
वट सावित्री पूजन 16 मई को, प्रातः 7:12 बजे से प्रातः 8:24 बजे तक शुभ मुहूर्त
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): श्री सनातन ज्योतिष कर्मकांड महासभा महिला प्रदेशाध्यक्ष ज्योतिर्विद प्रीति पाण्डेय ने बताया कि वट सावित्री पूजन 16 मई 2026, शनिवार को ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि पर शास्त्रोक्त है। व्रत एवं पुण्य घट/वट‑वृक्ष की मुख्य पूजा सुबह के समय की जाती है। सुबह लगभग प्रातः 7:12 बजे से प्रातः 8:24 बजे तक शुभ मुहूर्त हैं ।श्री सनातन ज्योतिष कर्मकांड महासभा के महिला प्रदेशाध्यक्ष ज्योतिर्विद प्रीति पाण्डेय ने बताया की अभिजीत मुहूर्त (दोपहर 11:50बजे से दोपहर 12:45 बजे तक) में भी पूजा कर लेते हैं, यह भी शुभ माना जाता है। सुबह का समय अधिक शुभ माना गया है, तो सुबह 7 बजे के बाद नित्यकर्म, स्नान‑धौत वस्त्र धारण के बाद वट‑सावित्री पूजन करें।बरगद (वट) के पेड़ के पास या घर पर वट की टहनी/प्रतिमा रखकर सावित्री‑सत्यवान की कथा पढ़कर माला, फूल, अक्षत, दीप, फल और प्रसाद चढ़ाएँ!बड़अमावस्या सनातन पंचांग में ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को कहा जाता है। यह वट सावित्री व्रत के रूप में विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं द्वारा मनाया जाता है।यह दिन भगवान की कृपा प्राप्ति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।ज्योतिर्विद प्रीति पाण्डेय ने बताया की सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए व्रत रखती हैं। पूजा से परिवार का कल्याण होता है।पौराणिक कथा के अनुसार, सावित्री ने इसी दिन बरगद के पेड़ के नीचे दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे। इसलिए इस अमावस्या को वट अमावस्या भी कहते हैं। इस व्रत से संकट दूर होते हैं।सुहागिन महिलाएं 16 श्रृंगार कर बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं। सावित्री-सत्यवान और इष्टदेवों का विधि-विधान से पूजन करें। बड़ा अमावस्या, जिसे वट सावित्री अमावस्या भी कहा जाता है, ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को मनाया जाता है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए बरगद वृक्ष की पूजा करती हैं।जल, दूध, गंगाजल, रोली, हल्दी, अक्षत, फूल, फल, मिठाई, धूप, दीपक, मौली, सत्तू, चना। सोलह श्रृंगार की सामग्री भी तैयार रखें।सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें और सोलह श्रृंगार करें।बरगद वृक्ष के पास साफ जगह पर हल्दी से चौक बनाएं।वृक्ष की जड़ में जल, दूध, गंगाजल अर्पित करें! रोली, हल्दी, चंदन लगाएं।मौली(कलावा) बांधकर 7,11 या 21 परिक्रमा करें, हर चक्कर में मौली लपेटें।फूल, फल, मिठाई चढ़ाएं; धूप-दीप जलाकरआरती उतारें।वट सावित्री व्रत कथा पढ़ें या सुनें।प्रार्थना करें “हे वट वृक्ष सावित्री की भांति मेरे पति को दीर्घायु प्रदान करें।सत्तू, चना आदि भोग लगाकर प्रसाद वितरित करें। व्रत पारण अगले दिन 17 मई दिन रविवार में करें !
श्री सनातन ज्योतिष कर्मकांड महासभा (रजि.)
महिला प्रदेशाध्यक्ष(उत्तर प्रदेश)
ज्योतिर्विद प्रीति पाण्डेय
देवलोक कॉलोनी हापुड़
संपर्क सूत्र 9634408321
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