हापुड़,सीमन(ehapurnews.com):जमात ए इस्लामी हिन्द के तत्वावधान में सराय बशारत अली में शनिवार को एक महिला सम्मेलन का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ कुरआन पाक की तिलावत से हुआ।कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती फरहीन व कु० शहरीन रहीं। महिलाओं को सम्बोधित करते हुए श्रीमती फ़रहीन ने कहा दहेज के चलन,मंहगी शादियों,ने बेटियों को बोझ बना दिया है. जिसके कारण गर्भपात तथा कन्या भ्रुण हत्या जैसी समस्याओं का सामना है। अक्सर परिवार में बेटियों को दोयम दर्जे का नागरिक समझा जाता है।विवाहित महिलाओं को घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ता है,जो कि परिवार को कमजोर कर देता है।उन्होंने कहा कि औरत को केवल उपभोग की वस्तु समझा जाता है।
इस्लाम में बेटियों को रहमत बताया गया है,मां के पैरों में जन्नत बताई गई है। कु० शहरीन ने कहा कि समाज की पहली ईकाई परिवार होता है.मजबूत परिवार से ही मजबूत समाज बनेगा मजबूत देश भी व्यक्तिगत स्वार्थों के कारण ही पति-पत्नी,भाई-बहन, पिता-पुत्र तथा मां-बेटियों में तनाव की स्थिति अधिकतर परिवार में देखने में आ रही हैं.मुफ्ती खालिद कासमी ने अपने अध्यक्षीय बयान में कहा कि समाज में तलाक की घटनाएं बढ़ रही हैं, तथा विधवा व तलाक शुदा लड़कियों की शादी मुश्किल होती जा रही है. पश्चिमी संस्कृति के प्रभाव में युवा शादी ब्याह की जिम्मेदारी निभाने के बजाय लिव इन रिलेशन को तरजीह दे रहे हैं. जोकि परिवार और समाज के लिए घातक है.आज ही अखबार में ख़बर छपी कि बीमा क्लेम के लिए एम.आर ने पत्नी बेटी की हत्या करने के लिए हत्यारे को 10 लाख की सुपारी दे दी.इस घटना से परिवारों में तनाव का पता चलता है.
उन्होंने कहा कि विरासत में बेटियों, बहनों तथा अन्य हकदारो का हक न देना बहुत बड़ा गुनाह है.इस कार्यक्रम में सैकड़ों महिलाओं ने भाग लिया.इस अवसर पर शकील फारूकी, रिजवान सैफी,श्रीमती महरिश, अफजाल अहमद विशेष रूप से उपस्थित रहे।
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