हापुड़, सीमन (ehapurnews.com) : जनपद हापुड़ की तीर्थ नगरी गढ़मुक्तेश्वर स्थित गंगा में 11 जनवरी को वायुसेना का एक विमान तकनीकी खराबी के चलते गिर गया था। यह हादसा 11 जनवरी 1967 को हुआ जब दिल्ली से भारतीय वायु सेना के फ्लाइंग ऑफिसर मंजुल उपाध्याय हंटर विमान लेकर उड़े थे और चार अन्य सेना के विमान का नेतृत्व कर रहे थे। जैसे ही वह गढ़ के पास पहुंचे तो विमान झटके लेने लगा और देखते ही देखते प्लेन गंगा में गिर गया। वायु सेना, थल सेना, जल सेना तथा अर्ध सैनिक बल गढ़मुक्तेश्वर पहुंचे और विमान की तलाश की लेकिन मंजुल उपाध्याय नहीं मिले। उसके बाद से ही मंजुल का परिवार हर वर्ष शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करने यहां आता है।
राजस्थान के जयपुर निवासी 22 वर्षीय मंजुल 20वें गणतंत्र दिवस की तैयारी में जुटे थे। 26 जनवरी से पहले मंजुल ने हंटर विमान को लेकर दिल्ली से उड़ान भरी और जैसे ही वह गढ़ के पास पहुंचे तो उन्होंने सूचना दी कि विमान झटके ले रहा है और चक्कर काट रहा है। उन्होंने अगली सूचना दी कि वह विमान से उतर रहे हैं लेकिन इतना कहने के बाद संपर्क कट गया और विमान गढ़ गंगा में गिर गया। जब आसमान से विमान गंगा में गिरा तो करीब 5 फुट रेत में नीचे धंस गया। जब सेना विमान को निकालने के लिए गढ़ पहुंची तो विमान नीचे की तरफ धंस्ता चला गया और 24 घंटे में ही करीब 14 फुट नीचे पहुंच गया था। उसके बाद विमान लगातार नीचे धंसता चला गया जिसका पता नहीं चल सका। शहीद के परिवार वालों का कहना है कि वह मानते हैं कि मंजुल ने जल्द समाधि ले ली है और वह हर वर्ष यहां आकर उन्हें याद कर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
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