
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): शक्ति उपासना महापर्व शारदीय नवरात्रि व्रत पूजन प्रारम्भ सप्तमी तिथि वृद्धि के साथ 11अक्टूबर दिन रविवार से होगा जो 10 दिन तक चलेगा। भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित के0 सी0 पाण्डेय काशी वाले ने बताया कि प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर रात्रि 9.19 बजे से प्रारम्भ होकर 11 अक्टूबर को रात्रि 9.32 बजे तक है चित्रा नक्षत्र और वैधृति योगयुक्त प्रतिपदा तिथि में कलश स्थापना निषेध होने से कलश स्थापना मुहूर्त का विशेष ध्यान रखें घट स्थापना श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त :-
सुबह 10.07 से दोपहर 12.28 बजे तक लाभ,अमृत की चौघड़िया, स्थिर लग्न व अभिजीत मुहूर्त में किया जाएगा नवरात्रि में माँ दुर्गा का आगमन हाथी पर हो रहा है जो शुभ संकेत है नवरात्रि में द्विपुष्कर योग, रवि योग, सर्वार्थसिद्धि योग, प्रीती, आयुष्मान,सौभाग्य योग, शोभन योग, सुकर्मा,धृति योग सहित अन्य शुभयोग बन रहा है जो कामनाओं को पूर्ण करने वाला होगा कलश स्थापना के लिए मिट्टी का घड़ा उत्तम रहता है सप्तमी वृद्धि तिथि होने 17 और 18 अक्टूबर दो दिन माँ कालरात्रि का पूजन होगा जिससे साहस, शक्ति,निर्भयता प्राप्त होगा तथा शत्रुओं से छुटकारा होगा अष्टमी कन्यापूजन 19 अक्टूबर तथा नवमी हवन व कन्यापूजन 20 अक्टूबर को दोपहर 12.50 तक किया जाएगा 20 अक्टूबर को नवमी विद्धा दशमी होने से नवरात्रि व्रत पारण 21 अक्टूबर बुधवार सूर्योदय के बाद किया जाएगा जबकि दशहरा पूजन 20 अक्टूबर मंगलवार को दोपहर 12.50 के बाद श्रवण नक्षत्र, बल व विजय मुहूर्त में किया जाएगा कलश के साथ पंचपल्लव या आम के पत्ते (पल्लव) , जल वाला नारियल, कलावा, रोली, सुपारी, गंगाजल, सिक्का, दूर्वा, गेहूं, अक्षत(चावल), हल्दी, पान के पत्ते, कपूर, लौंग, जावित्री, इलायची, धुप, देशी घी, गाय का दूध, दही, शहद, जोतबत्ती, हवन सामग्री, श्रृंगार का सामान, फल, मिष्ठान आदि सामान की आवश्यकता होती है पूजन में लाल गुड़हल पुष्प, नारियल व दूध से बने मिष्ठान चढ़ाएं कलश स्थापना करने के साथ दुर्गासप्तसती का नित्य पाठ पुरे 9 दिन तक व्रत के साथ अवश्य करना चाहिए व्रत के नवें दिन हवन करें हवन मंत्र “ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र एवं नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:। नम: प्रकृत्यै भदायै नियता: प्रणता: स्मताम्।। से आहुति दे। मूर्ति विसर्जन 21अक्टूबर बुधवार दशमी तिथि में सुबह किया जाएगा.
नवरात्रि व्रत पूजन इस प्रकार होंगे.
11 अक्टूबर रविवार प्रतिपदा व्रत माँ शैलपुत्री पूजन
12 अक्टूबर सोमवार द्वितीया व्रत माँ ब्रह्मचारिणी पूजन
13 अक्टूबर मंगलवार तृतीया व्रत माँ चन्द्रघण्टा पूजन
14 अक्टूबर बुधवार चतुर्थी व्रत माँ कुष्मांडा पूजन
15 अक्टूबर बृहस्पतिवार पंचमी व्रत माँ स्कंदमाता पूजन
16 अक्टूबर शुक्रवार षष्ठी व्रत माँ कात्यायनी पूजन
17 अक्टूबर शनिवार सप्तमी व्रत माँ कालरात्रि पूजन
18 अक्टूबर रविवार सप्तमी व्रत माँ कालरात्रि पूजन/अष्टमी महानिशा(रात्रि) पूजन
19 अक्टूबर सोमवार अष्टमी व्रत माँ महागौरी पूजन/महानवमी निशाबली पूजन
20 अक्टूबर मंगलवार नवमी व्रत माँ सिद्धिदात्री पूजन, हवन एवं नौ कन्यापूजन/अलंकरण
20 अक्टूबर मंगलवार दशहरा पूजन दोपहर 12.50 के बाद
21 अक्टूबर बुधवार नवरात्रि व्रत पारण





















