
बाढ़ आपदा से बचाव हेतु बृजघाट पर मॉक ड्रिल का आयोजन
हापुड, सूवि(ehapurnews.com): आगामी मानसून एवं संभावित बाढ़ की चुनौती से प्रभावी ढंग से निपटने के उद्देश्य से जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), हापुड़ द्वारा बृजघाट गंगा, गढ़मुक्तेश्वर में मंगलवार को व्यापक बाढ़ आपदा मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। मॉक ड्रिल का उद्देश्य बाढ़ जैसी आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों की तैयारियों को परखना, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करना तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का परीक्षण किया गया।
मॉक ड्रिल के दौरान गंगा नदी में नाव के माध्यम से फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने, लाइफ जैकेट का सही उपयोग, प्राथमिक उपचार, सुरक्षित स्थान पर निकासी एवं राहत शिविर तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। इस दौरान नाव, लाइफ जैकेट, रेस्क्यू बोट, आउटबोर्ड मोटर इंजन, सर्च लाइट, लाइफ बॉय, रस्सियों सहित अन्य आधुनिक बचाव उपकरणों का भी सफल परीक्षण किया गया। अधिकारियों ने मौके पर उपलब्ध संसाधनों का निरीक्षण करते हुए यह भी देखा गया कि आपात स्थिति में इन्हें कितनी तेजी और दक्षता के साथ उपयोग में लाया जा सकता हैं।
अभ्यास के दौरान एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम ने पानी में फंसे लोगो को सुरक्षित बाहर निकालने का व्यावहारिक प्रर्दशन किया। बाढ़ की स्थिति का कृत्रिम परिदृश्य बनाकर यह दर्शाया गया कि यदि कोई ग्रामीण अथवा नागरिक नदी अथवा बाढ़ के पानी में फंस जाए तो बचाव दल किस प्रकार तत्काल मौके पर पंहुचकर उसे सुरक्षित निकाल सकता है। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम ने मोटर बोट तथा रिमोट कंट्रोल लाइफ ब्याय तकनीक का प्रयोग करते हुए डुबते हुए ग्रामीणों को सुरक्षित रेस्क्यू करने का प्रर्दशन किया, जिसे नाविको और ग्रामीणों ने गंभीरता से देखा।
इस क्रम में मेडिकल टीम द्वारा रेस्क्यू किए लोगों को प्राथमिक उपचार फर्स्ट एड देने का अभ्यास किया गया इसके बाद घायलों को स्ट्रेचर के माध्यम से सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने तथा एम्बुलेंस से अस्पताल एवं राहत शिविरों तक ले जाने की पूरी प्रक्रिया का सफल अभ्यास किया गया। चिकित्साको और स्वास्थकर्मियों ने बताया कि बाढ़ जैसी स्थिति में डुबने, चोट लगने, घबराहट, सक्रमण या शारीरिक कमजोरी जैसी परस्थितियों में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की विस्तृत जानकारी भी दी। इसके बाद पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों और एम्बुलेंस में माध्यम से राहत शिविरों तक पहुंचाने की प्रक्रिया का सफल अभ्यास किया गया। इसके साथ ही चिकित्सकों एवं प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा सीपीआर (Cardio Pulmonary Resuscitation) का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया। उन्होंने बताया कि यदि किसी व्यक्ति की सांस या हृदय गति रुक जाती है, तो समय पर और सही तरीके से दिया गया सीपीआर जीवन बचाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मेडिकल टीम ने उपस्थित नागरिकों, आपदा मित्रों, नाविकों एवं नागरिक स्वयंसेवकों को भी सीपीआर देने की सही तकनीक की जानकारी देकर जागरूक किया।
मॉक ड्रिल में जिला प्रशासन, तहसील प्रशासन जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व विभाग, सिंचाई विभाग, अग्निशमन विभाग, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, इंडियन आर्मी, आपदा मित्रों, नागरिक सुरक्षा तथा अन्य संबंधित विभागों की टीमों ने संयुक्त रूप से भाग लिया। सभी विभागों ने निर्धारित समय में समन्वय के साथ राहत एवं बचाव कार्यों का सफल प्रदर्शन कर अपनी आपदा प्रबंधन तैयारियों का प्रभावी प्रदर्शन किया।
जिला प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं में समय पर सूचना, बेहतर समन्वय, प्रशिक्षित बचाव दल एवं आधुनिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग जनहानि को न्यूनतम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस प्रकार की मॉक ड्रिल से विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली का परीक्षण होता है तथा वास्तविक आपदा की स्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों को अधिक तेज, प्रभावी एवं व्यवस्थित बनाया जा सकता है।
मॉक ड्रिल के दौरान स्थानीय नागरिकों एवं नाविकों को भी बाढ़ के समय अपनाई जाने वाली सावधानियों, सुरक्षित स्थानों पर जाने, प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने, अफवाहों से बचने तथा आपात स्थिति में तत्काल प्रशासन को सूचना देने के प्रति जागरूक किया गया। अधिकारियों ने कहा कि जनसहभागिता, जागरूकता और विभागीय समन्वय ही प्रभावी आपदा प्रबंधन की सबसे बड़ी ताकत है।
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