हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हापुड़ का रजिस्ट्री दफ्तर भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा अड्डा बना है और दफ्तर की सांठगांठ से एक विक्रेता ने टुकड़ों में एक ट्रस्ट व सार्वजनिक भूमि के भूखंड को बेच डाला जबकि विक्रेता को बेचने का कोई अधिकार नहीं था, क्योंकि विक्रेता पर उस भूखंड का मालिकाना हक नहीं है। यह खुलासा उत्तर प्रदेश लोक आयुक्त की जांच में हुआ है। हापुड़ में प्रोपर्टी के दाम आसमान छू रहे है, परंतु बैनामे सर्किल रेट पर कर रहे है जबकि बाजार भाव सर्किल रेट से कई गुना ऊंचा है। इससे स्पष्ट होता है कि काली कमाई प्रोपर्टी में खपाई जा रही है और सरकार को स्टाम्प ड्यूटी से हाथ धोना पड़ रहा है। हापुड़ की श्री नगर कालोनी मे गत डेढ़ वर्ष में करीब 5 अरब रुपए की निवेश हुआ है। यदि श्रीनगर कालोनी के गत दो वर्ष के बैनामों की जांच करा ली जाए तो सरकार को भारी राजस्व मिलेगा।
प्राईवेट कर्मचारी करते है काम- एक खास बात यह पता चली है कि रजिस्ट्री दफ्तर में 4-5 कर्मचारी प्राईवेट है, जो स्थायी कर्मचारी के रुप मे काम करते है। रजिस्ट्री दफ्तर का हर रहस्य इन्हें पता है। कमीशन व रिश्वत के पैसों में से प्राईवेट कर्मचारियों को हिस्सा दिया जाता है जिसे वे अपना वेतन समझते है। बताते है कि हर प्राईवेट कर्मचारी 40-50 हजार रुपए प्रति माह ले जाता है। चोरी-छिपे अलग से मारते है।

यह है मांग- रजिस्ट्री दफ्तर में व्याप्त भ्रष्टाचार और प्राईवेट कर्मचारियों की करतूतों की जांच की मांग नागरिकों ने की है।
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