
जानिए शिवरात्रि पर पूजन का शुभ मुहूर्त
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): भगवान भोलेनाथ के प्रमुख पर्व श्रावण शिवरात्रि पर श्रद्धालुओं द्वारा कावड़ जलाभिषेक 11 अगस्त मंगलवार सुबह 5 बजकर 50 मिनट से पुनर्वसु नक्षत्र, सिद्धियोग के साथ प्रारम्भ होकर पूरे दिन चलेगा तथा शिवरात्रि 4 प्रहर की शिवपूजा सायं 6:58 बजे से प्रदोषकाल, पुष्य नक्षत्र, व्यतीपात योग में प्रारम्भ होकर पूरी रात्रि पर्यंत होगा भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित के सी पाण्डेय काशीवाले ने बताया कि कठिन परिश्रम कर कावड़ ला रहे भक्तों का मनोरथ सिद्ध हो और पूर्ण शुभ फल प्राप्त हो इसके लिए महासभा द्वारा एक पर्व एक मुहूर्त सही मुहूर्त अभियान के अंतर्गत प्रसिद्ध भूतेश्वर शिव मंदिर दत्तियाना, नक्काकुआँ शिव मंदिर गढ़, सबली महादेव मंदिर हापुड़ , कल्याणेश्वर मंदिर गढ़, श्री श्यामेश्वर महादेव मंदिर छपकौली , श्री नीलकंठ महादेव मंदिर रेलवे बैरक ,रुद्रेश्वर शिव मंदिर पटना गाँव, मंशादेवी मंदिर सहित हापुड़ के सभी मंदिरों में शुभ मुहूर्त सुबह 5.50 बजे से कावड़ जलाभिषेक प्रारम्भ होगा पंडित के0 सी0 पाण्डेय ने बताया कि चतुर्दशी तिथि 11 अगस्त को सुबह 4.54 बजे से प्रारम्भ होकर देर रात्रि 1.53 तक रहेगा सुबह 4.54 बजे से 5.50 बजे तक 52 मिनट का चतुर्दशी तिथि वेध होने से दोषयुक्त व अपूर्ण है अतः उदय-तिथिरेव शुभा ग्राह्या शास्त्रमत आधार पर सूर्योदय 5.50 बजे से शुद्ध मुहूर्त में जलाभिषेक प्रारम्भ होगा साथ ही महासभा द्वारा कावड़ यात्रा को नशामुक्त रखने का अभियान भी पूरे जोर शोर से चलाया जा रहा है महासभा विद्वानों द्वारा शिवभक्तों को धर्मशास्त्र के अनुरूप जलाभिषेक मुहूर्त व पूजन विधि का मार्गदर्शन किया जा रहा है महासभा ज्योतिष, कर्मकांड विद्वानों एवं मंदिर के पुजारियों का बड़ा समूह है जिसमें व्यापक विचार विमर्श के बाद ही पर्व पर सही शास्त्रसम्मत मुहूर्त निर्णय किया जाता है पंडित के0 सी0 पाण्डेय ने बताया कि इस बार 11 अगस्त मंगलवार को भगवान शिव के 4 प्रहर की रात्रि पूजन के लिए 10 घंटे 52 मिनट का समय प्राप्त हो रहा है प्रत्येक प्रहर की पूजा के लिए 2 घंटे 43 मिनट का समय निर्धारित रहेगा प्रथम प्रहर पूजा सायं 6.58 बजे से रात्रि 9.41 तक, द्वितीय प्रहर पूजा समय रात्रि 9.41 बजे से रात्रि 12.24 तक, तृतीय प्रहर पूजा समय रात्रि 12.24 बजे से तड़के 3.07 बजे तक तथा चतुर्थ प्रहर पूजा समय तड़के 3.07 बजे से प्रारम्भ होकर सूर्योदय पूर्व 5.50 बजे तक होगा जिसमें रुद्राभिषेक, जलाभिषेक आदि पूजन होगा स्कंदपुराण, शिव महापुराण, लिंग पुराण आदि ग्रंथों के मार्गदर्शन अनुसार भगवान शिव पूजन करते समय त्रिपुण्ड (चंदन) लगाकर, रूद्राक्ष धारण करना चाहिए तथा ॐ नमः शिवाय या ॐ नमो नीलकण्ठाय का जप मन में निरंतर करना चाहिए जलाभिषेक सर्वप्रथम क्रमशः गणेश जी, कार्तिकेय जी, नन्दी जी, पार्वती जी और अन्त में शिवलिंग पर करना चाहिए शिव जलाभिषेक व पूजन हमेशा उत्तर मुख होकर बैठकर या झुककर करना चाहिए तथा दीपक जलाकर प्रार्थना करना चाहिए पूजन पश्चात् दान अवश्य करना चाहिए शिव की पूजा में गंगाजल, विल्वपत्र, आँक (मदार) के पुष्प, फल व पत्ते, शमी पुष्प व पत्ते, धतूरा, सफ़ेद व पीले पुष्प, सफ़ेद मिष्ठान, गाय का दूध, गन्ने का रस, अक्षत (बिना टूटे चावल), गेहूँ, तिल, दही, शहद, देशी घी, भूरा, तुलसी की मंजरी, भस्म, दूर्वा आदि अवश्य चढ़ाना चाहिए।
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