
सरस्वती द्वारा विश्व क्षय रोग दिवस 2026 पर व्यापक जन-जागरूकता अभियान
हापुड़, सीमन /रियाज़ अहमद(ehapurnews.com): विश्व क्षय रोग दिवस 2026 के अवसर पर, सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ (SIMS), हापुड़ के सामुदायिक चिकित्सा विभाग द्वारा मुकिमपुर गांव एवं संस्थान के ओपीडी परिसर में एक व्यापक जागरूकता एवं जनसंपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम इस वर्ष की वैश्विक थीम—
“हाँ! हम टीबी को समाप्त कर सकते हैं: देशों के नेतृत्व में, लोगों की शक्ति से” —के अनुरूप आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य आम जनता को क्षय रोग (टीबी) के प्रति जागरूक करना, इसके लक्षणों की समय रहते पहचान, रोकथाम, पूर्ण उपचार पालन तथा इस बीमारी से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करना था।
यह कार्यक्रम सामुदायिक चिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ. (ब्रिग.) विनीत रस्तोगी के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व डॉ. विनय कुमार (टीबी नोडल अधिकारी) एवं डॉ. सिनीश टी. वी. (सीनियर रेजिडेंट) ने किया, जिसमें फैकल्टी सदस्यों, रेजिडेंट्स एवं एमबीबीएस छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
मुकिमपुर गांव में एक व्यापक चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामीणों को सामान्य स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ टीबी के लक्षण, जांच एवं उपचार संबंधी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया, जिससे संभावित रोगियों की पहचान एवं समय पर चिकित्सा परामर्श संभव हो सका।
कार्यक्रम की मुख्य विशेषता एमबीबीएस 2023 एवं 2024 बैच के छात्रों द्वारा प्रस्तुत प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक रहा। यह नाटक मुकिमपुर गांव एवं सिम्स ओपीडी परिसर दोनों स्थानों पर आयोजित किया गया, जिसमें टीबी के संक्रमण, देर से जांच के दुष्परिणाम एवं उपचार पूरा करने के महत्व को सरल एवं प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया।
ओपीडी गतिविधियों का संचालन डॉ. सचेत डावर (एसोसिएट प्रोफेसर, पल्मोनरी मेडिसिन विभाग) के मार्गदर्शन में किया गया। इन प्रस्तुतियों ने आमजन का विशेष ध्यान आकर्षित किया और जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित स्वास्थ्य वार्ता में डॉ. विनय कुमार ने टीबी के प्रारंभिक लक्षणों जैसे लगातार खांसी, वजन में कमी एवं बुखार की पहचान पर जोर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि टीबी की जांच एवं उपचार राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत निशुल्क उपलब्ध है तथा पूर्ण उपचार लेना अत्यंत आवश्यक है, ताकि दवा प्रतिरोध (Drug Resistance) से बचा जा सके। इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में डॉ. अरशद (सीनियर रेजिडेंट), डॉ. सानोजा श्रेया, डॉ. धर्मेंद्र सिंह एवं डॉ. ललित सहित श्री मनोज (MSW), भूप सिंह (MSW) एवं इरफान का विशेष योगदान रहा।
उनके समन्वित प्रयासों से कार्यक्रम का सफल संचालन एवं व्यापक जनसहभागिता सुनिश्चित हुई। इस पहल ने समाज में टीबी के प्रति जागरूकता को मजबूत किया और यह संदेश दिया कि टीबी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्यकर्मियों एवं समुदाय दोनों की सामूहिक भागीदारी आवश्यक है।
कार्यक्रम का समापन आम जनता से इस अपील के साथ किया गया कि वे सतर्क रहें, समय पर चिकित्सा परामर्श लें तथा टीबी मुक्त भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान दें। सिम्स प्रबंधन ने आयोजन टीम के प्रयासों की सराहना की। डॉ. बरखा गुप्ता (प्राचार्य), ब्रिगेडियर डॉ. आर. के. सहगल (सीनियर एडवाइजर), एन. वर्धराजन (जनरल मैनेजर), रघुवर दत्त (डायरेक्टर) एवं मेजर जनरल डॉ. चरणजीत सिंह अहलूवालिया (मेडिकल सुपरिंटेंडेंट) ने इस पहल की सराहना की।
सरस्वती समूह के नेतृत्व—डॉ. जे. रामचंद्रन (संस्थापक एवं अध्यक्ष) एवं सुश्री रम्या रामचंद्रन (उपाध्यक्ष)—ने भी टीम को इस प्रभावी सामाजिक पहल के लिए बधाई दी।
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