
वैदिक संस्कृति का प्रचार-प्रसार ही आर्य समाज का उद्देश्य
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com):वेदों के स्वाध्याय और सत्संग की प्राचीन परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आर्य समाज, हापुड़ में श्रावणी पर्व के अवसर पर पाँच दिवसीय विशेष वैदिक सत्संग का शुभारंभ हुआ। यह कार्यक्रम 17 अगस्त (रविवार) तक प्रतिदिन प्रातः 7:00 से 10:00 बजे तथा सायं 5:00 से 7:00 बजे तक आर्य समाज परिसर में आयोजित किया जा रहा है।
आर्य समाज के मंत्री संदीप आर्य ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में वैदिक संस्कृति के प्रचार-प्रसार और सत्संग की भावना को सशक्त करना है।
दूसरे दिन के प्रातःकालीन यज्ञ में यज्ञमान के रूप में श्रीमती शशि सिंघल एवं श्री सुरेश सिंघल, तथा श्रीमती रेखा गोयल एवं श्री मदनलाल गोयल ने भाग लिया। भजनोपदेशक श्री कुलदीप भास्कर (घरौंदा, हरियाणा) ने अपने भावपूर्ण भजनों “दुनिया के मेले में, आना और जाना है…”, “काया एक पिंजरा है, पंछी सहलाने का…” और “सदियों से जीव भटकता, पर चैन कभी न पाया…” से उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति रस में सराबोर कर दिया।
मुख्य आचार्य आचार्य संजीव रूप जी (बदायूं, उत्तर प्रदेश) ने सत्संग के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “सत्संग अर्थात सत्य का संग है — सत्य, यानी प्रकृति, जीवात्मा और परमात्मा को सही रूप में जानना और उस ज्ञान के अनुसार आचरण करना, जिससे मोक्ष की प्राप्ति संभव हो सके।” उन्होंने बताया कि परमात्मा हमारे पिता समान हैं, जो सदा हमारे साथ और हमारे भीतर विद्यमान रहते हैं, और हमारे कर्मों के अनुसार हमें प्रेरणा, उत्साह या लज्जा का अनुभव कराते हैं।
इस अवसर पर प्रधान पवन आर्य, अनुपम आर्य, अजय गोयल, ओम प्रकाश, सुरेश सिंघल, जितेंद्र त्यागी, यश वर्धन, निधि आर्या, मंजुला आर्या, ममता आर्या, सीमा गर्ग सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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