
सरस्वती कॉलेज ऑफ फार्मेसी में आधुनिक विश्लेषणात्मक तकनीकों पर दो दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित
हापुड़, सीमन/रियाज अहमद(ehapurnews.com): हापुड़। सरस्वती कॉलेज ऑफ फार्मेसी (एससीओपी), अनवरपुर, हापुड़ द्वारा बी. वी. पटेल एजुकेशन फाउंडेशन, अहमदाबाद के सहयोग से “द एनालिटिकल वर्कबेंच : टेक्नीक्स, टूल्स एंड ट्रबलशूटिंग” विषय पर दो दिवसीय हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य फार्मेसी के विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों को आधुनिक विश्लेषणात्मक तकनीकों, उन्नत प्रयोगशाला उपकरणों, उनकी कार्यप्रणाली, प्रभावी संचालन तथा प्रयोगशालाओं में आने वाली तकनीकी समस्याओं की पहचान एवं समाधान का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था। इस पहल के माध्यम से प्रतिभागियों को फार्मास्युटिकल शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में आवश्यक तकनीकी दक्षता विकसित करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र का शुभारंभ प्रतिभागियों के पंजीकरण एवं अतिथियों के स्वागत के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. नीता श्रीवास्तव, उप निदेशक, बी. वी. पटेल एजुकेशन फाउंडेशन, अहमदाबाद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं, जबकि एन. वरदराजन, महाप्रबंधक, सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसआईएमएस), हापुड़ विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया गया। इसके पश्चात सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई तथा अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सरस्वती ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के संस्थापक एवं चेयरमैन डॉ. जे. रामचंद्रन तथा वाइस चेयरपर्सन डॉ. राम्या रामचंद्रन के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। संस्थान के नेतृत्व द्वारा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं उद्योगोन्मुखी कौशल प्रदान करने पर निरंतर जोर दिया जा रहा है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को आधुनिक फार्मास्युटिकल तकनीकों और प्रयोगशाला आधारित कार्यप्रणाली से परिचित कराया गया।
उद्घाटन सत्र में सरस्वती कॉलेज ऑफ फार्मेसी के प्रधानाचार्य प्रोफेसर (डॉ.) नितिन कुमार ने अध्यक्षीय संबोधन प्रस्तुत किया। उन्होंने फार्मास्युटिकल शिक्षा एवं अनुसंधान में प्रयोगशाला आधारित प्रशिक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में आधुनिक विश्लेषणात्मक उपकरणों एवं तकनीकों का ज्ञान फार्मेसी के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल सैद्धांतिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को उपकरणों के संचालन, विश्लेषणात्मक परीक्षणों तथा प्रयोगशाला में आने वाली तकनीकी समस्याओं के समाधान का प्रत्यक्ष अनुभव भी प्राप्त होना चाहिए।
कार्यक्रम में आमंत्रित विशेषज्ञ वक्ताओं ने अपने तकनीकी अनुभव एवं व्यावहारिक ज्ञान को प्रतिभागियों के साथ साझा किया। निशांत गौड़, सहायक प्राध्यापक, लॉयड स्कूल ऑफ फार्मेसी तथा मनोज शर्मा, उप निदेशक, सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने आधुनिक विश्लेषणात्मक तकनीकों, प्रयोगशाला प्रक्रियाओं, उपकरणों के संचालन, गुणवत्ता नियंत्रण तथा फार्मास्युटिकल उद्योग में इनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। इसके अतिरिक्त निशांत मिश्रा, रिसोर्स पर्सन, आरकेजीआईटी कॉलेज ऑफ फार्मेसी ने भी प्रशिक्षण गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया और प्रतिभागियों को तकनीकी विषयों को व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझने में मार्गदर्शन प्रदान किया।
दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान हाई परफॉर्मेंस लिक्विड क्रोमैटोग्राफी (एचपीएलसी) सहित आधुनिक विश्लेषणात्मक तकनीकों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। प्रतिभागियों को विश्लेषणात्मक उपकरणों की कार्यप्रणाली, नमूनों के विश्लेषण, मेथड डेवलपमेंट, प्रयोगशाला प्रक्रियाओं, गुणवत्ता नियंत्रण एवं गुणवत्ता आश्वासन से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने प्रयोगशालाओं में सामान्य रूप से सामने आने वाली तकनीकी समस्याओं, उपकरणों के प्रभावी संचालन, उनकी कार्यप्रणाली में आने वाली बाधाओं की पहचान तथा उनके समाधान की प्रक्रियाओं पर भी विस्तार से चर्चा की।
विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में आयोजित प्रायोगिक एवं हैंड्स-ऑन सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक विश्लेषणात्मक उपकरणों को करीब से समझने तथा उनके प्रभावी उपयोग की जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला। इन सत्रों का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को प्रयोगशाला में वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप कार्य करने के लिए तैयार करना और उनकी तकनीकी समझ को मजबूत बनाना था।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के द्वितीय दिवस पर अतिरिक्त प्रायोगिक सत्रों, संवादात्मक चर्चाओं एवं प्रश्नोत्तर गतिविधियों का आयोजन किया गया। इन सत्रों में विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा प्रयोगशाला में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। प्रतिभागियों को फार्मास्युटिकल अनुसंधान, विश्लेषणात्मक परीक्षणों, उपकरणों की विश्वसनीयता, गुणवत्ता मानकों तथा औद्योगिक प्रयोगशालाओं में अपनाई जाने वाली कार्यप्रणाली के महत्व से भी अवगत कराया गया।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ. नितिन कुमार तथा सह-संयोजक प्रोफेसर (डॉ.) सुप्रिया मैती ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार करने, विशेषज्ञ वक्ताओं के साथ समन्वय स्थापित करने एवं विभिन्न गतिविधियों के सुचारु संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रोफेसर (डॉ.) सुप्रिया मैती ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की शैक्षणिक उपयोगिता एवं महत्व पर प्रकाश डालते हुए फार्मास्युटिकल अनुसंधान, गुणवत्ता नियंत्रण तथा विश्लेषणात्मक परीक्षणों में व्यावहारिक प्रशिक्षण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया।
इस दो दिवसीय कार्यक्रम में सरस्वती कॉलेज ऑफ फार्मेसी के समस्त प्राध्यापकों एवं संकाय सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग प्रदान किया। सभी संकाय सदस्यों ने विभिन्न गतिविधियों के समन्वय, प्रतिभागियों के मार्गदर्शन तथा प्रशिक्षण सत्रों के व्यवस्थित संचालन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. अरुण कुमार ने प्रभावशाली एवं सुव्यवस्थित ढंग से किया। उन्होंने अतिथियों, विशेषज्ञ वक्ताओं एवं प्रतिभागियों का परिचय प्रस्तुत करते हुए उद्घाटन सत्र की विभिन्न गतिविधियों का कुशलतापूर्वक संचालन किया।
कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं प्रमाणपत्र वितरण समारोह के साथ हुआ। इस अवसर पर आयोजकों द्वारा मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि, विशेषज्ञ वक्ताओं, प्रतिभागियों एवं सहयोगी संकाय सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया गया तथा प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहभागिता करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।
बी. वी. पटेल एजुकेशन फाउंडेशन, अहमदाबाद के सहयोग से आयोजित यह दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम फार्मेसी के विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों की व्यावहारिक दक्षता बढ़ाने तथा फार्मास्युटिकल उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप तकनीकी कौशल विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ। इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल विद्यार्थियों के शैक्षणिक ज्ञान को व्यावहारिक अनुभव से जोड़ते हैं, बल्कि उन्हें भविष्य में फार्मास्युटिकल उद्योग, गुणवत्ता नियंत्रण, विश्लेषणात्मक अनुसंधान एवं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर अवसरों के लिए तैयार करने में भी सहायक होते हैं।

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