हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हापुड़ की दिल्ली रोड पर स्थित है श्री बालाजी महाराज का मंदिर। मंदिर का निर्माण कई वर्षों से चलता आ रहा है। पुल से गुजरने वाले लोग मंदिर के आगे नतमस्तर होते हैं जिनके मन में एक सवाल जरुर आता होगा और वह है कि आखिर इस मंदिर का निर्माण पूरा कब होगा? कब वह बालाजी महाराज के दर्शन करेंगे लेकिन आपको बता दें कि मंदिर का अधिकांश निर्माण पूरा हो चुका है। जहां प्रतिदिन मंत्रोच्चारण के साथ बालाजी महाराज की आरती भी होती है और लोग अपनी आस्था का परिचय देते हुए बालाजी महाराज व सभी देवी- देवताओं के दर्शन करने आते हैं जो भी श्रद्धालु मंदिर में आता है वह स्तब्ध रह जाता है। राम नाम की धुन जब भक्त के कानों में पड़ती है तो वह भक्ति के सागर में डूब जाते हैं।
मंदिर की बाहर से तस्वीर आज भी ऐसी लगती है कि इसका निर्माण मानों पूर्ण ही नहीं हुआ है लेकिन भीतर प्रवेश करने पर मंदिर की दिव्यता नजर आती है। यह मंदिर बेहद ही अदभुत तरीके से बनाया जा रहा है जिसका निर्माण सन 1995 में शुरु हुआ था। हापुड़-पिलखुवा के मध्य स्वामी सुदर्शनाचार्य जी महाराज के शिष्य ज्योतिषाचार्य अशोक कुमार गोयल तथा यशवर्धन आचार्य द्वारा मंदिर एवं धर्मशाला का निर्माण तपोभूमि पर चल रहा है। इस मंदिर में आकर ऊर्जा का संचार होता है।
मंदिर में आने पर पता चला कि लगभग 28 वर्षों से मंदिर का निर्माण चल रहा है जो आने वाले कुछ वर्षों में पूरा होगा। लगभग 2200 गज वर्ग मीटर भूमि पर मंदिर को बनाया जा रहा है। खास बात यह है कि इस विशाल मंदिर को बनाने के लिए किसी आर्किटेक्ट की जरुरत नहीं पड़ी बल्कि स्वप्न को साकार करने के लिए लोग सहयोग कर रहे हैं। बालाजी के साथ-साथ प्रेतराज भगवान और भैरों बाबा के दर्शन करने पर ही बालाजी के दर्शन पूर्ण माने जाते है। मंदिर के मध्य में विराजमान श्री बालाजी महाराज के दर्शन एवं एक ओर राम दरबार तथा एक ओर शिव परिवार स्थापित है जहां साढ़े तीन फीट लम्बी शिवलिंग है। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच इन प्रतिमाओं की स्थापना की गई थी।
आस्था के इस सफर में यदि आगे बढ़े तो आपको श्री हनुमान के परिक्रमा मार्ग में पवन पुत्र के 11 स्वरुपों के दर्शन होंगे। वृद्ध स्वरुप, ध्यान मुद्रा स्वरुप, भजन मुद्रा स्वरुप, भगवान राम को प्रणाम करते, बाल स्वरुप, सीने चीरकर भगवान राम के दर्शन कराते, मारुति के कंधे पर विराजमान राम-लक्ष्मण, संजीवनी बूटी लाते हुए का स्वरुप, पंच मुखी व 11 मुखी हनुमान जी के दर्शन भी आपको यहां होंगे। कहा जाता है 11 मुखी हनुमान जी के दर्शन मात्र से ही संकट दूर हो जाते हैं। परिक्रमा के इस गलियारे में ऐसा प्रतीत होता है कि भगवान साक्षात दर्शन दे रहे हैं जिससे आपकी आत्मा तृप्त हो जाएगी।
