कृषि विज्ञान केंद्र में प्रशिक्षण का आज दूसरा दिन
हापुड़, सीमन/अमित कुमार (ehapurnews.com): कृषि विज्ञान केन्द्र, बाबूगढ के सभागार में मंगलवार को जैविक उत्पादकों का आर0पी0एल0 ¼Skilled Development Training) के अन्तर्गत तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिनांक 28 मई से 30 मई, 2024 कार्यक्रम का प्रारम्भ किया गया। प्रशिक्षण के प्रथम दिन दिनांक 28 मई 2024 को उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का उद्घाटन मुख्य अतिथि डा0 पी0के0 सिंह, निदेशक प्रसार, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौ0 विश्वविद्यालय, मेरठ, द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया। उद्घाटन समारोह में डा0 के0जी0यादव, प्राध्यापक, सस्य विज्ञान, डा0 पी0के0 सिंह, प्राध्यापक, सस्य विज्ञान, केन्द्र प्रभारी डा0 अरविन्द कुमार व के0वीके0 का समस्त स्टाफ उपस्थित रहे। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि निदेशक प्रसार द्वारा प्रशिक्षार्थियों को बताया कि एग्रीकल्चर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया (एएससीआई) कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के अन्तर्गत कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे भारत में आयोजित किये जा रहे है। कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम 125 कौशल उद्यमिता विषय चयनित किये गये है। जिसमें से विश्वविद्यालय कार्यक्षेत्र के अन्तर्गत संचालित 05 कृषि विज्ञान केन्द्रों क्रमशः हापुड में जैविक उत्पादों, शामली में मधुमक्खी पालन, गाजियाबाद में वर्मीकम्पोस्ट, मुजफरनगर में मशरूम उत्पादन एवं जी0बी0 नगर में बागवानी पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण आंवटित किये गये है। जैविक खेती ही प्रकृति को बचाने का एकमात्र तरीका है इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण में आपको जैविक खेती के बारें विशेषज्ञों द्वारा बताया जायेगा कि जैविक खेती क्यो आवश्यक है तथा इसके क्या फायदे है तथा प्रशिक्षण के अन्तिम दिन आप सभी की परीक्षा के माध्यम से उत्तीर्ण हुये प्रतिभागियों को एग्रीकल्चर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया (एएससीआई) कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) के द्वारा प्रशिक्षण प्रमाण पत्र दिया जायेगा। आप सभी को इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभाग करने के लिये बहुत -बहुत शुभकामनाये देता हूॅ।
सर्वप्रथम डा॰ अरविन्द कुमार केन्द्र प्रभारी ने तीन दिवसीय प्रशिक्षण में प्रशिक्षार्थियों को बताया कि प्रशिक्षण के दौरान आप सभी को व्याख्यान के माध्यम से जैविक खेती की तकनीकियो से अवगत कराया जायेगा व प्रशिक्षण के अन्तिम दिन आप ने जो सीखा है उसके लिये परीक्षा भी आयोजित की जायेगी।
प्रसार निदेशालय से आये डा0 के0 जी0 यादव, प्राध्यापक (शस्य विज्ञान) ने बताया जैविक खेती , खेत के प्रबन्धन और खाद उत्पादन की एक सम्रग प्रणाली है जो सबसे अच्छे र्प्यावरणीय और जलवायु गतिविधि के अभ्यासों, उच्च स्तर की जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, पशु कल्याण के उच्च मानकों का प्रयोग और प्राकृतिक पदार्थ और प्रक्रियों के प्रयोग से उत्पादित, उत्पादों के लिए उपभोगताओं की बढ़ती हुए मांग के अनुरूप उच्च उत्पादन शामिल करती है।
प्रसार निदेशालय से आयें डा0 पी0के0 सिंह, प्राध्यापक सस्य विज्ञान ने प्रतिभागियों को जैव उर्वरकों का प्रयोग एवं महत्व पर विस्तार से व्याख्यान दिया। उन्होने बताया कि जैव उर्वरकों वो जीवित सूक्ष्मजीव है जो पौधों की सतह, बीज, मृदा में दिये जाते है जिसमें मृदा की बनावट तना पौधों की उपज में वृद्वि करते है। जैव उर्वरक एजोटोवैक्टर राइजोबियम एजोस्प्रैरिलयम, ब्लू ग्रीन एल्गी, शैवाल, पैक्टीशिया, माइक्रोराइजा इत्यादि का प्रयोग कर वायुमण्डल के प्रदूषित होने से बचाते है।
कृषि विज्ञान केन्द्र, गाजियाबाद से आयी डा0 आकांक्षा सिंह, मृदा विशेषज्ञ ने मृदा स्वास्थ्य हेतु हरी खाद का महत्व पर व्याख्यान दिया जिसमें उन्होंने बताया कि किसानों को खरीफ माह में ढैं़चा, सनई जैसी फसलों को जमीन में पलटना चाहिए ताकि पर्यावरण में मौजूद नाइट्रोजन को मृदा में एकत्रित किया जा सके तथा मृदा में आर्गेनिक कार्बन स्तर को बढ़ाया जा सके। कार्यक्रम के नोडल प्रभारी प्रथम डा0 पी0के0 मडके, पशु विज्ञान वैज्ञानिक एवं नोडल प्रभारी द्वितीय डा0 अशोक सिंह, मृदा विशेषज्ञ ने बताया कि इस कार्यक्रम का उदेश्य 40 चयनित प्रतिभागियों को जैविक उत्पादक के रूप में विकसित कर जनपद हापुड में जैविक खेती को बढावा देना है। कार्यक्रम का संचालन डा0 नीलम कुमारी, कृषि प्रसार द्वारा किया गया। तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में डा0 वीरेन्द्र पाल गंगवार, उद्यान वैज्ञानिक, डा0 विनिता सिंह, गृह विज्ञान वैज्ञानिक, डा0 आशीष त्यागी, कीट विज्ञान ने भी जैविक खेती पर चर्चा कर प्रतिभागियों को लाभांवित किया। कार्यक्रम में चयनित 40 प्रतिभागियों ने भाग लिया व कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री योगेन्द्र कुमार शर्मा व श्री अखिल कुमार ने सहयोग किया।।
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