
विकार भावो का आत्मा से छूट जाना उत्तम त्याग धर्म है-आचार्य रोहित जैन शास्त्री
हापुड, सीमन/सुरेश जैन(Ehapurnews.com): पर्युषण दशलक्षण महापर्व के आठवे दिन धर्म के लक्षण उत्तम त्याग धर्म पर चर्चा हुई। श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर कसेरठ बाजार पर प्रक्षाल शान्तिधारा के बाद विधान पाठ की पूजा आचार्य रोहित जैन शास्त्री ने कराई तथा सगीतज्ञ विकास भारद्वाज ने संगीत दिया। जैन विद्धान ने कहा कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से राग,द्वेष, क्रोध, मद मान आदि विकारो का आत्मा से छूट जाना ही उत्तम त्याग धर्म है।धन तथा सांसारिक वस्तुओ से ममत्व को छोड़कर जीव दया, दान, आध्यात्म की ओर चलना त्याग है। संसार का सच्चा सुख भोग मे नही त्याग मे है। भौतिक सुख सुविधाओ की ओर भागने से मनुष्य की तृष्णा बढती जाती है सुख शान्ति नही मिलती।
जैन समाज के अध्यक्ष अनिल जैन, महामंत्री अशोक जैन, संरक्षक सदस्य सुधीर जैन, विकास जैन, तुषार जैन, राजीव जैन, हिमांशु जैन, सुरेश चन्द जैन, बबीता जैन, सुषमा जैन, ममता जैन, वन्दना जैन,सरोज जैन, प्रतिभा जैन, सपना जैन, कविता जैन, मधु जैन, कविता जैन, ऋचा जैन
आदि उपस्थित थे।
बुधवार रात महिला मडंल की रूबी जैन, ऋचा जैन, अम्बिका जैन, रीतिका जैन, सृष्टि जैन, मेघा जैन आदि द्वारा भजन नृत्य प्रस्तुत किया गया तथा धार्मिक गेम ‘ खुल जा सिम सिम ‘ प्रस्तुत किया गया।
समोशरण दिगम्बर जैन मंदिर शकंर गंज पर आचार्य डी के जैन शास्त्री ने विधान पाठ की पूजा कराई। प्रदीप जैन, स्वलिप जैन, शिल्पी जैन, प्रमोद जैन, बिजेंद्र जैन, हेमराज जैन आदि उपस्थित हुए।
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