मंदिर में आने वाले श्रद्धालु जब भक्ति के गलियारे में पहुंचते हैं तो भगवान शिव और शेरा वाली मां की विशाल प्रतिमा देखकर वह उन्हें एक टकी नजर से देखते ही रहते हैं। मंदिर के हर कोने, हर जगह कुछ न कुछ अदभुत नजर आएगा। शेरा वाली मां की यह प्रतिमा करीब 30 फीट, तो भोले बाबा की इस प्रतिमा की ऊंचाई 38 फीट के आसपास है। ऐसा लगता है कि मानों भगवान साक्षात खड़े हैं और अपने भक्तों पर कृपा कर रहे हैं। यदि मंदिर के मुख्य गुंबद की बात की जाए तो यह करीब 108 फीट ऊंचा बनाने की तैयारी की जा रही है जिसके लिए 18 से 20 फीट गहरी नींव रखी गई थी। मंदिर को मजबूत बनने के लिए इतना गहराई से मंदिर की नींव भरी गई है।
मंदिर में नंगे पांव आने वाले श्रद्धालु जब बालाजी महाराज के आगे हाथ जोड़ते हैं तो उसका उर्जा चक्र चलने लगता है।
मंदिर की सकारात्मक तरंगों से भक्तों का मन शांत होता है। यहां 108 प्रतिमाएं लगाई जाएंगी। फिलहाल 85 से अधिक प्रतिमाएं स्थापित हो चुकी हैं। जहां देवी मैय्या के नौ रुपों के साथ-साथ चंडी मैय्या, मां काली, मां बगलामुखी के अलौकिक दर्शन कर आपको अवश्य ही तृप्ति मिलेगी। वहीं बाबा खाटू श्याम, राधा-कृष्ण, बांके बिहारी, शनि महाराज के दर्शन के लिए भक्त मंदिर पहुंच रहे है।
मंदिर की खूबसूरती के लिए मार्बल का इस्तेमाल किया गया है। कारीगरों ने एक ही पत्थर में अपनी कला को कुदेरा है। नायाब कलाकारी का नमूना आपको इस मंदिर में दिखाई देगा। ऐसा लगता है कि मानों इस मंदिर में चारो ओर आस्था की गंगा बह रही हो जिससे यहां आने वाले भक्तों का जाने का मन ही नहीं करता। प्रतिदिन होने वाली 45 मिनट की आरती से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। मंदिर के मुख्य पुजारी की शैक्षिक योग्यता परास्नातक है जिन्हें भगवान व भक्तों के प्रति समर्पित देखा !
संकट निवारण सेवा समिति ट्रस्ट महज मंदिर की देखभाल ही नहीं कर रही बल्कि यहां पांचवी कक्षा तक के छात्रों को नि:शुल्क पढ़ाया जाता है और जरुरतमंद छात्रों को किताबें, खाना, ड्रेस आदि भी दी जाती है। वहीं सेवा भाव के साथ निरंतर कार्य कर रही समिति जल्द ही बुजुर्गों के लिए एक वृद्धाश्रम, और उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए तथा आसपास रहने वाले आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मेडिकल सुविधा के तहत ओपीडी की व्यवस्था भी शुरु करने जा रही है। आपको यकीन नहीं होगा लेकिन अभी तक 50 करोड़ रुपए से ज्यादा रुपया इस मंदिर के निर्माण पर खर्च हो चुका है। सुरक्षा के लिहाज से मंदिर का कोना-कोना सीसीटीवी कैमरे से लैस है। मंदिर के प्रांगण में करीब 64 कैमरे लगाए गए हैं। मंदिर को और भी आकर्षक बनाने के लिए अभी काफी पैसे की आवश्यकता है। यदि आप कभी इस मंदिर के बाहर से होकर गुजरे तो मंदिर के भीतर जाकर दर्शन जरुर करें। शायद बालाजी महाराज आपके सारे कष्ट हर लें। फिलहाल के लिए इस वीडियो में इतना ही जल्द ही आपके लिए लेकर आएंगे इसी मंदिर का एक और एपिसोड।
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