
मातृ भाषा व्यक्ति की पहचान, संस्कृति और विचारों की पहचान:रानी तिवारी
हापुड, सीमन (ehapurnews.com):हापुड केएसएसवी (पीजी) काॅलिज के इण्डियन लेंग्वेज कल्चर एण्ड आर्ट सैल के तत्वावधान में बुधवार को भाषा का महत्व विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन किया गया। कमेटी की संयोजिका प्रो0 रानी तिवारी ने कहा मातृभाषा व्यक्ति की पहचान, संस्कृति और विचारों का आधार होती है, जो उसे जड़ों से जोड़ती है और भावनाओं को सहजता से व्यक्त करने में मदद करती है, जिससे मानसिक विकास, सामाजिक जुड़ाव और सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण होता है, यह शिक्षा और जीवन के हर पहलू में महत्वपूर्ण है। डाॅ0 कल्पना सिंह ने कहा कि यह सिर्फ संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कारों, परंपराओं और आत्म-चेतना को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त जरिया है, जो समग्र व्यक्तित्व निर्माण के लिए आवश्यक है। डाॅ0 राज भूषण मौर्य ने कहा कि मातृ भाषा हमारी विरासत, रीति-रिवाजों और मूल्यों से जोड़ती है, जिससे हमारी सामूहिक पहचान मजबूत होती है।मातृभाषा में शिक्षा बच्चों के मानसिक और बौद्धिक विकास में सहायक होती है, जिससे वे ज्ञान को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं। डाॅ0 राकेश कुमार ने कहा कि यह परंपराओं, इतिहास और लोक-कलाओं को अगली पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम है, जिससे सांस्कृतिक धरोहर जीवित रहती है। वैश्वीकरण के इस दौर में भी मातृभाषा का महत्व कम नहीं हुआ है, बल्कि यह हमारी जड़ो और मौलिकता को बनाए रखने के लिए और भी जरूरी हो गई है। हमें अपनी मातृभाषा का सम्मान करना और उसे बढ़ावा देना चाहिए ताकि हमारी सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहे और आने वाली पीढ़ियाँ अपनी पहचान से जुड़ी रहें। इस परिचर्चा में स्नातक एवं परास्नातक के विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।
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