ज्येष्ठ अमावस्या छह जून को
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): पतिव्रता स्त्रियों के पति की अकालमृत्यु से रक्षाकर अखंड सौभाग्य प्रदान करने वाला वट सावित्री व्रत पूजन ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अमावस्या 6 जून वृहस्पतिवार को किया जायेगा इस दिन सुहागिन स्त्रियां वटवृक्ष की विधिवत पूजा करने के साथ सतयुग में हुए पुराणों में वर्णित सत्यवान व सावित्री की कथा सुनकर अपने पति की लंबी आयु की कामना करती है। भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा की व्रत पर्व विधिज्ञा अनिशा सोनी पाण्डेय ने बताया कि धर्मग्रंथों के अनुसार सावित्री के पतिव्रत व भक्ति से प्रसन्न होकर यमराज ने मृत हुए सत्यवान को जीवित कर दिया था तथा अखंड सौभाग्य का वरदान दिया था सावित्री ने वरदान के रुप में यमराज से माँगा था कि जो भी स्त्री ज्येष्ठ अमावस्या को वटवृक्ष की पूजा करेंगी उसके पति की कभी भी अकाल मृत्यु नहीं होगी ये घटना वटवृक्ष के नीचे हुई थी उसी समय से ये पूजन शुरू हुआ महिलाओं को पूजन के बाद कच्चे सूत या कलावा से वट की 7 परिक्रमा कर बांधना चाहिए पूजन में रोली, कलावा, पान, सुपारी, फल, कच्चा आम डंथल सहित, गेहूँ, मिष्ठान,पकवान, पंखा, गंगाजल आदि सामान की आवश्यकता होती है धार्मिक मान्यतानुसार इस दिन वटवृक्ष का पूजन करने के साथ जल,पंखा आदि का दान भी करना चाहिए अमावस्या तिथि 5 जून की रात्रि 7 बजकर 55 मिनट से 6 जून की शाम 6 बजकर 7 मिनट तक रहेगा वटवृक्ष पूजन का मुहूर्त सुबह 10 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक स्थिर लग्न, लाभ की चौघड़िया व अभिजीत मुहूर्त में है इसी समय में पूजन करना अत्यंत शुभ रहेगा, सभी श्रद्धालु माताएँ, बहनें इस बात का ध्यान अवश्य रखें कि वट की टहनी को तोड़कर उसकी घर पर पूजा ना करें इससे पूजन व्यर्थ हो जाएगा उल्टा पाप ही लगेगा क्योंकि पुराणों में अमावस्या आदि तिथियों में पूजित वृक्षों को तोड़ना, काटना अपराध कहा गया है अतः पूजन वट वृक्ष के पास जाकर ही करने का विधान है.
ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को शनि जयंती भी मनाया जाता है पुराणों के अनुसार इसी दिन ग्रहों में न्याय कर्ता शनि देव का जन्म हुआ था अतः शनिदेव का पूजन करने से शनि ग्रह से प्रभावित लोगों को अत्यधिक लाभ मिलता है अमावस्या पुरे दिन है अतः कर्क, वृश्चिक, मकर, कुम्भ, मीन राशि वालों के साथ जिसकी भी कुंडली में शनि की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो शनि की पूजा करना चाहिए, शनि मंत्र जप, शनि चालीसा का पाठ, दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ भी करना चाहिए इस दिन अपरान्ह काल समय में गंगा स्नान व पितृदोष उपाय करना विशेष फलदाई होता है गरीबों को दान अवश्य करना चाहिएदान में छाता, जूते, तेल भोजन आदि दे सकते है

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