
गंगा में मूर्ति विसर्जन पर रोक
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): गणेश उत्सव शुरु हो चुका है और दस दिन बाद मूर्ति विसर्जन का सिलसिला शुरु होगा। गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी गंगा में मूर्ति विसर्जन पर प्रतिबंध रहेगा। प्रशासन ने गांव अठसैनी के पास मध्य गंगा नहर में मूर्ति विसर्जन की व्यवस्था की है।
गंगा को प्रदूषण से मुक्त रखने के लिए उसमें मूर्ति विसर्जन पर प्रतिबंध लगा हुआ है। इसलिए इस बार भी श्रद्धालु गंगा में मूर्ति विसर्जित नहीं कर पाएंगे। मूर्ति विसर्जन को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने व्यवस्थाएं की हैं। श्रद्धालु मध्य गंग नहर में मूर्तियों का विसर्जन कर सकेंगे।
बता दें कि हर वर्ष विश्वकर्मा, गणपति, और मां दुर्गा देवी की लाखों टन मूर्तियां विसर्जित कर दी जाती थीं। इन मूर्तियों को बनाने में रासायनिक का प्रयोग किया जाता है। गंगा में मूर्ति विसर्जित करने से उन पर लगे रंगों रासायनिक रंग गंगा के पवित्र जल में मिल कर उसे प्रदूषित करते थे। लेकिन केंद्र सरकार ने गंगा को प्रदूषणमुक्त करने के लिए अभियान चलाया हुआ है। न्यायालय ने भी गंगा में प्रदूषण फैलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इन सभी प्रयासों के कारण प्रशासन ने विश्वकर्मा, गणेश महोत्सव और नवरात्र के बाद गंगा में मूर्ति विसर्जन करने पर रोक लगाई हुई है। प्रशासन ने थोड़ी दूरी पर स्थित गांव अठसैनी के निकट मध्य गंग नहर में मूर्तियों का विसर्जन करने की व्यवस्था की है। स्थानीय पुलिस ने गंगा नगरी में मूर्ति विसर्जन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध से संबंधित बोर्ड भी तैयार कराने शुरू कर दिए हैं। न्यायालय के आदेश के बाद गंगा में मूर्ति विसर्जित करने के प्रयासों में कमी आई है। पुलिस क्षेत्राधिकारी राहुल कुमार ने बताया कि गंगा को प्रदूषित होने से बचाने के लिए न्यायालय ने मूर्ति विसर्जन पर रोक लगाई है। न्यायालय के आदेश का पालन कराया जाएगा। मूर्ति विसर्जन रोकने के लिए गंगा घाटों पर पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे।
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