
ईद की नमाज से पहले फितरा अदा
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): ईदुल फितर की नमाज से पहले फितरा अदा करना अहले निसाब महिला पुरुष और उनके बच्चों पर वाजिब है। जिसमें वे नवजात भी शामिल हैं, जिनका जन्म ईद की नमाज से पहले हुआ है। यह व्यवस्था गरीब मजलूम परिवारों समेत यतीम बच्चों की खुशी से जुड़ी हुई है।
मुकद्दस रमजान का महीना अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है, जिसके समापन के अगले दिन ईद का त्योहार मनाया जाता है, जिसका असल नाम ईदुल फितर है। क्योंकि मजहबे इस्लाम में रमजान माह में गरीब मजलूम परिवारों को फितरा अदा करना हर एक अहले निसाब अर्थात गुंजाइश वाले मर्द, औरत और बच्चों पर वाजिब है। फितरा अदा करने की जो शर्त है उसके तहत इसकी अदायगी हर हाल में ईद की नमाज से पहले हो जानी जरूरी है। इसके अलावा मुकद्दस स्मजान माह में रोजदारों पर अल्लाह की खास रहमत नाजिल होती है, जिसके तहत एक नेकी का सवाब बढकर सत्तर गुना हो जाता है। इसलिए यह पाक महीने पूरा होने से पहले ही दौलतमंद लोगों को खैरात, जकात और सदका भी अदा कर देना चाहिए।
फितरा लेने का हकदार कौन होते हैं:
मुफ्ती मोहम्मद अनस और हाजी असलम ट्रांसपोर्टर का कहना है कि फितरे के रूप में हर किसी मर्द, औरत और नवजात समेत बच्चे पर दो किलो गेहूं अथवा इसकी कीमत अदा करना वाजिब होता है, जिसमें चूक होने पर अल्लाह का अजाब होता है। उन्होंने बताया कि फितरा जिन्हें अदा किया जाए, उनमें मुख्य रूप से गरीब, मिस्कीन, यतीम और विधवा महिला शामिल होती हैं।
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