
हापुड, सूवि (ehapurnews.com): हापुड़ जनपद में 18 मई 2026 को दर्ज किया गया 44 डिग्री सेल्सियस का तापमान केवल एक आँकड़ा नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन और स्वास्थ्य के लिए गंभीर चेतावनी है। इतनी भीषण गर्मी और लू की संभावना आने वाले दिनों में भी बनी रहेगी। इस परिस्थिति में हर नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह स्वयं, अपने परिवार और अपने आस-पड़ोस के लोगों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानियाँ बरते। तेज़ धूप और लू से बचाव के लिए सबसे पहला कदम है कि हम दिन के समय, विशेषकर दोपहर में, अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें। यदि बाहर जाना ही पड़े तो सिर को ढककर ही जाएँ। इसके लिए, गमछा, टोपी या छाता का प्रयोग करें। यह केवल एक साधारण उपाय नहीं है, बल्कि जीवन रक्षक ढाल है। सिर पर कपड़ा या टोपी रखने से धूप का सीधा असर कम होता है और शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है।
ऊष्ण लहर से भीषण उष्ण लहर (लू) चलने की चेतावनी जारी की गई है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) सभी नागरिकों एवं श्रमिकों से अपील करता है कि निम्नलिखित सावधानियाँ अवश्य बरतें।
श्रमिकों एवं नागरिकों हेतु सलाह
कार्य के बीच-बीच में छाया में विश्राम दें।
कार्य करने का समय बदलें दोपहर 12 से 3 बजे के बीच बाहरी कार्य से बचें।कार्यस्थल पर ठंडे पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करें।कार्यस्थल पर प्राथमिक उपचार की व्यवस्था रखें।दोपहर में शरीर पर धूप का असर सबसे अधिक होता है इस समय काम छाया में करें।
श्रमिकों के बच्चों के लिए छायादार स्थान की व्यवस्था करें।
श्रमिकों को तापघात से बचाव के तरीके समझाएं।
बार-बार पानी एवं वै का घोल पिलाते रहें।
पशु मालिक हेतु
पशुओं को दिन में कम से कम 3.4 बार ताजा व ठंडा पानी पिलाएं।
पशुओं को दोपहर में छायादार स्थान पर रखें खुले में न बाँधें।
हरे चारे एवं पानी से भरपूर आहार दें।
दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच पशुओं से खेत में काम न कराएं।पशु आश्रय स्थलों में पर्याप्त वेंटिलेशन व पानी की व्यवस्था रखें।पक्षियों के लिए छत पर या पेड़ के नीचे पानी के बर्तन रखें।
आपातकालीन संपर्क
पुलिसः 100 / 112,
एम्बुलेंसः 108,
राहत आपदा कंट्रोल रूमः 1070
जिला आपदा कंट्रोल रूमः 1077
जिलाधिकारी कविता मीना ने कहा है कि गर्मी केवल इंसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों के लिए भी चुनौती है। अपने घरों और आस-पास के क्षेत्रों में पानी की व्यवस्था करें। खुले स्थानों पर पानी के बर्तन रखें ताकि गाय, कुत्ते जैसे पशु और सभी प्रकार के पक्षी भी राहत पा सकें। अपनी छत पर भी पानी के बर्तन रखें ताकि कबूतर, गौरैया, तोता और अन्य पक्षी आसानी से पानी पी सकें। यह न केवल मानवीय दृष्टिकोण से आवश्यक है बल्कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए भी ज़रूरी है। जिलाधिकारी ने सभी शैक्षणिक संस्थानों, औद्योगिक इकाइयों और कार्यालयों को निर्देशित किया है कि वे अपने कर्मचारियों और विद्यार्थियों को गर्मी से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करें। नगर निकायों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे सार्वजनिक स्थलों पर पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था करें और छायादार स्थानों पर विश्राम स्थल उपलब्ध कराएँ।
नागरिकों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने आस-पास के लोगों को भी जागरूक करें। सामूहिक सहयोग और जागरूकता ही हमें इस कठिन मौसम में सुरक्षित रख सकती है। जब हर व्यक्ति अपने स्तर पर सावधानी बरतेगा, तभी समाजसुरक्षित रह पाएगा।
इस अपील को और प्रभावी बनाने के लिए कुछ नारेनुमा पंक्तियाँ भी याद रखें-
गर्मी से बचना है ज़रूरी, सिर पर टोपी और गमछा है मजबूरी !
पानी पिएँ, छाँव में रहें लू से बचें, सुरक्षित रहें!बच्चे, बुजुर्ग और बीमार सबका रखें खास खयाल !
पशु-पक्षियों को भी दें राहत यही है सच्ची इंसानियत !























