आकर्षण और सामाजिक सम्मान।,शक्कर या मिश्री – जीवन में सुख, आनंद और मानसिक संतोष।गन्ने का रस – आर्थिक उन्नति, व्यापार में सफलता और लक्ष्मी कृपा।,इत्र या गुलाब जल – सौभाग्य, मनोकामना पूर्ति और मन की प्रसन्नता।तिल के तेल से या सरसो तेल से अभिषेक – शनि दोष की शांति तथा बाधाओं में कमी,गुप्त शत्रुओं से रक्षा ,काले तिल मिश्रित जल – पितृ दोष शांति और नकारात्मकता का नाश।,कुशा मिश्रित जल – ग्रह दोषों की शांति और धार्मिक पुण्य।,भस्म – वैराग्य, आध्यात्मिक शक्ति और भय का नाश।होता है।इस वर्ष श्रावण माह में चार सोमवार हैं !पहला श्रावण सोमवार 3अगस्त, दूसरा श्रावण सोमवार 10 अगस्त,तीसरा श्रावण सोमवार 17 अगस्त,चौथा श्रावण सोमवार 24 अगस्त,श्रावण कृष्ण शिवरात्रि11अगस्त दिन मंगलवार शास्त्रोक्त हैं ! आप सभी देशवासियों को शिवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ !
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🚩श्री ज्योतिष कार्यालय🚩
ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय
देवलोक कॉलोनी हापुड़
ज्योतिष एवं कर्मकाण्ड विशेषज्ञ
सम्पर्क सूत्र 9634408321
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