
प्रदेश की अर्थव्यवस्था में हापुड़ का एक प्रतिशत से भी कम योगदान
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): राज्य की अर्थव्यवस्था को एक ट्रिलियन डालर का आकार देने की जिद्दोजहद में जुटी प्रदेश सरकार को अपने इस भगीरथ प्रयास में पिछड़े जिलों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था में इन जिलों के योगदान में पिछले तीन वर्षों में कोई उल्लेखनीय सुधार नहीं दिख रहा है। नतीजतन अब भी 43 जिले ऐसे हैं जिनमें से प्रत्येक का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में एक प्रतिशत से भी कम योगदान है। प्देश की अर्थव्यवस्था में योगदान के मामले में पूर्वी और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीच जमीन-आसमान का अंतर है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश सकल राज्य घरेलू उत्पाद में 48.51 प्रतिशत तो पूर्वी उत्तर प्रदेश 27.59 प्रतिशत योगदान दे रहा है।
प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सबसे कम योगदान देने वाले 10 जिलों के जिला घरेलू उत्पाद (डीडीपी) में पिछले तीन साल में कोई खास वृद्धि नहीं दिख रही है। अंतिमं पायदान पर खड़े श्रावस्ती जिले का योगदान 2020-21 में 0.31 प्रतिशत था जो कि 2023-24 में 0.34 प्रतिशत तक ही पहुंच सका है। चित्रकूट का जिला घरेलू उत्पाद 2021-22 में 0.45 प्रतिशत था जो 2023-24 में भी 0.45 प्रतिशत ही है। संत कबीर नगर का योगदान 0.48 प्रतिशत से घटकर 0.47 प्रतिशत, औरैया का 0.66 से 0.48, भदोही का 0.52 से 0.51, कौशांबी का 0.55 से 0.56, महोबा का 0.53 से 0.57, मऊ का 0.65 से 0.59, कन्नौज का 0.68 से 0.60, कासगंज की 0.61 से घटकर 0.60 प्रतिशत रह गया है।
प्रदेश की अर्थव्यवस्था (जीएसडीपी) में एक प्रतिशत से कम योगदान करने वाले जिलों में श्रावस्ती, चित्रकूट, संतकबीरनगर औरैया, भदोही, कौशांबी, महौवा, मऊ, कन्नौज, कासगंज, बलरामपुर. इटावा, फर्रुखाबाद, ललितपुर शामली, सिद्धार्थ नगर, चंदौली, बांदा, बागपत, अमेठी, एटा, मैनपुरी, हाथरस, महाराजगंज, प्रतापगढ़, हमीरपुर, देवरिया, सुल्तानपुर, हापुड़, बलिया, अंबेडकरनगर, पीलीभीत, बस्ती, जालौन, संभल, मीरजापुर, फिरोजाबाद, कानपुर देहात, अमरोहा, रायबरेली, गाजीपुर, गोंडा और फतेहपुर शामिल हैं।
डीडीपी में गौतमबुद्ध नगर 10.30 प्रतिशत योगदान के साथ पहले नंबर पर, लखनऊ 5.53 प्रतिशत योगदान के साथ दूसरे व 4.57 प्रतिशत के साथ गाजियाबाद तीसरे नंबर पर है।
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