
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): नौदेवीपूजन महापर्व शारदीय नवरात्रि व्रत का प्रारम्भ सप्तमी तिथि वृद्धि व कई विचित्र योग-संयोग के साथ 11अक्टूबर दिन रविवार से प्रारम्भ होगा नवमी विद्धा दशमी होने से व्रत पारण 21 अक्टूबर बुधवार सूर्योदय के बाद किया जाएगा जबकि दशहरा पूजन 20 अक्टूबर मंगलवार को दोपहर से श्रवण नक्षत्र में किया जाएगा भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा विद्वानों ने सर्व हितकारी देवी मंदिर, गाँधी विहार आवास विकास हापुड़ में बैठक कर इसबार के घट स्थापना मुहूर्त, व्रत, पूजन विधि, मंत्र, हवन तथा देवी पूजन दिनों का धर्मशास्त्रनुसार निर्धारण किया महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित के0 सी0 पाण्डेय काशी वाले ने निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि धर्मग्रंन्थो में स्पष्ट है कि वैधृतौ पुत्रनाशः स्याच्चित्रायां धननाशनम्। तस्मान्न स्थापयेत्कुम्भं चित्रायां वैधृतौ अतः चित्रा नक्षत्र और वैधृतियोग निषेध होने से कलश स्थापना मुहूर्त का विशेष ध्यान रखें प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर रात्रि 9.19 बजे से प्रारम्भ होकर 11 अक्टूबर को रात्रि 9.32 बजे तक सूर्योदय पूर्व से सूर्यास्त बाद तक चित्रा नक्षत्र और वैधृति योगयुक्त रहेगा इस स्थिति में प्रतिपद्याश्विने मासि भवेद्वैधृतिचित्रयोः।आद्यपादौ परित्यज्य प्रारम्भेन्नवरात्रकम् एवं सम्पूर्णा प्रतिपद्येव चित्रायुक्ता यदा भवेत्। वैधृत्या वापि युक्ता स्यात्तदा मध्यन्दिने रवौ, अभिजित्तु मुहूर्तं यत्तत्र स्थापनमिष्यते के आधार पर
घट स्थापना श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त :-
सुबह 10.07 से दोपहर 12.28 बजे तक लाभ,अमृत की चौघड़िया, स्थिर लग्न व अभिजीत मुहूर्त में किया जाएगा इस नवरात्रि में माँ दुर्गा का आगमन हाथी पर होने से अधिक वर्षा तथा प्रस्थान घोड़े पर होने से उथल पुथल, परिवर्तन का संकेत है हालांकि नवरात्रि द्विपुष्कर योग, रवि योग, सर्वार्थसिद्धि योग, प्रीती, आयुष्मान,सौभाग्य योग, शोभन योग, सुकर्मा,धृति योग सहित अनेक शुभ योग के साथ शुभफलदायक एवं सभी कामनाओं को पूर्ण करने वाला होगा महासभा परामर्श मण्डल विद्वान पंडित आदित्य भारद्वाज ने कहा कि 20 अक्टूबर को नवमी वेध दशमी तिथि होने से नवरात्रि व्रत पारण 21 अक्टूबर को सूर्योदय बाद ही किया जाएगा उन्होंने कहा कलश स्थापना के लिए मिट्टी का घड़ा उत्तम रहता है माँ को प्रथम दिन पूजन से लेकर नौ दिनोंतक क्रमशः तेल, कंघी, शीशा, सिंदूर, महावर, मधु, काजल, वस्त्र, आभूषण आदि अवश्य चढ़ाना चाहिए माँ को लाल गुड़हल का पुष्प व लाल चुनरी भी अर्पित करे तथा दूध से बनी मिठाई भी चढ़ाएं,मंत्री आचार्य देवी प्रसाद तिवारी ने बताया कि घटस्थापना प्रथम दिन माँ शैलपुत्री पूजन के बाद