
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हापुड़ के जीएसटी विभाग में उस समय हड़कंप मच गया जब सहायक आयुक्त जीएसटी के बाबूजयदीप को शुक्रवार को एंटी करप्शन की टीम ने रंगे हाथों दबोच लिया। विभाग में इस कदर भ्रष्टाचार है कि अधिकारियों ने प्राइवेट बाबू रखे हैं जो नोटिस भेज कर खुद ही नोटिस का जवाब देते हैं। इसके बदले वह कुछ रुपयों की मांग करते हैं। प्राइवेट कर्मियों का साझेदार कोई और नहीं बल्कि अधिकारी ही हैं। मजबूरन व्यापारियों, दुकानदारों को रिश्वत देनी पड़ती है। सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर प्राइवेट कर्मियों को अधिकारियों ने किसके इशारे पर रखा है? इन प्राइवेट कर्मियों की तनखा कहां से आती है? आखिर यह प्राइवेटकर्मी अधिकारी बनकर लोगों पर रोब क्यों दिखाते हैं?
हापुड़ के स्टेट जीएसटी की बात करें तो रेवती कुंज में स्थित कार्यालय में कुछ उपायुक्त ने तो फुल टाइम प्राइवेट कर्मी अपने कंप्यूटर पर तैनात किए हैं। 9 से 6 की ड्यूटी का घंटा बजाने वाले यह प्राइवेटकर्मी व्यापारियों, दुकानदारों और उद्यमियों दुकानदारों को नोटिस जारी करते हैं। जब पीड़ित नोटिस लेकर कार्यालय पहुंचता है तो उनसे कुछ रुपयों की मांग करते हैं। पीड़ित द्वारा रिश्वत की रकम का मॉल भाव करने के बाद एक राशि तय होती है जिसके बाद प्राइवेट कर्मी खुद ही नोटिस का जवाब दाखिल कर देते हैं। एक प्राइवेटकर्मी तो हापुड़ के अर्जुन नगर में रहता है। सूत्रों ने बताया कि यह प्राइवेट कर्मी अधिकारियों की शह पर चाय की दुकान, जूस की दुकान पर रिश्वत लेते हैं। कई बार तो सड़क पर ही रुपए थाम लेते हैं। शासन की मंशा के विपरीत अधिकारी प्राइवेट कर्मियों को बढ़ावा दे रहे हैं जो नियमों के विपरीत है। लोगों ने मामले में शासन से जांच कराने की मांग की है।
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