हापुड़, सीमन/अमित कुमार (ehapurnews.com): श्री रामलीला मैदान के मुख्य द्वार श्री राम द्वार का भव्य उद्घाटन हुआ। मुख्य अतिथि सांसद राजेंद्र अग्रवाल तथा विशिष्ट अतिथि विधायक विजयपाल सिंह आढ़ती एवम कार्यक्रम अध्यक्ष मनोज गुप्ता (चामुंडा पेपर मिल) ने फीता काटकर उद्घाटन किया। श्री रामलीला समिति रजिस्टर्ड हापुड़ द्वारा श्री रामलीला महोत्सव का आयोजन प्रधान रविंद्र गुप्ता, महामंत्री विनोद वर्मा, कोषाध्यक्ष उमेश अग्रवाल, मीडिया प्रभारी शुभम गोयल एडवोकेट के द्वारा प्रभु श्री सीताराम लक्ष्मण आरती करके विधिवत संपन्न किया गया।
श्री आदर्श रामलीला मंडल रजिस्टर्ड वृंदावन मथुरा के निर्देशक व्यास जी श्री पवनदेव चतुर्वेदी जी महाराज ने बताया भरत अयोध्या वापस लौट गए तो भगवान श्री राम जी चित्रकूट पर निवास करने लगे। जब भगवान चित्रकूट पर बसे तो अनेकों चरित्र भगवान ने किये और अनेक दुष्टो को मारकर चित्रकूट भूमि का उद्धार किया। एक दिन देवराज इंद्र के पुत्र जयंत की पत्नी भगवान श्री राम जी का पूजन करने आई। वहां पर प्रभु श्री राम जानकी जी का फूलों का श्रंगार कर रही थी जिसको देखकर जयंत के पुत्र के मन में बड़ा अभिमान आया कि मेरी पत्नी किस का पूजन करने जा रही है। वह भी अर्धरात्रि में उसके मन में शंका हुई। वह स्वयं परीक्षा लेने के लिए पहुंचा और प्रभु श्री राम की परीक्षा के लिए कवुए के भेष में लेने गया और जानकी जी के चरणों में चोट मारकर भागा। तभी प्रभु श्री राम जी ने जयंत के पीछे अपना अग्निबाण छोड़ दिया। जयंत ने कवुए का रूप बनाया हुआ था जो भागने लगा। प्रभु श्री राम जी का अग्निबाण उसके पीछे पीछे भाग रहा था। ब्रह्मा विष्णु महेश की शरण में गया पर किसी ने रक्षा नहीं की। तब अंत में नारद जी को दया आई और नारद जी ने उसको उपाय बताया कि वही संसार के स्वामी है। उन्हीं के शरण मे जा और वही क्षमा करेंगे। जयंत भगवान श्री राम जी के चरणों मे चले जाते हैं। प्रभु श्री राम जयंत को क्षमा करते हैं और आगे के लिए प्रस्थान करते हैं। उससे पहले अत्रि जी और अनुसुइया जी के आश्रम में जाते हैं और अनसूया जी के द्वारा सुंदर नारी धर्म के उपदेश जानकी जी को दिए जाते हैं। प्रभु श्री राम जी अनुज लक्ष्मण जी और जानकी जी के सहित उनसे आशीर्वाद प्राप्त कर आगे की ओरबढ़ जाते है। वहां जाकर सरपंग सुतीक्षण जैसे संतों पर कृपा करते हुए अगस्त्य मुनि के यहां जाते हैं और अगस्तमुनि से दिव्य शक्तियां प्राप्त करते हैं जिससे कि आगे चलकर राक्षसों का वध कर सके अगस्त मुनि श्री राम जी को पावन पंचवटी पर जाने का निर्देश देते हैं। राम जी मुनि आज्ञा पाकर चलते हैं। पंचवटी की और पंचवटी पर जाकर निवास करने लगते हैं। 1 दिन वहां रावण की बहन सुपनखा सुंदर भेष में आती है और काम आसक्त होकर वह राम जी से निवेदन करती है राम जी सब मायाजाल लक्ष्मण जी की ओर इशारा करते हैं लक्ष्मण जी भी बारंबार निवेदन को स्वीकार नहीं करते और उसको डांटने लगते हैं ओर शूपर्णखां अपना भयानक रूप बनाकर सामने आ आती है ओर माता जानकी पर प्रहार करने को आती हैं तभी लक्ष्मण द्वारा नाक कान काट दिए जाते हैं। मंचन के दौरान रतनलाल ठेकेदार डी के सर्राफ अनिल आज़ाद एडवोकेट नवीन वर्मा सुयश वशिष्ट नवीन गुप्ता शुभम गोयल एडवोकेट अंकुर गर्ग विवेक सिंघल अभिषेक आज़ाद प्रदीप वर्मा सोनी मुकुट वर्मा दीपक वर्मा विमल वर्मा आदि पदाधिकारी उपस्थित रहे।।
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