
भूसा दानदाताओ को प्रमाण पत्र वितरित
हापुड,सूवि(ehapurnews.com):उत्तर-प्रदेश सरकार द्वारा निराश्रित गोवंशों के भरण-पोषण हेतु चलाये जा रहे भूसा संग्रहण अभियान में जनपद के 20 बड़े भूसा दान दाताओं को गंगा एक्सप्रेस वे उद्घाटन के आयोजन स्थल पर प्रभारी मंत्री कपिलदेव अग्रवाल ने भूसा दान पुण्य की एफ०डी० के प्रमाण-पत्र वितरित किये गये। जिलाधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि जनपद हापुड़ में कुल 30 गो आश्रय स्थल स्थापित हैं जिनमें (02 नगरीय, 02 कांजी हाउस, 01 कान्हा गौशाला, 04 वृहद गो संरक्षण केन्द्र एवं 21 अस्थायी गो आश्रय स्थल हैं) कुल 3596 निराश्रित गोवंशों को संरक्षित किया गया है। मुख्यमंत्री सहभागिता योजनान्तर्गत गो आश्रय स्थलों से अद्यतन कुल 1262 गोवंशों को इच्छुक पशुपालकों को सुपुर्द किया गया है जिन्हें प्रति गोवंश प्रतिदिन रू0-50 की दर से प्रति माह रू0-1500/- डी०बी०टी० के माध्यम से धनराशि प्रदान की जा रही है। निराश्रित गोवंशों की समस्या. के निराकरण हेतु जनपद में 05 नवीन वृहद गो संरक्षण केन्द्रों (विकास खण्ड धौलाना में वृहद गो संरक्षण केन्द्र, पारपा, हिण्डालपुर, शेखपुर खिचरा द्वितीय एवं तृतीय, विकास खण्ड सिम्भावली में वृहद गो संरक्षण केन्द्र, हिम्मतपुर) का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इससे जनपद की गो संरक्षण क्षमता 2000 और बढ़ जायेगी।
गो आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंशों को गर्मी एवं लू से बचाव हेतु उपयुक्त उपाय अपनाये जा रहे हैं। सभी गो आश्रय स्थलों में पीने का स्वच्छ एवं ताजे पानी की व्यवस्था की गयी है। गो आश्रय स्थलों में संरक्षित गोवंशों को भूसा, हरा चारा एवं पशु आहार नियमित रूप से उपलब्ध कराया जाता है तथा पशु चिकित्सक द्वारा प्रतिदिन गोवंशों का स्वास्थ-परीक्षण, समय-समय पर टीकाकरण एवं कृमिनाशक औषधियां उपलब्ध करायी जाती हैं। इन गो आश्रय स्थलों में घायल गोवंशों की सूचना प्राप्त होने पर उन्हें संरक्षित कर चिकित्सा की जाती है।
जिलाधिकारी ने सभी से अपील की कि वर्तमान में जनपद में भूसा दान महा अभियान कार्यक्रम चलाया जा रहा है जिसमें कोई भी व्यक्ति अपनी स्वेच्छा से गोशाला में भूसा, हरा चारा अथवा पशु आहार दान कर सकता है। गोवंश संरक्षण एक सामूहिक जिम्मेदारी है अतः आप सभी से अपील की जाती है कि शुद्ध दूध एवं दुग्ध उत्पाद प्राप्त करने के लिए और अपने परिवार के अच्छे स्वास्थ्य के लिए गो-पालन को बढावा दें तथा गायों का दूध सूखने पर उन्हें निराश्रित के रूप में न छोड़ें। उचित परामर्श एवं पोषण से वे शीघ्र ही दोबारा गाभिन हो सकती हैं तथा एक गाय से कई बार उन्नत बछिया सेक्स सॉर्टेड सीमेन का प्रयोग कर प्राप्त की जा सकती हैं। गायें अनमोल एवं पूजनीय हैं। इनकी रक्षा एवं संरक्षण करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है।
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