
हापुड़ में सूदखोरों का दबदबा
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): उत्तर भारत की प्रमुख गुड़, खाद्यान्न व तिलहन के लिए मशहूर मंडी हापुड़ में सूदखोरों का दबदबा बढ़ता ही जा रहा है जो इस बात का प्रमाण है कि धन कुबेर काली कमाई का निवेश सूदखोरी में कर रहे हैं। सूदखोरों की वसूली से तंग आकर कई व्यापारी अपनी जान भी गवा चुके हैं। सूदखोरों के विरुद्ध कोई ठोस सख्त कार्रवाई न होने से इनके हौसले बुलंद हैं।
हापुड़ में सूदखोरी का धंधा कई प्रकार से पनप रहा है जिनमें से एक है डेली ब्याज वसूली, यानी कि सुबह को नगद रुपए ले जाओ शाम तक एक निश्चित अवधि 10% अधिक लोटा जाओ। यह धंधा सर्राफा बाजार में अधिक चलता है। बहुत से सूदखोर सट्टेबाजों, जुआरियों तथा कमजोर वर्ग के लोगों को 10% ब्याज पर रुपए देते हैं और ब्याज वसूली के लिए हर वक्त जरूरतमंद के द्वार पर दस्तक देते रहते हैं।
हापुड़ में सूदखोरी का दूसरा तरीका कुछ ज्यादा विश्वसनीय माना जाता है जिसमें सूदखोर गोल्ड, प्रॉपर्टी के पेपर्स आदि गिरवी रखकर एक प्रतिशत ब्याज पर रकम दी जाती है। कुछ सूदखोर तो ऐसे हैं कि गोल्ड की मार्केट वैल्यू से आधे दाम ब्याज पर देते हैं और हाथों-हाथ गोल्ड बेचकर नगदी ले लेते हैं। विवाद होने पर 25-30% पर निपटारा कर लेते हैं। प्रॉपर्टी गिरवी रखने के पीछे उसे हजम करना उद्देश्य है।
हापुड़ में तीसरा तरीका बहुत ही दिलचस्प है जिसमें जरूरतमंद अपनी चद्दर हर वक्त बिछाए बैठा रहता है कि उसे दो प्रतिशत ब्याज के दर पर कोई भी कितने ही रुपए दे जाओं, करोड़ों रुपए ले लेते हैं।
इस वक्त सोने-चांदी में भयंकर तेजी से लाभ लेने वाले प्रॉपर्टी के दलाल क्रिकेट सटोरियों ने करोड़ों-करोड़ों रुपए ब्याज पर दे रखे हैं और लोगों को जमकर यह सूदखोर लूट रहे हैं।
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