
राग-द्वेष, विषय भोग और इन्द्रिय सुखो का त्याग ही उत्तम तप है-योगेश जैन शास्त्री
हापुड, सीमन/सुरेश जैन (Ehapurnews.com): जैन धर्म के पर्युषण दशलक्षण महापर्व पर श्री 1008 आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर पर मंगलवार प्रातःकाल अभिषेक शान्तिधारा के उपरांत सम्मेद शिखर विधान मंडल पाठ का आयोजन हुआ। विधान पाठ पूजन योगेश जैन शास्त्री ने सम्पन्न कराया। आज के धर्म लक्षण उत्तम तप धर्म पर प्रवचन करते हुए जैन विद्धान योगेश जैन शास्त्री ने जैन भक्तो से कहा कि राग-द्वेष, विषय भोग तथा इन्द्रिय सुखो का त्याग ही उत्तम तप धर्म है। इन्द्रिय निग्रह तथा आत्मकल्याण के लिए तप अति आवश्यक है। तप से कर्मो की निर्जला होती है, मन शांत व पवित्र होता है तथा आत्मा को अपार शक्ति मिलती है, विभिन्न विधान मंडल पाठो मे बैठकर पूजन करना, उपवास, मंत्र जाप, खानपान का संयम, नित्य देवदर्शन, जैन तीर्थ स्थलो के दर्शन हमारे तप को बढाते हैं। सोमवार देर शाम मन्दिर जी मे धूप दशमी के पूजन के पश्चात धूप खेई गई। सगीतज्ञ विकास भारद्वाज तथा सुनील जैन ने भजन प्रस्तुत किए।
जैन समाज के महामंत्री अशोक जैन, संरक्षक सदस्य सुधीर जैन, राजेश जैन, सुशील जैन, सुरेश चन्द जैन, संदीप जैन, अर्चित जैन, राजीव जैन, सजींव जैन, तुषार जैन, मंजू जैन, रेखा जैन, श्वेता जैन, गरिमा जैन, नेहा जैन,मगन जैन, सपना जैन, नीति जैन, वन्दना जैन, निशा जैन, ममता जैन सहित अनेक जैन भक्त उपस्थित थे।
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