
भाद्रपद शुक्लपक्ष हरितालिका तीज व्रत 14 सितम्बर दिन सोमवार को रखना शास्त्रोक्त हैं।पारण 15 सितम्बर सूर्योदय उपरांत विस्तार से जाने ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय से 9634408321
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com):देवलोक कॉलोनी स्थित श्री ज्योतिष कार्यालय के ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय ने बताया ज्योतिषशास्त्र एवं वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्लपक्ष हरितालिका तीज व्रत 14 सितम्बर दिन सोमवार को हस्त नक्षत्र युक्त रखना शास्त्रोक्त हैं। यह व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को भगवान शिव और माता पार्वती के पूजन किया जाता हैं। वैदिक पंचांग के गणना के अनुसार तृतीया तिथि प्रारम्भ:13 सितम्बर को प्रातः07बजकर08मिनट बजे से तृतीया तिथि समाप्त:14 सितम्बर सुबह 07 बजकर 06 मिनट बजे तक ! हस्त नक्षत्र युक्त प्रातःकालीन पूजा मुहूर्त 06बजकर 05मिनट बजे से प्रातः 07बजकर 06 मिनट बजे तक अत्यंत शुभ मुहूर्त हैं।अतिआवश्क हेने पर अभिजीत मुहूर्त प्रातः11बजकर 45मिनट बजे से दोपहर 12बजकर 15मिनट बजे तक शुभ हैं ! ज्योतिर्विद प्रीति पाण्डेय ने बताया हरितालिका तीज पूजन में माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। माता की सखी उन्हें हर कर वन में ले गईं ताकि उनका विवाह उनकी इच्छा के विरुद्ध न हो। इसी प्रसंग से हरियालिका नाम पड़ता हैं !इसलिए विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और दाम्पत्य सुख के लिए तथा अविवाहित कन्याएं मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत करती हैं।
हरितालिका तीज में जल और अन्न दोनों का त्याग करके व्रत किया जाता हैं !सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान शिव-माता पार्वती का ध्यान करके संकल्प लें। दिनभर संयम रखें क्रोध, झूठ, विवाद और नकारात्मक विचारों से बचें तथा भगवान शिव-पार्वती का स्मरण करें।विवाहित महिलाएं पूजा के समय सुहाग की वस्तुएं सिंदूर, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, मंगलसूत्र आदि धारण करें। व्रत परंपरा में अगले दिन 15सितम्बर दिन मंगलवार को सूर्योदय उपरांत पूजा के बाद अन्न और फल का दान कर व्रत खोलने की विधि हैं । अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पारण करें।
ज्योतिर्विद प्रीति पाण्डेय ने सभी से महत्वपूर्ण आग्रह किया :गर्भवती, बीमार, बुजुर्ग या ऐसी महिलाएं जिनके लिए निर्जला व्रत स्वास्थ्य की दृष्टि से उचित न हो, वे स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या जल ग्रहण कर सकती हैं। व्रत की भावना और श्रद्धा महत्वपूर्ण है।
हरतालिका तीज की पूजा-विधि
पूजा सामग्री
भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा अथवा मिट्टी/बालू से बनाई गई प्रतिमा
गणेश जी की प्रतिमा
कलश
अक्षत
रोली/कुमकुम
हल्दी
मौली
पुष्प एवं माला
बेलपत्र
दूर्वा
धतूरा
फल
पंचामृत
दूध, दही, घी, शहद
गंगाजल
धूप-दीप
नैवेद्य
सिंदूर
चूड़ियां एवं सुहाग सामग्री
वस्त्र
मेहंदी आदि
पूजा का क्रम
१. प्रातः ब्रह्ममुहूर्त/सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें।
२. स्वच्छ अथवा सुहाग के वस्त्र धारण करें।
३. पूजा स्थल को साफ करके चौकी पर लाल/पीला वस्त्र बिछाएं।
४. कलश स्थापित करें और गणेश जी का पूजन करें।
५. मिट्टी/बालू से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा बनाएं या स्थापित प्रतिमा रखें।
६. शिव-पार्वती का आवाहन करके रोली, अक्षत, पुष्प, बेलपत्र आदि अर्पित करें।
७. माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित करें।
८. भगवान शिव को बेलपत्र, पुष्प, धतूरा आदि अर्पित करें।
९. पंचामृत एवं गंगाजल से पूजन करें।
१०. हरितालिका तीज की कथा का श्रवण/पाठ करें।
११. शिव-पार्वती की आरती करें।
१२. पति की दीर्घायु, सुखी दाम्पत्य और परिवार की मंगलकामना करें।
इस बार सुबह की पूजा को विशेष महत्व हैं
नमः शिवाय।
माता पार्वती के लिए:
उमायै नमः।
या शिव-पार्वती का संयुक्त स्मरण:
पार्वतीपतये नमः।
पूजा के अंत में “हरतालिका तीज व्रत कथा” सुनना/पढ़ना और आरती करना शुभ माना जाता है।
विशेष बात
हरितालिका तीज में शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा सबसे महत्वपूर्ण है। केवल व्रत रखने के बजाय श्रद्धापूर्वक संकल्प, शिव-पार्वती पूजन, व्रत कथा और आरती करना परंपरा के अनुसार श्रेष्ठ हैं।
🚩विशेष नोट:- किसी प्रकार की भ्रमित करने वाले बातों पर ध्यान न दें।🚩
🚩श्रीरस्तु🚩
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🚩श्री ज्योतिष कार्यालय🚩
ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय
देवलोक कॉलोनी हापुड़
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