
श्री सुखदेव जी का प्राकट्य व राजा परीक्षित जन्म कथा का वर्णन सुन भक्त हुए भाव विभोर
भागवत कथा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मानव जीवन को उसके वास्तविक उद्देश्य की ओर मार्गदर्शन कराने वाली गाथा है:- पं रोहित रीछारीया जी महाराज
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com):हापुड़ की दिल्ली रोड पर स्थित दिव्य धाम श्री बाला जी मन्दिर हापुड़ मे चल रही सात दिवसीय श्रीमदभागवत महाकथा के द्वितीय दिवस की कथा में बागेश्वर धाम से पधारे महाराज प• श्री रोहित रिछारिया जी महाराज (कृपा पात्र श्री बागेश्वर धाम सरकार) ने भक्तो को द्वितीय दिवस की कथा का श्रवण कराते हुए सुनाया कि राजा परीक्षित का जन्म महाभारत युद्ध के अंत में अभिमन्यु और उत्तरा के गर्भ से हुआ था। जब अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया था। भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं अपने योगबल से गर्भ में बालक परीक्षित की रक्षा की जिससे वह मृतप्राय उत्पन्न हुआ।
इसके बाद श्रीकृष्ण ने उसे जीवित किया और उसका नाम ‘परीक्षित’ रखा क्योंकि वह पांडवों के क्षीण (नाश) होने पर उत्पन्न हुआ था। महाभारत युद्ध के बाद, गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा ने अपनी हार का बदला लेने के लिए भगवान ब्रह्मास्त्र का प्रयोग पांडवों की माता उत्तरा के गर्भ पर किया। उत्तरा ने भगवान श्रीकृष्ण को पुकारा और वे स्वयं उत्तरा के गर्भ में प्रवेश कर गए। गर्भ के भीतर, बालक परीक्षित ने भगवान श्रीकृष्ण को देखा। ब्रह्मास्त्र के प्रभाव से परीक्षित मृतप्राय पैदा हुए लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपने योगबल से उन्हें पुनः जीवित किया। भगवान श्रीकृष्ण ने ही उस बालक का नाम ‘परीक्षित’ रखा क्योंकि वह कौरवों के कुल के परिक्षीण (नाश) होने पर उत्पन्न हुआ था।
परीक्षित ने पांडवों के वंश को आगे बढ़ाया जो कुरुवंश के विनाश के बाद महत्वपूर्ण था। परीक्षित को ऋषि के श्राप के कारण तक्षक नाग ने डंसा था जिसके बाद उन्होंने गंगा तट पर शुकदेव जी से श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। यही श्रीमद्भागवत कथा बाद में जन-जन के लिए कल्याणकारी सिद्ध हुई। इस अवसर पर बालाजी मंदिर के संस्थापक स्वामी अशोक आचार्य जी महाराज, पीठाधीश्वर स्वामी यश्वरधानाचार्य जी महाराज, प्रिंस गोयल, आरती गोयल, नेहा गोयल, गौरव गोयल, यश, संजीव, हर्ष शर्मा, योगेंद्र, उमेश, देवेंद्र, राज मोहन, प्रिंस, कपिल, सुशील, संजीव वर्मा, आशीष, कृष्णा, दीपक, नीलम, अनिता गोयल, मिनाक्षी, प्रीति शर्मा, अर्चना, अलका, आरती, पूजा, शशि सहित सैकडों की संख्या मे भक्त जन उपस्थित रहे।
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