हापुड़, सीमन (ehapurnews.com) : पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति का खेल किसी से छिपा नहीं है और समय-समय पर वैस्टर्न यूपी राजनीति करवटें बदलती रहती है। एक बार फिर ऐसे संकेत मिल रहे है कि निकट भविष्य में वैस्टर्न यूपी की राजनीति एक बार फिर करवट बदलने जा रही है, जो भाजपा के लिए लोकसभा-2024 चुनाव में सिरदर्द पैदा करेगी।
मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक किसान समस्याओं का निदान न होने से नाराज है और उन्होंने राज्यपाल पद से सेवानिवृत्ति के बाद भविष्य की पारी राजनीति अखाड़ें में कूद कर खेलने के संकेत दिए है।
मेरठ कालेज मेरठ से छात्र नेता के रुप में अपना राजनीति सफर शुरु करने वाले सत्यपाल मलिक ने सदैव छात्रों के हितों की लड़ाई लड़ी और बाद में वह किसानों के हितों में मैदान में उतरे और राज्यपाल पद तक पहुंचे।
राज्यपाल सत्यपाल मलिक के सामने दो खास मुद्दे है कि किसानों की मागों का केंद्र व प्रदेश सरकार सम्मान करते हुए उन्हें पूरा करें। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ की स्थापना हो। वह जनहित पर राज्यपाल पद छोड़कर आंदोलन के लिए मैदान में उतरने को तैयार है।
यह बात निश्चित दिखाई दे रही है कि किसान और बैंच मुद्दे को लेकर उनके पीछे किसान, वकील व जनमानस की फौज खड़ी हो जाएगी, जो भाजपा के लिए सिरदर्द साबित होगी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ की वैस्टर्न यूपी में स्थापना एक ऐसा मुद्दा है जिसकी मांग अधिवक्तागण, राजनेता व जनमानस गत 45 वर्ष से उठाता आ रहा है, परंतु बैंच के लिए कोई सार्थक पहल नहीं की गई।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बैंच की स्थापना से वादकारी लाभान्वित होंगे और लोगों को रोजगार मिलेगा। इस बात की प्रबल सम्भावना है कि बैंच के मुद्दे पर बड़ी संख्या में लोग जुझारु नेता सत्यपाल मलिक की अगुवाई स्वीकार कर उनके पीछे खड़े हो जाएं।
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