
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हिंदी प्रोत्साहन समिति हापुड़ के तत्वावधान में एक शाम देश के नाम कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया कवि सम्मेलन की अध्यक्षता डा अनिल बाजपेई ने की तथा मंच संचालन गरिमा आर्य ने किया।
मुख्य अतिथि राज चेतन्य ने पढ़ा जो बहार लेके आये,चमन के लिए।
बीज बनकर मिटे, नवसृजन के लिए।
डा अनिल बाजपेई ने पढ़ा कहे पतंगा दीप से,मित्र न राखे शर्त!
अनिल होम हों प्यार में,यही मित्र का अर्थ!!
गरिमा आर्य ने पढ़ा“वतन पर मिटने वालों का बाकी बस अब निशां होगा
उनके जज़्बे को सलाम और चर्चा उनका हर ज़ुबां होगा
है चीन और पाकिस्तान
की तो औकात क्या
गर अपनी पर आ जाएँ न उनका नामो निशां होगा”
डा आराधना बाजपेई ने पढ़ा अर्पित हृदय के सुमन कर रही हूं
रणबांकुरों को नमन कर रही हूं!
डा मंजीत सिंह अवतार ने पढ़ा वतन की आन जिंदा है वतन की शान जिंदा है
मिला पुरखों से जो हमको वो स्वाभिमान जिंदा है,
कहीं उत्सव कहीं खुशियां जो मिलकर हम मनाते हैं
शहीदों के लहू से ही ये हिंदुस्तान जिंदा है।।
- मन्जीत सिंह अवतार
मोनिका सिद्धार्थ ने पढ़ा,
देश के शहीदों तुम्हें दिल से सलाम,उनका किया तुमने भारत का नाम।
राजकुमार हिन्दुस्तानी ने पढ़ा ,शेखर सा स्वाभिमानी भगत सा बलिदानी।
बिस्मिल की शायरी का शब्द सार चाहिए।
झूठ की उमंग वाला लूट की तरंग वाला
नोटों का नही हमें तो कोई हार चाहिए।।
डा पुष्पा गर्ग ने पढ़ा
मजहबों के बीच में अब पिस रहा भारत वतन।
समझ में कुछ नहीं आता तेरा वतन मेरा वतन ।।
डा सतीश वर्धन ने पढ़ा
विष दिए जाओ तुम मैं पिये जाऊंगा,नाम फिर भी तेरा मैं लिये जाऊंगा। लो सौंपता हूँ तुम्हे अपनी सांसो की डोर,चाहोगे जब तलक मैं जिये जाऊंगा ।।
डा जय प्रकाश मिश्र ने पढ़ा बरसते नहीँ तो गरजकर दिखाते
उठाकर धनुष को निशाना लगाते
माना विजय है नहीं सबके वश में
किसी भाँति अपना हुनर दिखाते ।
अनिल सारस्वत ने पढ़ाअनिल भारत माता की जय बोली
तब आजादी पाई थी
वंदे मातरम् गान हुआ था तब आजादी पाई थी
इंकलाबी नारा गूंजा तब आजादी पाई थी
फांसी पर झूले सेनानी तब आजादी पाई थी।
देवेन्द्र दीक्षित शूल ने पढ़ा
चारों तरफ हैं शूल दामन बचाईए,आप भी गुलाब से मुस्कराए।
डा पूनम ग्रोवर ने पढ़ादेश की माटी मेरी
मेरा वंदन मान है।
आज़ाद हिन्दुस्तान मेरा,
यही तो मेरा प्राण है।
श्रीकांत सिंह ने पढ़ा
एक बार नहीं, दस बार नहीं, हर बार लिखेंगे।
हम एक थे, हम एक हैं, हम एक रहेंगे।।
कवि सम्मेलन में देश के सुदूर भागो से कवियों ने काव्य पाठ करके कवि सम्मेलन को सफल बनाया।

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