हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा विद्वानों द्वारा आश्विन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा जो शरद पूर्णिमा या कोजागारी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस बार 28 अक्टूबर दिन शनिवार को है, शरद पूर्णिमा को इस बार ग्रहण लगने व भारत में दृश्यमान होने के कारण उतन्न परिस्थिति, असर व उपाय पर विचार विमर्श हुआ। सभी ने अपना मत रखा पश्चात धर्म ग्रन्थ निर्णय सिंधु व धर्म सिंधु को आधार मानकर ये निर्णय हुआ कि सूतक मान्य होगा। ग्रहण रात्रि 1बजकर 05 मिनट पर शुरू होगा जिसका मध्यकाल 1.44 और ग्रहण का मोक्ष (समापन) रात्रि 2 बजकर 24 मिनट पर होगा, धर्मग्रंथो के अनुसार चंद्रग्रहण में सूतक 9 घंटे पहले लगता है। अतः यह सायं 4.05 से लग जायेगा अतः सभी मंदिरो के पट इस समय से बंद रहेंगे, अधिकांश भक्तजन पूर्णिमा को श्री सत्यनारायण व्रत रखकर कथा भी सुनते है उन्हें सायं 4.05 से पूर्व ही समस्त धार्मिक कार्य सम्पन्न कर लेना चाहिए.
ग्रहणकाल का समय ज्योतिष में बहुत महत्वपूर्ण है सभी राशियों पर इसका प्रभाव पड़ता है। अतः इसका असर रहेगा,अश्विनी नक्षत्र व मेष राशि पर लगने के कारण ये राशि सर्वाधिक प्रभावित रहेगी साथ ही साथ ही कर्क, वृश्चिक व मीन राशि पर भी अशुभ प्रभाव रहेगा, वृषभ, तुला व धनु राशि वालों को ग्रहण का मध्यम फल मिलेगा, मिथुन, सिंह, कन्या, मकर और कुम्भ राशि वालों के लिए ग्रहण शुभ रहेगा.
सभी राशि वालों को ग्रहणकाल के समय अपने इष्टदेव का ध्यान व मंत्रजप करना चाहिए। साथ ही चंद्र के मंत्र “ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम:” का जप भी अवश्य करें,वर्तमान में जिनकी भी कुंडली में राहु का गोचर लग्न,4,8,12 में गोचर कर रहा है अथवा राहु व चन्द्रमा अशुभ स्थिति में है उन्हें विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
ग्रहण में गंगानदी में स्नान करने से करोड़ों गौ दान देने के बराबर पुण्यफल प्राप्त होता है ग्रहणकाल के समय किये गये मन्त्र सिद्ध हो जाते है जिससे सकारात्मक परिणाम मिलते है ग्रहणकाल समय में हवन करने से भी लाभ होता है. जिसकी भी कुंडली में चंद्र-राहु युति या पितृदोष हो उन्हें ग्रहणकाल में उपाय करने चाहिए,ग्रहण समाप्ति के बाद सभी को स्न्नान अवश्य करना चाहिए,ग्रहणकाल के समय खाना, काटना, सिलना और सोना नहीं चाहिए गर्भावस्था में महिलाओं को इसका विशेष ध्यान रखना चाहिए, बालक, वृद्ध व रोगी को परिस्थितियों के अनुसार नियमपालन आवश्यक नहीं है,भगवान वासुदेव का ध्यान, हनुमान चालीसा या सुन्दरकांड का करना चाहिए शास्त्र व पौराणिक मान्यतानुसार ग्रहण में गंगाजल, दूध, कुश, राई, मट्ठा, दही, घी, तेल,तुलसीदल, गाय का गोबर अशुद्ध नहीं होता है अतः ग्रहणसूतक से पूर्व कुशा व तुलसीपत्र सभी खाद्यपदार्थ व वस्तुओं में डाल दे.
धार्मिक व पौराणिक मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन ही समुद्र मंथन से लक्ष्मीजी निकली थी तथा इस दिन चन्द्रमा 16 कलाओं से युक्त होकर धरती के सबसे नजदीक होता है चन्द्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है अतः इस दिन खीर बनाकर भगवान को अर्पण व चंद्र रोशनी में रातभर रखकर अगले दिन खाने का विधान है इससे शरीर पुरे वर्ष निरोग व स्वस्थ रहता है व लक्ष्मी की कृपा रहती है भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा के विद्वानों ने निर्णय दिया कि शनिवार सांय 4.05 से पहले ही खीर बनाकर उसमें गंगाजल व कुश व तुलसीपत्र डालकर चंन्द्रोदय की रोशनी में रखना चाहिए इससे वह अशुद्ध नहीं होगा व ग्रहण लगने से पूर्व हटा लेना चाहिए तथा ग्रहण समाप्ति उपरांत स्नान के पश्चात औषधि व प्रसाद मानकर ग्रहण करना चाहिए.निर्णय में डॉ0 वासुदेव शर्मा,मंत्री गौरव कौशिक, उपाध्यक्ष आदित्य भारद्वाज,आचार्य देवी प्रसाद तिवारी, कोषाध्यक्ष मित्र प्रसाद काफ़ले,परामर्श बोर्ड से आचार्य आशुतोष शुक्ला,आचार्य कमलेश गिल्डियाल , ज्योतिषी संतोष तिवारी,महामंत्री अनिशा सोनी पाण्डेय,आचार्य अजय पाण्डेय,प्रवक्ता आचार्य अजय शर्मा,मंत्री महावीर शर्मा, पंडित जगदम्बा शर्मा,संगठन मंत्री पंकज पाण्डेय, आचार्य ओम प्रकाश पोखरियाल, पंडित मदन मोहन लखेड़ा, एस्ट्रो के0 सी0 पाण्डेय (काशी वाले )अध्यक्ष, भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा आदि शामिल रहे.
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