
गंगा दशहरा 25 मई दिन सोमवार को, स्नान‑दान का शुभ मुहूर्त जाने ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय से
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): श्री सनातन ज्योतिष कर्मकांड महासभा (रजि.) के तीनों संरक्षक कमलेश कुमार घिल्डियाल, डॉ.वासुदेव शर्मा एवं आचार्य पंडित अखिलेश शर्मा व अन्य पदाधिकारियों से चर्चा के बाद प्रदेशाध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित सुबोध ने बताया कि यह पर्व ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को आता है जो गंगा के धरती पर अवतरण और उसके पवित्र स्वरूप का स्मरण है।
ज्योतिष सम्राट पंचांग के अनुसार 24/25 मई सोमवार को प्रातः 4:31बजे से प्रारंभ होकर दशमी तिथि का समापन 25/26 मई मंगलवार को प्रातः 5:11 बजे तक हैं। निर्णय सिंधु, धर्मसिंधु और दृकगणित के पंचांग के अनुसार गंगा दशहरा 25 मई दिन सोमवार को शास्त्रोक्त हैं।
1.सर्वोत्तम समय (ब्रह्म मुहूर्त)
गंगा स्नान और दान के लिए सर्वाधिक शुभ समय हैं। प्रातः4:30 बजे से 5:30 बजे तक (ब्रह्म मुहूर्त) इस अवधि में गंगा में स्नान, दान और ईश्वर की पूजा करना विशेष फलदायी माना गया है।
2.अमृत चौघड़िया सुबह 5:25 बजे से 7: 08बजे तक – स्नान और दान बहुत शुभ।
शुभ चौघड़िया सुबह 8: 51बजे से 10:34बजे तक-दान,पूजा और जलदान के लिए अच्छा समय हैं।
3.अगर कोई इन मुहूर्त में स्नान न कर पाएं तो वैकल्पिक दोपहर 12:17बजे से 1:10बजे तक का समय भी स्नान‑दान के लिए शुभ रहेगा।
4.अगर गंगा घाट न जा सकें
घर पर गंगाजल में मिले हुए जल से स्नान करके भी इसी मुहूर्त में दान और जप करें।विशेष ध्यान रखें कि गंगाजल में ही पानी मिलाया जाए न कि पानी में गंगाजल नियम यही कहता हैं कि गंगाजल में ही पानी मिलना चाहिए।
महिला प्रदेशाध्यक्ष ज्योतिर्विद प्रीति पाण्डेय ने बताया कि राजा सगर और उनके 60,000 पुत्रों का श्राप प्राचीन काल में राजा सगर बहुत तेज और शक्तिशाली राजा थे। उन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया था।
यज्ञ के अश्व को इंद्र देवता ने छीनकर कपिल मुनि के आश्रम में छुपा दिया। सगर के 60,000 पुत्र अश्व ढूंढते‑ढूंढते पृथ्वी को खोदते‑खोदते पाताल तक पहुंच गए, जहाँ कपिल मुनि तपस्या कर रहे थे।उनकी भावना गलत समझकर कपिल मुनि ने क्रोध से अपने आग्नेय नेत्र खोले और सारे 60,000 पुत्र भस्म हो गए।भगीरथ की कठोर तपस्या इन्हीं पुत्रों के उद्धार और मोक्ष के लिए उनके वंशज राजकुमार भगीरथ ने भगवान से मांगी कि जिससे उनके पूर्वजों की आत्माएं शांति पाएं।
उन्होंने अत्यंत तीव्र तपस्या की नंगे पैर,जटा में सूर्य की तपिश झेलते हुए,भूमि पर लेटकर तपस्या करते रहे। भगीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा देव ने उनसे वर मांगने को कहा,तो भगीरथ ने ब्रह्मलोक से गंगा का धरती पर अवतरण मांगा।ब्रह्मा बोले कि गंगा की धार इतनी तेज है कि अगर सीधे धरती पर गिरी तो सब नष्ट‑भ्रष्ट हो जाएगा। इसलिए भगवान शिव ने अपनी जटाओं में गंगा‑स्वरूप को धारण किया और फिर उसे सात धाराओं में बांटकर धीरे‑धीरे धरती पर उतारा। गंगा का धरती पर अवतरण और गंगा दशहरा इसी प्रकार गंगा भगीरथ के सामने उतरी और उनके नेतृत्व में गंगोत्री से लेकर गंगासागर (सागर द्वीप) तक बहती हुई चली। इन 60,000 पुत्रों की आत्माएं गंगाजल के स्पर्श से गूढ़ पापों से मुक्त होकर मोक्ष को प्राप्त हो गईं।
ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन गंगा का यही धरती पर अवतरण याद किया जाता है, इसलिए इस दिन गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता हैं। जब गंगा स्नान, दान और जप‑पूजा से पापों का नाश और आत्मा की शुद्धि होती है।
सभी देशवासियों को श्री सनातन ज्योतिष कर्मकांड महासभा की ओर से गंगा दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई।
श्री सनातन ज्योतिष कर्मकांड महासभा (रजि.)
प्रदेशाध्यक्ष
ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय
देवलोक कॉलोनी (हापुड़)
संपर्क सूत्र-9634408321
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