
जानिए श्रावण शिवरात्रि पर होने वाले कांवड़ जलाभिषेक का मुहूर्त
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा की बैठक श्री नर्मदेश्वर शिव मंदिर, पटना गाँव हापुड़ में हुई जिसमें विद्वानों ने श्रावण शिवरात्रि पर होने वाले कावड़ जलाभिषेक मुहूर्त एवं पूजन का निर्धारण किया। महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित के0 सी0 पाण्डेय काशी वाले ने कहा कि श्रावण मास 30 जुलाई गुरुवार से प्रारम्भ होकर 28 अगस्त शुक्रवार तक रहेगा श्रावण महीने में देवाधिदेव महादेव भोलेनाथ का प्रमुख पर्व श्रावण कृष्ण चतुर्दशी (सावन शिवरात्रि) कावड़ जलाभिषेक 11अगस्त मंगलवार को सूर्योदय के साथ सुबह 5 बजकर 50 मिनट से प्रारम्भ होगा जो देर रात्रि 1 बजकर 53 मिनट तक विशेष रहेगा तथा निशीथकाल में चतुर्दशी तिथि प्राप्त होने से पूरी रात्रि शिवपूजन होगा अर्थात शिवभक्त 11 अगस्त को पूरे दिन जलाभिषेक करेंगे।
कोषाध्यक्ष पंडित मित्र प्रसाद काफ्ले ने बताया कि इस बार नागपंचमी पर्व सोमवार तथा सिंह संक्रांति के विशेष संयोग के साथ 17 अगस्त को बन रहा है। अतः इसदिन कालसर्प दोष शान्ति उपाय विशेष प्रभावी रहेगा। साथ ही चन्द्रमा, सूर्य, राहु व केतू आदि ग्रहों के विशेष उपाय किए जायेंगे तथा शनि के साढ़ेसाती व ढईया से प्रभावित लोग भी उपाय कर सकते है। महामंत्री अनिशा सोनी पाण्डेय ने बताया कि इस बार श्रावण में भगवान भोलेनाथ के विशेष पूजन हेतु 4 सोमवार (3 अगस्त, 10 अगस्त , 17 अगस्त तथा 24 अगस्त ) साथ ही 2 प्रदोष व्रत (10 अगस्त एवं 25 अगस्त ) तथा हरियाली तीज 15 अगस्त को मनाया जाएगा।
अलग अलग मनोरथ पूर्ण करने जैसे पुत्र प्राप्ति के लिए दूध से, प्रेम के लिए दही से, मैत्री व शांति के लिए घी से दांपत्य जीवन सुखमय के लिए शक्कर मिश्रित दूध का, धनके लिए शहद से, व्यापार वृद्धि व धन प्राप्ति के लिए गन्ने का रस से,रोग नाश के लिए गिलोय से विद्या प्राप्त करने के लिए गंगाजल से पूरे श्रावण महीने भगवान शिव का अभिषेक करें सावन में किसी भी शिवलिंग पर जल चढ़ाने से शुभ फल अवश्य प्राप्त होता है। मंत्री पंडित देवी प्रसाद तिवारी ने कहा कि अमावस्या 12 अगस्त तथा पूर्णिमा व्रत 27 अगस्त को रहेगा शिवालय में जलाभिषेक करते समय गंगाजल को लेकर उत्तर की ओर मुख करके सबसे पहले भगवान गणेश जी उसके बाद कार्तिकेय जी फिर नंदीजी, पार्वती जी और अंत में शिवलिंग पर जल चढ़ाए साथ ही मन ही मन ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करते रहे, जल बैठकर यदि संभव नहीं हो तों झूककर ही चढ़ाना चाहिए जलाभिषेक करते समय मस्तक पर त्रिपुण्ड (तिलक ) लगा होना चाहिए यदि शिवालय में शिवलिंग के अतिरिक्त अन्य मूर्ति नहीं है तो सबसे पहले पूर्व फिर दक्षिण, पश्चिम,उत्तर क्रमानुसार और अंत में शिवलिंग पर जल चढ़ाए।
पंडित के0 सी0 पाण्डेय ने कहा कि श्रावण शिवरात्रि के दिन भगवान शिव को यज्ञोपवीत अवश्य चढ़ाए, कावड़ यात्रा के समय में व्यसन करने से कावड़ यात्रा खंडित व व्यर्थ हो जाता है ताँबे, कांसे या चाँदी के लोटे से जलाभिषेक करना उत्तम रहता है, उन्होंने जलाभिषेक एवं पूजन विधि की विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए कावड़ यात्रा को नशामुक्त रखने का आह्वान किया महासभा द्वारा सभी प्रमुख शिव मंदिरों में कावड़ जलाभिषेक के जानकारी हेतू फ्लैक्सी लगाया जाएगा परामर्श मण्डल विद्वान पंडित आशुतोष शुक्ला ने बताया कि शिवरात्रि के दिन 4 पहर की पूजा का भी विशेष महत्त्व है जो समस्त पापों का नाश करके उत्तम फल प्रदान करता है श्रद्धालु पितृदोष निवारण, कर्जमुक्ति, रोगमुक्ति, चन्द्र, राहु, केतु, शनि ग्रह शान्ति हेतु एवं सुख शान्ति, समृद्धि के लिए गंगास्नान कर जलाभिषेक करें भगवान शिव के पूजन में गंगाजल, विल्वपत्र, आँक (मदार) के पुष्प, फल, पत्ते, शमी पुष्प, पत्ते, धतूरा, सफ़ेद व पीले पुष्प, सफ़ेद मिष्ठान, दूध, गन्ने का रस, अक्षत (बिना टूटे चावल), गेहूँ, तिल, दही, शहद, देशी घी, तुलसी की मंजरी, दूर्वा आदि अवश्य चढ़ाना चाहिए, भगवान भोलेनाथ को कभी भी हल्दी, रोली, तुलसी के पत्ते, केतकी का फूल, नारियल का जल ना चढ़ाए तथा शंख से अभिषेक भी नहीं करना चाहिए नर्मदेश्वर शिव मंदिर के पुजारी पंडित अजय त्रिपाठी ने कावड़ जलाभिषेक के संबंध में बताया कि धर्मग्रंथो व श्रुतियों के अनुसार समुद्रमंथन के बाद निकले हलाहल विष को सृष्टि रक्षा हेतु भगवान भोलेनाथ ने पी लिया था विष की गर्मी को शांत करने के लिए देवताओं ने जलाभिषेक किया एक अन्य कथा अनुसार हत्या के पाप से निवृति के लिए भगवान परशुराम जी द्वारा बागपत स्थित पूरा महादेव का जलाभिषेक किया गया, भगवान श्री राम ने भी कावड़ जलाभिषेक किया था तथा रावण द्वारा भी जलाभिषेक का वर्णन मिलता है बारह ज्योतिर्लिंग में इसकी विशेष महत्ता है स्कन्द पुराण, शिव पुराण, लिंगपुराण, नारदसंहिता आदि धर्मग्रंथों में बताया गया है बैठक में पंडित आशीष पोखरियाल, सर्वेश तिवारी, पंडित अजय पाण्डेय, पंडित प्रेम नारायण भारद्वाज, पंडित मित्र प्रसाद काफ्ले, डॉ0 वासुदेव शर्मा, पंडित गौरव कौशिक, पंडित जगदम्बा शर्मा, पंडित प्रशांत वशिष्ठ, पंडित रविशंकर शुक्ला, पंडित बुद्धू शर्मा आदि ने विचार मत प्रदान किया.
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