
श्रावण शुक्लपक्ष पूर्णिमा रक्षाबंधन पर्व पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त पूजन विधि,जाने ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय से 9634408321
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com):देवलोक कॉलोनी स्थित श्री ज्योतिष कार्यालय के ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय ने बताया ज्योतिषशास्त्र और वैदिक पंचांग अनुसार रक्षाबंधन पर्व 28 अगस्त दिन शुक्रवारको मनाया जाएगा। यह श्रावण शुक्ल पूर्णिमा का पावन पर्व हैं। इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधकर उसके सुख, स्वास्थ्य, दीर्घायु और उन्नति की कामना करती हैं तथा भाई बहन की रक्षा और सम्मान का संकल्प लेता हैं। पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त दिन गुरुवार को प्रातः 9:09 बजे प्रारम्भ होकर 28 अगस्त दिन शुक्रवार को प्रातः 9:47 बजे समाप्त होगा ! उदयातिथि सूर्योदय पूर्णिमा तिथि में 28 अगस्त को प्राप्त हो रहा हैं ! भद्रा रक्षाबंधन के दिन सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो चुकी होगी अतः भद्रा का कोई दोष नहीं हैं !रक्षाबंधन वाले दिन सूर्योदय प्रातः 5:57 बजे हो रहा हैं ! अतः रॉखी पूजन तथा बांधने का शुभ मुहूर्त प्रातः 06:05 से प्रारम्भ होकर प्रातः9:48 बजे तक राखी बांधने का समय अत्यंत कल्याण प्रद रहेगा !अतिआवश्यक होने पर दोपहर 12:05 से दोपहर 12:20 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में बांध सकते हैं ! राहु काल प्रातः 10 :30 बजे से दोपहर 12 बजे तक हैं !अतः इस अवधि में बहन भाई को रक्षा सूत्र(रॉखी ) न बांधे ! ज्योतिर्विद प्रीति पाण्डेय ने बताया रक्षाबंधन की पूजा विधि रोली या कुमकुम,अक्षत (खंडित चावल न हो),दीपक,मिठाई,रक्षा-सूत्र/राखी,पुष्प,फल,भाई के लिए दक्षिणा या उपहार सबसे पहले भगवान श्रीगणेश और इष्टदेव का स्मरण करें।भाई को स्वच्छ आसन पर बैठाएं। भाई के माथे पर रोली/कुमकुम से तिलक करें।अक्षत लगाएं।दीपक से आरती करें।दाहिनी कलाई पर रक्षा-सूत्र बांधें और अतिआवश्यक बात राखी में भाई के कलाई पर तीन गाँठ लगाए ।मिठाई खिलाएं।भाई अपनी बहन को यथाशक्ति वस्त्र, उपहार या दक्षिणा देकर आशीर्वाद एवं रक्षा का वचन दे। रक्षा-सूत्र बांधते समय मंत्र (येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥)अर्थात् जिस रक्षा-सूत्र से महाबली राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा-सूत्र से मैं आपको बांधती हूँ। हे रक्षासूत्र! आप अपने संकल्प से विचलित न हों।रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं है, बल्कि रक्षा, विश्वास, कर्तव्य और पारिवारिक संस्कारों का पर्व माना जाता है। रक्षा-सूत्र बांधने की परंपरा में भाई-बहन के पारस्परिक स्नेह के साथ परिवार और समाज में सुरक्षा एवं मंगल की भावना जुड़ी हुई है।इनमें रक्षा-सूत्र को संकट से रक्षा और मंगलकामना के प्रतीक के रूप में बताया जाता है।भद्रा काल में राखी बांधने से परंपरागत रूप से बचा जाता है।राखी बांधते समय भाई का मुख सामान्यतः पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखना शुभ है।भाई-बहन को इस दिन आपसी विवाद,कटु वचन और क्रोध से बचना चाहिए।
पूर्णिम भगवान सत्यनारण का व्रत 27अगस्त दिन गुरुवार को रखा जाएगा।
विशेष पार्थना :-ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय चाइनीज मांझे से बचाव के लिए आमजन से विशेष सावधानी बरतने की अपील रक्षाबंधन भारतीय संस्कृति और भाई-बहन के पवित्र प्रेम का पर्व हैं । इस अवसर पर पतंग उड़ाने की परंपरा भी अनेक स्थानों पर उत्साह और उमंग के साथ निभाई जाती हैं। लेकिन पतंगबाजी के दौरान प्रतिबंधित चाइनीज मांझा, नायलॉन, सिंथेटिक अथवा कांच/धातु से लेपित मांझे का प्रयोग लोगों के लिए गंभीर खतरा बन सकता हैं।अतः सावधान रहें !
त्योहार की खुशी किसी परिवार के लिए मातम न बने।आइए, इस रक्षाबंधन पर संकल्प लें
पतंग उड़ाएंगे, लेकिन सुरक्षित धागे से
खुशियां बांटेंगे, हादसे नहीं।
सुरक्षित पतंगबाजी, सुरक्षित समाज।
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🚩श्री ज्योतिष कार्यालय🚩
ज्योतिर्विद पंडित सुबोध पाण्डेय
देवलोक कॉलोनी हापुड़
ज्योतिष एवं कर्मकाण्ड विशेषज्ञ
सम्पर्क सूत्र 9634408321
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