हापुड़, सीमन (ehapurnews.com) : हापुड़ के एक ट्रस्ट की 836 वर्ग गज भूमि की बिक्री का मामला शासन स्तर पर गरमाता जा रहा है और किसी भी वक्त सरकार की ओर से बड़ा धमाका हो सकता है। यह मामला दिल्ली-गढ़ रोड पर स्थित एक मंदिर की ट्रस्ट से जुडा है।
खास बात यह है कि ट्रस्ट की भूमि जिस व्यक्ति ने अपने वारिसान के नाम वसीयत लिखी है, इस सम्बंध में उसका स्वामित्व कहां से आया, कोई साक्ष्य नहीं है। वारिसान द्वारा बेची गई ट्रस्ट की भूमि का स्वामित्व भी विक्रेतागणों के पास नहीं है। विक्रेतागणों ने ट्रस्ट की भूमि को करीब दस टुकड़ों में दस करोड़ में चुपचाप बेच दिया।
शासन द्वारा कराई गई अभी तक की जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि विक्रेतागणों द्वारा ट्रस्ट की बेची गई भूमि का स्वामित्व न होने के कारण निष्पादित बैनामे प्रथम दृष्टया विधि विरुद्ध प्रतीत हो रहे है। ट्रस्ट की भूमि को बिना स्वामित्व के बेचने के कारण शासन किसी भी वक्त बड़ी कार्रवाई कर सकता है जिसकी सम्भावना को लेकर हड़कम्प मचा है।
मंदिर ट्रस्ट की भूमि का स्वामित्व हक न होने के बावजूद भूमि को बेचना अपराध है। रजिस्ट्री दफ्तर ने खसरा आदि को देखे बिना रिश्वत खाकर बैनामे कर दिए। प्रदेश सरकार रजिस्ट्री दफ्तर की भूमिका की भी जांच कर रही है। कालेधन कुबैरों ने यह सम्पत्ति खरीदी है।
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