
गंगा दशहरा सोमवार कल, पापों से मुक्ति मिलने की मान्यता
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): गंगा दशहरा 25 मई सोमवार को मनाया जाएगा। भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित के0 सी0 पाण्डेय काशी वाले ने बताया कि स्कंद पुराण के अनुसार इस दिन गंगा स्नान के बाद तिलोदक द्वारा अर्घ्य देने से मनुष्य दश पापों से मुक्त हो जाता है। दशमी तिथि 25 मई को सुबह 4.31 से 26 मई को सुबह 5.11 तक है। अतः गंगा दशहरा स्नान-दान प्रारम्भ 25 मई को सुबह 4.31बजे से सर्वार्थ सिद्धि योग, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र, रवि योग में प्रारम्भ होकर पूरे दिन शुभ फल प्रदान करने वाला होगा।
महासभा की बैठक नीलकंठ महादेव मंदिर (रेलवे बैरक) हापुड़ में हुई जहाँ विद्वानों द्वारा अधिक ज्येष्ठ मास में दशहरा पर्व पर सर्वसम्मति से निर्णय हुआ। जानकारी देते हुए प्रवक्ता पंडित प्रशांत वशिष्ठ ने बताया कि विद्वानों ने निर्णय सिंधु धर्मग्रन्थ में लिखें स्पष्ट श्लोक वर्णन “ज्येष्ठे मलमासे सति तत्रैव दशहरा कार्या न तु शुद्धे अर्थात ज्येष्ठमास में मलमास होने पर उसी में ही दशहरा करे, शुद्धमास में न करे के आधार पर निर्णय दिया कि 25 मई को गंगा दशहरा पूर्णतः शास्त्रसम्मत है। मंत्री आचार्य देवी प्रसाद तिवारी ने कहा कि इस पर्व पर गंगा स्नान कर दान करने से मनुष्य दस प्रकार के पापों से मुक्त होकर जीवन में मनोवांक्षित फल के साथ सुख भोगकर मोक्ष को प्राप्त होता है। ब्रह्म पुराण व वाराह पुराण के अनुसार इस दिन व्रत रहकर गंगाजल में स्थित होकर गंगास्तोत्र का दस बार पाठ के साथ माँ गंगा का पूजन करने से दरिद्र व अक्षम व्यक्ति भी पापों से मुक्त होकर समस्त इच्छाओं की पूर्ति प्राप्त कर लेता है पंडित अजय पाण्डेय ने कहा कि गंगा दशहरा के दिन माँ गंगा के पूजन में समस्त सामग्री दस की संख्या में चढ़ाना चाहिए जैसे 10 पुष्प,10 पान, 10 लौंग, 10 इलायची, 10 फल, 10 मिष्ठान, 10 दीपक आदि साथ ही 10 ब्राह्मणों को यथा शक्ति दान अवश्य देना चाहिए गंगा पूजन के समय “ॐ नमः शिवायै नारायण्यै दशहरायै गंगायै नमो नमः” मंत्र का जप करते रहना चाहिए इस दिन ही भगवान राम ने रामेश्वर शिवलिंग की स्थापना किया था अतः भगवान शिव का पूजन भी इस दिन विशेष पुण्य फलदायक है कोषाध्यक्ष पंडित मित्र प्रसाद काफ्ले बताया कि बाल्मीकि रामायण के अनुसार राजा सगर, अंशुमान, दिलीप सहित चौथी पीढ़ी के राजा भगीरथ के घोर तपस्या, श्रम व श्रद्धा के भगीरथ प्रयास से चार पीढ़ियों के नब्बे हजार वर्षो से अधिक की तपस्या के बाद ज्येष्ठ शुक्ल दशमी यानि दशहरा के दिन गंगा जी स्वर्ग से पृथ्वी पर आयी भगीरथ के प्रयास द्वारा आने के कारण ही माँ गंगा का एक नाम भागीरथी भी पड़ा, महाभारत में वर्णन “कृतयुगे पुण्यं त्रेतायां पुष्करं स्मृतम्। द्वापरेऽपि कुरुक्षेत्रं गङ्गा कलियुगे स्मृता ॥’ अर्थात कलियुग में तो गंगा ही प्रमुख फलदायक है गंगा स्नान के लिए हापुड़ का गढ़मुक्तेश्वर प्रमुख महत्वपूर्ण स्थान है साथ ही प्रयागराज, काशी, गंगासागर आदि स्थान प्रमुख है माँ गंगा के 12 नामो का स्मरण यथा -“नन्दिनी नलिनी सीता मालती च महापगा। विष्णुपादाब्जसम्भूता गङ्गा त्रिपथगामिनी ।। भागीरथी भोगवती जाह्नवी त्रिदशेश्वरी ।। का जप करते हुए स्नान करने से भी गंगा स्नान का पुण्य फल प्राप्त हो जाता है गंगा दशहरा के दिन घड़े के साथ जल दान करना चाहिए, सत्तू का दान भी श्रेष्ठ फल देता है इस दिन पितरों के लिए गुड़, घी, तिल व मधु युक्त खीर गंगा जी को समर्पित (डालने) करने से पितर संतुष्ट होकर सौ वर्षो तक तृप्त होकर संतानों को आशीर्वाद व मनोवांक्षित फल प्रदान करते है स्नान करना विशेष शुभफल दायी रहेगा साथ ही पुरे दिन स्नान का शुभ योग है बैठक में परामर्श मंडल विद्वान पं0 ओम प्रकाश पोखरियाल,पं0 आदित्य भारद्वाज,उपाध्यक्ष पंडित गौरव कौशिक, पं0 आशुतोष शुक्ला समन्वयक पं0 अजय पाण्डेय, मिडिया प्रभारी एस्ट्रो धर्मेंद्र बंसल, संगठन मंत्री पंडित जगदम्बा शर्मा,महामंत्री अनिशा सोनी पाण्डेय, मंत्री डा० करुण शर्मा, मिडिया प्रभारी पं0 सर्वेश तिवारी, पंडित अजय त्रिपाठी, राहुल शर्मा ऑडिटर,पं0 अनिल कुमार शुक्ला, पं0 राहुल शर्मा असोढा जी, लेखानिरीक्षक पं0 अमर प्रकाश पाण्डेय, पं. दीपक तिवारी, पं0 मुनेश शुक्ला, पं0 अभिषेक अवस्थी ,प्रचार मंत्री शैलेन्द्र मिश्रा शास्त्री, सह कोषाध्यक्ष पं0 आशीष पोखरीयाल, पं0 शैलेन्द्र अवस्थी सहित अन्य विद्वान उपस्थित रहे बैठक की अध्यक्षता महासभा अध्यक्ष पंडित के0 सी0 पाण्डेय काशी वाले ने किया.
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