हापुड़, वैसे तो हापुड़ में हरी सब्जियों में मंदे का दौर लाकडाउन-प्रथम से ही चल रहा है, परंतु सबसे अधिक मिट्टी पलीत टमाटर की हो रही है। मंडी में टमाटर का थोक भाव दो रुपए प्रति किलो से नीचे है और फुटकर में गली-मौहल्लों में 6-8 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। टमाटर की बिक्री न होने पर आढ़ती व किसान मवेशियों को खिला रहे हैं, अथवा कूड़े के ढ़ेर पर डाल रहे हैं।
हापुड़ जनपद में टमाटर की खेती बड़े पैमाने पर होती है। किसान बिक्री के लिए टमाटर गढ़मुक्तेश्वर, हापुड़, पिलखुवा की मंडियों में बिक्री हेतु लाता है। लाकडाउन के कारण टमाटर की मांग नहीं है। दिल्ली बार्डर सील होने से टमाटर की पूरी तरह मिट्टी पलीत हो रही है। होटल, रेस्टोरेंट, ढाबों तथा टमाटो सास निर्माताओं की मांग भी शून्य है।
गांव ततारपुर के किसान हरिकृष्ण बताते हैं कि खेत से टमाटर की तुड़ाई तथा बिक्री हेतु मंडी तक पहुंचाने का खर्च भी किसान को नहीं मिल रहा है, लागत मिलना तो दूर की बात है। ऐसे में किसान के सामने टमाटर जानवरों को खिलाने तथा कूड़े पर फैंकने के अलावा और कोई चारा नहीं है।
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