मंगलवार आज छह पर्वों का अद्भुत संजोग
पंडित के0 सी0 पाण्डेय ने बताया कि 17 सितंबर आज कई वर्षों बाद छह पर्वों का अद्भुत संजोग बन रहा है:
1- अनंत चतुर्दशी
2- सूर्य संक्रांति पुण्यकाल
3- विश्वकर्मा जयंती
4- गणपति विसर्जन
5- श्राद्ध पक्ष आरम्भ पितृ तर्पण
6- भाद्रपद पूर्णिमा व्रत पूजन
मंगलवार आज कई वर्षो बाद अद्भुत संयोग बन रहा है। मंगलवार एक ओर सूर्योदय होते ही गंगा, गोदावरी आदि पवित्र नदियों में स्नान करके श्रद्धालुओं ने सूर्य संक्रांति का पुण्यफल प्राप्त किया तो स्नान बाद अनन्त चतुर्दशी का व्रत पूजन कर श्रीहरि की पूजा के बाद अपनी भुजा में अनंत बांधेगे। भक्त दोपहर होते ही अपने पूर्वजों के लिए तर्पण श्राद्ध करेंगे। साथ ही पूरे दिन भगवान विश्वकर्मा का पूजन व भंडारा चल रहा है। वहीं 10 दिनों से चल रहे गणपति पूजन के बाद बप्पा की विदाई भी हो रही है तथा सायंकाल बेला में पूर्णिमा व्रत के साथ ही भगवान श्री सत्यनारायण का व्रत पूजन कर भगवान की कृपा प्राप्त करेंगे। भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा के अध्यक्ष पंडित के0 सी0 पाण्डेय काशी वाले ने बताया कि धर्मग्रंथो के अनुसार सूर्य के कन्या राशि में गोचर के बाद आश्विन मास शुरू होते ही 16 दिन का श्राद्ध पक्ष बताया गया है। 16 सितंबर को सायंकाल के बाद रात्रि के प्रथम पहर 7.43 पर सूर्य कन्या राशि में प्रवेश करेगा जिसका पुण्यकाल अगले दिन 17 सितंबर को सूर्योदय से दोपहर 12.49 तक रहेगा। अतः श्राद्ध पक्ष 17 से शुरू हो जाएगा। स्कन्द पुराण व भविष्य पुराण के अनुसार यदि भाद्रपद मास में चतुर्दशी तिथि तीन मुहूर्त भी व पूर्णिमा का योग एक ही दिन हो तो उसी दिन में अनंत पूजन करते हुए श्री हरि की कृपा प्राप्त करें। चतुर्दशी तिथि 16 सितंबर को दोपहर बाद 3.10 से अगले दिन 17 सितंबर को दोपहर पूर्व 11.44 तक है। उसके बाद पूर्णिमा तिथि लग जाएगी। अतः दोपहर में पूर्णिमा का श्राद्ध होगा तथा श्री सत्यनारायण का व्रत रखने वाले 17 को सायंकाल में व्रत कथा सुनेंगे। भगवान विश्वकर्मा की पूजा भी शास्त्रनुसार 17 सितंबर को होगा। कोई तिथि क्षय ना होने से इस बाऱ पूरे 16 दिन का श्राद्ध रहेगा जिसमें अपने पितरों को तृप्त कर सकेंगे।
17 सितम्बर प्रथम श्राद्ध पूर्णिमा
18 सितम्बर प्रतिपदा श्राद्ध
19 सितम्बर द्वितीया श्राद्ध
20 सितंबर तृतीया श्राद्ध
21 सितम्बर चतुर्थी श्राद्ध
22 सितम्बर पंचमी श्राद्ध
23 सितम्बर षष्ठी श्राद्ध
24 सितंबर सप्तमी श्राद्ध
25 सितंबर अष्टमी श्राद्ध
26 सितंबर नवमी श्राद्ध
27 सितंबर दशमी श्राद्ध
28 सितम्बर एकादशी श्राद्ध
29 सितम्बर द्वादशी श्राद्ध
30 सितम्बर त्रयोदशी श्राद्ध
01 अक्टूबर चतुर्दशी श्राद्ध
02 अक्टूबर अमावस्या श्राद्ध होगा
धर्मग्रंथो में श्राद्ध के विषय में विस्तार से बताया गया है निर्णयसिंधु में ब्रह्मपुराण के अनुसार बताया गया है की पक्षभर अर्थात आश्विन कृष्ण पक्ष से प्रतिदिन श्राद्ध करना चाहिए यदि संभव ना हो तो त्रिभागहीन अर्थात पंचमी से या दशमी से या अर्धभाग यानि अष्टमी से भी श्राद्ध कर सकते है इससे पितर तृप्त होते है निर्णयसिंधु व धर्मसिंधु धर्म ग्रंथ के अनुसार विवाह से पहले मृत्यु होने वाला का श्राद्ध पंचमी तिथि को ,नवमी को किसी भी सौभाग्यवती (सुहागन) स्त्री की मृत्यु का श्राद्ध , द्वादशी को सन्यासी का श्राद्ध व नवजात शिशु का श्राद्ध त्रयोदशी को तथा अकाल मृत्यु वाले व्यक्ति का श्राद्ध चतुर्दशी को तथा बाकि सभी व्यक्तियों का श्राद्ध सर्व पितृ अमावस्या को करना चाहिए यही शास्त्र सम्मत है श्राद्ध पक्ष में प्रतिदिन 5 ग्रास गाय, कौआ, कुत्ता, चींटी व देवता भोजन निकाल कर ही स्वयं भोजन करना चाहिए तर्पण प्रतिदिन करना चाहिए योग्य ब्राह्मण द्वारा श्राद्ध कराकर उन्हें यथाशक्ति दान देना चाहिए, पितरों के निमित्त उनके प्रिय वस्तुओं का दान भी करना चाहिए श्राद्ध पक्ष में किए गए श्राद्ध तर्पण आदि से पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देकर अपने यथोचित स्थान को चले जाते है
18 सितंबर को स्नान दान पूर्णिमा तथा चन्द्रग्रहण भी है लेकिन भारत में दृश्य नहीं होने के कारण यहाँ कोई भी सुतक या प्रभाव मान्य नहीं होगा.

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