
काम की खबर: अब ग्राहक गूगल नहीं, एआई से पूछ रहे हैं किससे खरीदें; मार्केटिंग कर्नल के को–फाउंडर वैभव पल्हाड़े और प्रत्युष श्रीवास्तव से जानिए बिजनेस पर क्या होगा असर
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): चैटजीपीटी और जेमिनी जैसे एआई टूल अब ग्राहकों को सीधे कंपनियों के नाम सुझा रहे हैं। इसका छोटे और मझोले कारोबार पर क्या असर होगा और कारोबारी इसके लिए कैसे तैयारी करें, यह समझने के लिए हमने इस क्षेत्र में काम कर रहे दोनों को-फाउंडर्स से बात की।
बिजनेस डेस्क। मान लीजिए आप कपड़े, मसाले या मशीन के पार्ट्स बनाते हैं और विदेश में माल भेजना चाहते हैं। पहले दुबई या लंदन का कोई खरीदार गूगल पर सप्लायर खोजता, दस वेबसाइटें खोलता और फिर फोन करता। अब कई खरीदार सीधे चैटजीपीटी से पूछ लेते हैं, ‘भारत में भरोसेमंद कॉटन सप्लायर कौन हैं?’ जवाब में चार–पांच नाम आते हैं। अगर उनमें आपका नाम नहीं है, तो ग्राहक आपकी वेबसाइट तक पहुंचेगा ही नहीं।
यही बदलाव अब कारोबार की दुनिया में नई चिंता बन रहा है। आसान भाषा में समझिए कि यह क्या है, इसका असर किस पर पड़ेगा और कारोबारी क्या कर सकते हैं।
सवाल: एआई विजिबिलिटी आखिर है क्या?
जवाब: जब कोई ग्राहक एआई से किसी प्रोडक्ट या सर्विस के बारे में पूछता है, तो जवाब में आपके बिजनेस का नाम आता है या नहीं, और आता है तो आपके बारे में क्या कहा जाता है, इसी को एआई विजिबिलिटी कहा जा रहा है। गूगल पर आप देख सकते थे कि आपकी वेबसाइट किस नंबर पर है। एआई के जवाब में आप हैं या नहीं, यह ज्यादातर कारोबारियों को पता ही नहीं चलता।
मार्केटिंग कर्नल के को-फाउंडर वैभव पल्हाड़े इसे दुकान की खिड़की से जोड़कर समझाते हैं। उनका कहना है, “पहले आपकी वेबसाइट आपकी दुकान थी। अब एआई का जवाब दुकान के बाहर लगा बोर्ड है। ग्राहक वहीं पढ़कर तय कर लेता है कि अंदर आना है या नहीं।”
सवाल: क्या सच में लोग गूगल कम इस्तेमाल कर रहे हैं?
जवाब: गूगल अब भी बड़ा है, लेकिन लोगों का बर्ताव बदल रहा है। अमेरिका की रिसर्च संस्था प्यू रिसर्च सेंटर ने जुलाई 2025 में 900 लोगों की ब्राउजिंग पर स्टडी जारी की। इसमें पाया गया कि जब गूगल ने ऊपर एआई का सारांश दिखाया, तो सिर्फ 8 फीसदी बार लोगों ने किसी वेबसाइट के लिंक पर क्लिक किया। जहां सारांश नहीं था, वहां यह आंकड़ा 15 फीसदी था। यानी कई लोग जवाब पढ़कर ही काम चला लेते हैं।
इधर ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन अक्टूबर 2025 में बता चुके हैं कि चैटजीपीटी को हर हफ्ते 80 करोड़ से ज्यादा लोग इस्तेमाल करते हैं।
सवाल: इसका असर किस पर सबसे ज्यादा पड़ेगा?
