
वेद ज्ञान एवं आध्यात्मिक जागरण सम्मेलन
हापुड सीमन (ehapurnews.com):आर्य समाज हापुड़ के वार्षिकोत्सव–2025 पर बुधवार को प्रातः आयोजित वेद ज्ञान एवं आध्यात्मिक जागरण सम्मेलन का शुभारंभ विधिवत वैदिक यज्ञ के साथ हुआ। यज्ञ के ब्रह्मा पं. धर्मेन्द्र शास्त्री रहे। मुख्य वक्ता के रूप में आचार्य हरिशंकर अग्निहोत्री (आगरा) ने अपने उद्बोधन में वेदों की सार्वकालिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संसार के समस्त ग्रंथ वेदों के पश्चात रचे गए हैं। यदि वेद-ज्ञान न होता तो न कोई आचार्य होता और न ही मानव कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता। उन्होंने प्रतिपादित किया कि वेद मनुष्य मात्र को अपनाने वाला तथा समस्त प्राणियों के संरक्षण का आधारभूत विधान हैं।
अपने उद्बोधन में आचार्य श्री ने आध्यात्मिक ज्ञान के तीन मूल आधार—त्रैतवाद (ईश्वर, जीव एवं प्रकृति), कर्मफल व्यवस्था तथा योग-साधना—को आत्मकल्याण के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शरीर भस्मान्त है, जबकि आत्मा न जन्म लेती है और न ही मरती है। शरीर और आत्मा के संयोग को जन्म तथा उनके वियोग को मृत्यु कहा गया है। आत्मा का प्रवाह अनंत काल तक निरंतर चलता रहता है। मृत्यु के उपरांत आत्मा की गति कर्मों के अनुसार निर्धारित होती है—या तो मुक्ति प्राप्त होती है अथवा पुनः जन्म।
कार्यक्रम में डॉ. पवित्रा विद्यालंकार (प्राचार्या, कन्या गुरुकुल महाविद्यालय, सासनी) ब्रह्मचारिणियों सहित तथा डॉ. राज सरदाना (प्रधान, आर्य समाज राज नगर, गाजियाबाद) मंचासीन रहे। यज्ञोपरांत भजनोपदेशक आचार्य रामनिवास आर्य (पानीपत) ने “ईश्वर को पहले जानो, फिर मानो” भाव को केंद्र में रखते हुए “यदि उसको न जाना तो कुछ भी न जाना” तथा “शुभ-अशुभ कर्म कर, फल निश्चित मिलना है कल” जैसे भावपूर्ण भजनों की प्रस्तुति दी, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा।
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