
हापुड़, सीमन/रियाज़ अहमद (ehapurnews.com):जनपद हापुड़ के पिलखुवा के गाँव शाहपुर फगोता में चल रहे साप्ताहिक रामचरित मानस पाठ का पाँचवाँ दिन बड़ी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ सम्पन्न हुआ। प्रतिदिन की भांति सायं 5 बजे से 10 बजे तक आयोजित इस पाठ में आज अयोध्या कांड का वर्णन किया गया।
इस अवसर पर सीता माता और भगवान श्रीरामचंद्र के मधुर संवाद का पाठ किया गया, जिसमें भगवान श्रीराम माता सीता को वन गमन से रोकने का प्रयास करते हैं,
सीते, मैं पिता के वचन को सत्य करके १४ वर्ष के वनवास से शीघ्र ही लौटूँगा। रास्ते में कुश, काँटे और बहुत से कंकड़ हैं, जमीन पर सोना, पेड़ों की छाल के वस्त्र पहनना और कंद, मूल, फल का भोजन तुम्हारे लिए संभव नहीं है। परन्तु माता सीता अडिग रहकर उनके साथ वन जाने का संकल्प व्यक्त करती हैं।
“नाथ! आपके साथ रहकर पक्षी और पशु ही मेरे कुटुम्बी होंगे, वन ही मेरा नगर होगा, वृक्षों की छाल मेरे लिए निर्मल वस्त्र होंगे और पर्णकुटी ही मेरे लिए स्वर्ग के समान सुखों का आधार होगी। कन्द, मूल और फल ही अमृत के समान आहार होंगे और (वन के) पहाड़ ही अयोध्या के सैकड़ों राजमहलों के समान होंगे।
ग्रामवासियों और आसपास के गाँवों से आए श्रद्धालुओं ने बड़े मनोयोग से इस प्रसंग को सुना और भाव-विभोर हो गए। आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि इस पाठ का उद्देश्य समाज में धार्मिकता, आपसी प्रेम और आदर्श जीवन के मूल्यों को जागृत करना है। पाठ का समापन भजन-कीर्तन और प्रसाद वितरण के साथ हुआ।
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