क्रमशः ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंद माता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री देवी का पूजन होगा सप्तमी वृद्धि तिथि होने 17 और 18 अक्टूबर दो दिन माँ कालरात्रि का पूजन होगा जिससे साहस, शक्ति,निर्भयता प्राप्त होगा तथा शत्रुओं से छुटकारा होगा अष्टमी कन्यापूजन 19 अक्टूबर तथा नवमी हवन व कन्यापूजन 20 अक्टूबर को किया जाएगा, कोषाध्यक्ष पंडित मित्र प्रसाद काफ्ले ने कहा कि घटस्थापना व प्रतिदिन पूजन के लिए कलश के साथ पंचपल्लव या आम के पत्ते (पल्लव) , जल वाला नारियल, कलावा, रोली, सुपारी, गंगाजल, सिक्का, दूर्वा, गेहूं, अक्षत(चावल), हल्दी, पान के पत्ते, कपूर, लौंग, जावित्री, इलायची, धुप, देशी घी, गाय का दूध, दही, शहद, जोतबत्ती, हवन सामग्री, श्रृंगार का सामान, फल, मिष्ठान आदि सामान की आवश्यकता होती है कलश स्थापना करने वाले को दुर्गासप्तसती का नित्य पाठ स्वयं या योग्य ब्राह्मण से करवाना चाहिए पुरे 9 दिन तक व्रत अवश्य करना चाहिए प्रतिदिन एक कन्या को खिलाते हुए वृद्धि करते हुए 9वे दिन नौ कन्याओं को खिलाना चाहिए अगर ये संभव ना हो तो अष्टमी अथवा नवमी को 9 कुमारी कन्यापूजन कर भोजन कराये धर्मग्रंथो के अनुसार कन्या की उम्र 2 वर्ष से कम या दस वर्ष से अधिक नही होना चाहिए कन्याओं के क्रम से नाम कुमारिका, त्रिमूर्ति, कल्याणी, रोहिणी, काली, चंडीका, शाम्भवी, दुर्गा तथा सुभद्रा के पूजन फल प्राप्त जानना चाहिए महासभा उपाध्यक्ष पंडित गौरव कौशिक ने कहा किनवरात्रि व्रत करने वाले श्रद्धालु व्रत के नवें दिन हवन करें हवन मंत्र “ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र एवं नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नम:। नम: प्रकृत्यै भदायै नियता: प्रणता: स्मताम्।। से आहुति दे तथा दशमी तिथि लगने पर 20 अक्टूबर मंगलवार को विसर्जन होगा, परम्परा में मंगलवार को मूर्ति विसर्जन निषेध से बुधवार सुबह कर सकते है जो लोग 9 दिन का व्रत नही कर सकते है वो धर्मग्रन्थ अनुसार श्रद्धा भाव से प्रथम दिन व अष्टमी के दिन अथवा सप्तमी, अष्टमी व नवमी तीन दिन का व्रत रख कर भी माँ की कृपा प्राप्त कर सकते है परामर्श मंडल विद्वान पंडित आशुतोष शुक्ला ने कहा कि नवरात्रि में अष्टमी का व्रत अवश्य रखना चाहिए दशहरा पूजन 20 अक्टूबर को दोपहर 12.50 के बाद होगा तथा रावण दहन सायंकाल 6 बजे के बाद किया जाएगा बैठक में महामंत्री अनिशा सोनी पाण्डेय, समन्वयक पंडित अजय पाण्डेय, प्रवक्ता पंडित प्रशांत वशिष्ठ, प्रचार मंत्री पंडित शैलेन्द्र मिश्रा शास्त्री, संरक्षक पंडित हरीश शर्मा, मिडिया प्रभारी, एस्ट्रो धर्मेंद्र बंसल, पंडित शैलेन्द्र अवस्थी, पंडित प्रेम नारायण भारद्वाज, पंडित दुर्गाशरण वाजपेयी, डॉ0 करुण शर्मा सहित अन्य कई महासभा विद्वानों ने विचार रखें।




