जवाब: उन कारोबारों पर, जिनकी जानकारी इंटरनेट पर अधूरी, पुरानी या अलग-अलग जगह अलग-अलग है। प्रत्युष श्रीवास्तव के मुताबिक एआई उन्हीं कंपनियों पर ज्यादा भरोसा करता है, जिनके बारे में कई भरोसेमंद जगहों पर एक जैसी जानकारी मिलती है।
वे कहते हैं, “अगर आपकी वेबसाइट पर एक पता है, किसी डायरेक्टरी में दूसरा और किसी पुरानी खबर में तीसरा, तो एआई को अंदाजा लगाना पड़ता है कि सही कौन सा है। मशीन अंदाजे में अक्सर आपका नाम ही छोड़ देती है।”
यही वजह है कि पिलखुवा के कपड़ा कारोबारी हों या हापुड़ के व्यापारी, देश के किसी भी छोटे शहर से बाहर माल भेजने वाले उद्यमियों के लिए यह सवाल अब उतना ही अहम है, जितना कभी गूगल रैंकिंग थी।
सवाल: छोटा कारोबारी बिना खर्च के क्या कर सकता है?
जवाब: दोनों एक्सपर्ट चार आसान कदम सुझाते हैं। पहला, अपने बिजनेस का नाम, पता, फोन नंबर और काम का ब्योरा वेबसाइट, गूगल प्रोफाइल और हर डायरेक्टरी में बिल्कुल एक जैसा रखें। दूसरा, वेबसाइट पर साफ लिखें कि आप क्या बनाते हैं, कहां सप्लाई करते हैं और कब से काम कर रहे हैं। तीसरा, लोकल अखबार या ट्रेड मैगजीन में छपी खबरों और ग्राहकों के असली रिव्यू को संभालकर रखें, क्योंकि एआई भरोसेमंद स्रोतों को महत्व देता है। चौथा, महीने में एक बार खुद एआई से अपने कारोबार से जुड़ा सवाल पूछें और देखें कि वह किसका नाम ले रहा है।
प्रत्युष कहते हैं, “इसमें पैसा नहीं लगता, बस आदत डालनी पड़ती है। जो कारोबारी आज से नजर रखेंगे, उन्हें दो साल बाद हैरानी नहीं होगी।”
सवाल: क्या कोई कंपनी एआई में नाम दिलाने की गारंटी दे सकती है?
जवाब: नहीं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक एआई का जवाब मॉडल खुद तय करता है और यह सवाल के शब्दों, समय और प्लेटफॉर्म के साथ बदल सकता है। वैभव कहते हैं, “अगर कोई आपसे पैसे लेकर चैटजीपीटी में पक्की जगह दिलाने का वादा करे, तो सावधान रहिए। ईमानदार काम बस इतना है कि आपकी जानकारी सही, साफ और भरोसेमंद हो।”
कौन हैं वैभव पल्हाड़े और प्रत्युष श्रीवास्तव
वैभव पल्हाड़े महाराष्ट्र से हैं और कंप्यूटर इंजीनियर हैं। उन्होंने करियर की शुरुआत असिस्टेंट राइटर और असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर की, फिर हिंदी फिल्मों, सीरीज और मराठी डेली सोप के लिए स्क्रीनप्ले और डायलॉग लिखे। सामाजिक मुद्दों पर बनी उनकी फिल्मों को अवॉर्ड भी मिले। बाद में उपन्यासों से उन्हें बड़ी पहचान मिली, जिनमें अगस्त 2024 में आया ‘इकोज ऑफ यस्टरडे’ शामिल है। पिछले कई सालों से वे डिजिटल मार्केटिंग और एसईओ के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
जयपुर के प्रत्युष श्रीवास्तव कंपनी के टेक्नोलॉजी को-फाउंडर हैं। दोनों पहले अपने-अपने स्टार्टअप चला चुके हैं, जो सफल नहीं हो पाए। इन अनुभवों के बाद करीब दो-तीन साल की रिसर्च के बाद दोनों ने 2026 में मार्केटिंग कर्नल शुरू की। यह भारतीय कंपनी एआई विजिबिलिटी से जुड़ी सर्विस देती है और बिक्री व मार्केटिंग के लिए सॉफ्टवेयर बना रही है। कंपनी का पहला प्रोडक्ट ‘आउटरीच कर्नल’ होगा, जो बी2बी कारोबारों को सही ग्राहक खोजने और उनसे संपर्क करने में मदद करने वाला टूल है। इसका बीटा वर्जन नवंबर में आने की उम्मीद है।

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