
नशामुक्त कांवड़ यात्रा अभियान
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा द्वारा भगवान भोलेनाथ के प्रमुख पर्व श्रावण शिवरात्रि जलाभिषेक के अवसर पर नशामुक्त कावड़ यात्रा अभियान व कावड़ जलाभिषेक मुहूर्त व नियम सम्बंधित बैनर लगभग सभी प्रमुख शिव मंदिरों तथा अनेक सार्वजनिक स्थानों पर लगाए गए है जिसके माध्यम से शिवभक्त भी पूजन जानकारी प्राप्त कर रहे है महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित के सी पाण्डेय काशीवाले ने बताया कि कठिन परिश्रम कर कावड़ ला रहे भक्तों का मनोरथ सिद्ध हो और पूर्ण शुभ फल प्राप्त हो इसके लिए महासभा द्वारा धर्मग्रंथों के अनुरूप जलाभिषेक व पूजन विधि का मार्गदर्शन किया जा रहा है उन्होंने कहा कि प्रसिद्ध भूतेश्वर शिव मंदिर दतियाना, नक्काकुआँ शिव मंदिर गढ़, सबली महादेव , श्री श्यामेश्वर महादेव छपकौली मंदिर, श्री नीलकंठ महादेव मंदिर, मंशादेवी मंदिर सहित हापुड़ के अनेक स्थानों पर जलाभिषेक सम्बंधित मार्गदर्शन फ्लैक्सी लगाया गया है कांवड जलाभिषेक पूजन के पूर्ण शुभफल प्राप्ति के लिए नियम
क्या करें:-
गंगा स्नान कर शुद्ध मन से जलाभिषेक का संकल्प करें।
गंगा जल किसी धातु अथवा, मिट्टी के बर्तन में लाना चाहिए।
गंगा जल चढ़ाने के पूर्व तक निराहार अथवा फलाहार व्रत रहना चाहिए।
कांवड यात्रा के समय त्रिपुण्ड (चंदन) लगाकर, रूद्राक्ष धारण करना चाहिए तथा ॐ नमः शिवाय या ॐ नमो नीलकण्ठाय का जप मन में निरंतर करना चाहिए।
जलाभिषेक सर्वप्रथम क्रमशः गणेश जी, कार्तिकेय जी, नन्दी जी, पार्वती जी और अन्त में शिवलिंग पर करना चाहिए।
जलाभिषेक उत्तर मुख होकर बैठकर या झुककर करना चाहिए।
मनोकामना सिद्धि के लिए दीपक जलाकर प्रार्थना करना चाहिए।
जलाभिषेक पूजन के बाद ब्राह्मण भोजन व दान अवश्य करना चाहिए।
क्या ना करें:-
कावड़ यात्रा में किसी भी प्रकार का नशा नहीं करना चाहिए।
कांवड जल उठाने के बाद जल चढ़ाने तक भूमि पर नहीं रखना चाहिए।
किसी पर क्रोध, दुर्व्यहार तथा अपशब्द भाषा का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
अश्लील वस्त्र धारण नहीं करना चाहिए तथा अश्लील गीत व नृत्य भी नहीं करना चाहिए।
शंख से जलाभिषेक नहीं करना चाहिए तथा हल्दी रोली तुलसी पत्र भी नहीं चढ़ाना चाहिए।
कांवड यात्रा के समय धार्मिक एवं वैधानिक नियमों का उल्लंघन नहीं करना चाहिए।
भगवान शिव के पूजन में गंगाजल, विल्वपत्र, आँक (मदार) के पुष्प, फल व पत्ते, शमी पुष्प व पत्ते, धतूरा, सफ़ेद व पीले पुष्प, सफ़ेद मिष्ठान, दूध, गन्ने का रस, अक्षत (बिना टूटे चावल), गेहूँ, तिल, दही, शहद, देशी घी, तुलसी की मंजरी, दूर्वा आदि अवश्य चढ़ाना चाहिए,
कावड़ के धार्मिक महत्व को बताते हुए पंडित के0 सी0 पाण्डेय ने बताया कि धर्मग्रंथो व श्रुतियों के अनुसार समुद्रमंथन के बाद निकले हलाहल विष को सृष्टि रक्षा हेतु भगवान भोलेनाथ ने पी लिया था विष की गर्मी को शांत करने के लिए देवताओं ने जलाभिषेक किया एक अन्य कथा अनुसार हत्या के पाप से निवृति के लिए भगवान परशुराम जी द्वारा बागपत स्थित पूरा महादेव का जलाभिषेक किया गया, भगवान श्री राम द्वारा भी जलाभिषेक किया गया था तथा रावण द्वारा भी जलाभिषेक का वर्णन मिलता है महासभा द्वारा सोशल मिडिया के द्वारा भी नियम पालन करने के लिए लगातार अपील किया जा रहा कि भगवान भोलेनाथ के भक्ति में किसी भी प्रकार का नशा तथा अश्लील गीत-नृत्य व अश्लील परिधान नहीं होना चाहिए महासभा समन्वयक पंडित अजय पाण्डेय ने कहा कि महासभा द्वारा व्रत पर्व निर्णय के सम्बन्ध में शास्त्रमत के आधार पर ही मार्गदर्शन किया जाता है जो शत प्रतिशत भक्तों के कल्याण एवं सनातनहित के लिए होता है तथा प्रशासन को भी व्यवस्था में सुविधा होती है महासभा ज्योतिष – कर्मकांड एवं मंदिरों के पुजारीयों का बड़ा समूह है जिसमें व्यापक विचार विमर्श के बाद ही पर्व मुहूर्त का सही निर्णय निर्धारित किया जाता है महासभा द्वारा इस बार कावड़ जलाभिषेक मुहूर्त 11 अगस्त मंगलवार को सुबह 5 बजकर 50 मिनट से प्रारम्भ का निर्णय दिया गया है जो हापुड़ व आसपास के जिलों के लिए पूर्णतः शास्त्र सम्मत है महामंत्री अनिशा सोनी पाण्डेय ने स्त्री श्रद्धालुओं से विशेष अपील किया है कि कावड़ यात्रा व जलाभिषेक के समय अपने बालों को बाँधकर रखें तथा शिवलिंग का स्पर्श बिल्कुल ना करें कावड़ जलाभिषेक पूर्ण होने के बाद कावड़ इधर उधर ना फेंके अभियान में उपाध्यक्ष पंडित गौरव कौशिक, मंत्री पंडित देवी प्रसाद तिवारी,संगठन मंत्री, पंडित जगदम्बा शर्मा, कोषाध्यक्ष पंडित मित्र प्रसाद काफ्ले, परामर्श मंडल विद्वान पंडित पुरुषोत्तम दाहाल, स्वामी वराहगिरी, प्रचार मंत्री पंडित शैलेन्द्र मिश्रा शास्त्री, प्रवक्ता पंडित प्रशांत वशिष्ठ, पंडित मुनेन्दर तिवारी,समन्वयक पंडित अजय पाण्डेय, पंडित संजय मिश्रा, पंडित विनोद शर्मा, पंडित राकेश गिरी, पंडित रविशंकर शुक्ला, पंडित अनुज मिश्रा, पंडित विनोद पूरी,मिडिया प्रभारी पंडित सर्वेश तिवारी, पंडित अजय त्रिपाठी आदि सक्रिय भूमिका निभा रहे है.
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