
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हापुड़ की मोदीनगर रोड पर स्थित गांव सरावा के करीब 16 किसानों के खेतों में नाले का गंदा पानी पिछले 20 दिनों से घुसा है। नाला टूटने की वजह से 90 बीघा फसल में गंदा पानी घुस गया है लेकिन अधिकारी हाथ पैर हाथ भर बैठे हैं। किसानों की फसल लगातार बर्बाद हो रही है। वह आर्थिक रूप से कमजोर हो रहे हैं। शिकायत भी की गई है लेकिन अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं जिसकी वजह से किसानों में काफी ज्यादा नाराजगी है। उन्होंने मामले में नाले को दुरुस्त करने और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ भी कार्यवाही की मांग की है।

मेरठ जनपद से पिछले 70 वर्षों से एक पुराना नाला निकल रहा है। यह एक छोटी सी छोईया है लेकिन इसे ग्रामीण काली नदी के नाले के नाम से जानते हैं। वर्षा के हर मौसम में इसकी सफाई कराई जाती है लेकिन देखरेख के अभाव में यह जगह-जगह से टूट रहा है। साथ ही कुछ लोगों ने अवैध निर्माण भी किया हुआ है जिसकी वजह से नाला प्रभावित है। मेरठ से शुरू होकर यह नाला गांव सरावा होते हुए हापुड़ की ओर आता है। फैक्ट्री का गंदा पानी हापुड़ होते हुए काली नदी तक पहुंचता है। बताया जाता है कि बदनौली गांव में कई स्थान पर अवैध रूप से ग्रामीणों द्वारा नाला बंद कर दिया गया है। अब नाले का पानी ओवरफ्लो हो गया है। गांव सरावा में नाला टूटने के कारण आरिफ, ताज मोहम्मद, जितेंद्र त्यागी, कृष्ण सैनी, चंद्र किरण सैनी, गौरव चौधरी, गुल हसन, लाल सिंह, कैलाश सैनी, मूलचंद सैनी, अमित त्यागी, रविंद्र कुमार, मनीष कुमार, बिजेंद्री, रोहित कुमार, राम सिंह के खेतों में नाले का गंदा पानी पिछले 20 दिनों से भरा हुआ है जिसकी वजह से 90 बीघा फसल तबाह हो चुकी है। आखिर इसका जिम्मेदार कौन है?
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