सरस्वती इंस्टीट्यूट में दुर्लभ बाल्यावस्था किडनी शल्य चिकित्सा से हापुड़ की 9 वर्षीय बच्ची को मिला नया जीवन










सरस्वती इंस्टीट्यूट में दुर्लभ बाल्यावस्था किडनी शल्य चिकित्सा से हापुड़ की 9 वर्षीय बच्ची को मिला नया जीवन

हापुड़, सीमन /रियाज़ अहमद(ehapurnews.com): हापुड़, उत्तर प्रदेशपश्चिमी उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल (सिम्स), हापुड़ ने 9 वर्षीय बच्ची पर दुर्लभ एवं अत्यंत जटिल बाल्यावस्था लैप्रोस्कोपिक किडनी शल्य चिकित्सा को सफलतापूर्वक संपन्न किया है। यह शल्य चिकित्सा हापुड़ क्षेत्र में इस आयु वर्ग के बच्चे में की गई प्रथम सफल बाल्यावस्था लैप्रोस्कोपिक पायलोप्लास्टी प्रक्रियाओं में से एक मानी जा रही है, जिससे सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल ने उन्नत तृतीयक चिकित्सा सेवाओं के क्षेत्र में एक नया मानक स्थापित किया है।
मरीज बच्ची त्रिशा, जो हेरा लाल एवं पिंकी (निवासी: बजरानपुरी, हापुड़) की पुत्री है, पिछले एक वर्ष से पेट के दाहिने हिस्से में लगातार और तीव्र दर्द से पीड़ित थी। प्रारंभ में इसे सामान्य पेट की समस्या समझा गया, किंतु सिम्स में की गई विस्तृत चिकित्सकीय जांच के बाद पेल्वी-यूरीटेरिक जंक्शन अवरोध (पीयूजे अवरोध) का पता चला। इसके कारण किडनी में अत्यधिक सूजन उत्पन्न हो गई थी, जिसे चिकित्सकीय भाषा में गंभीर हाइड्रोनेफ्रोसिस कहा जाता है। समय पर शल्य चिकित्सा न होने की स्थिति में बच्ची को स्थायी किडनी क्षति अथवा किडनी फेल होने का गंभीर खतरा था।
मामले की गंभीरता एवं जटिलता को देखते हुए सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल की विशेषज्ञ मूत्र रोग (यूरोलॉजी) टीम ने लैप्रोस्कोपिक पायलोप्लास्टी का निर्णय लिया, जो एक अत्याधुनिक न्यूनतम चीरा (की-होल) शल्य चिकित्सा तकनीक है। पारंपरिक खुली शल्य चिकित्सा की तुलना में इस पद्धति में छोटे चीरे लगाए जाते हैं, जिससे दर्द कम होता है, रोगी शीघ्र स्वस्थ होता है और उपचार के परिणाम अधिक प्रभावी होते हैं। बच्चों में इस प्रकार की शल्य चिकित्सा करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि उनकी शारीरिक संरचना अत्यंत नाजुक होती है।
इस जटिल शल्य चिकित्सा का सफल नेतृत्व डॉ. सौरभ गौर, वरिष्ठ सलाहकार, मूत्र रोग विभाग, सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल द्वारा किया गया। उनके अनुभव, तकनीकी दक्षता और सटीक चिकित्सकीय निर्णय क्षमता ने इस दुर्लभ बाल्यावस्था मामले को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हापुड़ में ही इस स्तर की उन्नत लैप्रोस्कोपिक शल्य चिकित्सा का सफल निष्पादन, मरीजों को महानगरों में इलाज के लिए जाने की आवश्यकता को काफी हद तक कम करेगा।
डॉ. सौरभ गौर को इस शल्य चिकित्सा में डॉ. सुमित, डॉ. संग्राम एवं डॉ. मल्लिका सहित एक कुशल एवं समर्पित शल्य चिकित्सा दल का सहयोग प्राप्त हुआ। साथ ही एनेस्थीसिया विशेषज्ञों, नर्सिंग स्टाफ और ऑपरेशन थिएटर तकनीशियनों की भूमिका भी सराहनीय रही। शल्य चिकित्सा शत-प्रतिशत सफल रही और मरीज को किसी भी प्रकार की शल्य या पश्च-शल्य जटिलता नहीं हुई।
चिकित्सकीय परिणाम
शल्य चिकित्सा के पश्चात बच्ची ने तीव्र गति से स्वास्थ्य लाभ किया और उसे बुधवार को पूर्णतः स्वस्थ घोषित कर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई, जो बाल्यावस्था में न्यूनतम चीरा शल्य चिकित्सा की सफलता को दर्शाता है।
यह जीवनरक्षक शल्य चिकित्सा सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल की अत्याधुनिक चिकित्सा अवसंरचना और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण के कारण संभव हो सकी। संस्थान में अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, उन्नत लैप्रोस्कोपिक प्रणाली तथा पूर्णतः सुसज्जित बाल चिकित्सा गहन चिकित्सा इकाई (पीआईसीयू) उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त सिम्स में चौबीसों घंटे आपातकालीन एवं क्रिटिकल केयर सेवाएं भी उपलब्ध हैं।
अपने मूल मंत्र “मानव सेवा” के अनुरूप, सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल ने यह अत्याधुनिक शल्य चिकित्सा अत्यंत किफायती लागत पर की, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को भी उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो सकें।
भावुक होकर त्रिशा के माता-पिता ने बताया कि उन्हें कभी विश्वास नहीं था कि इतनी जटिल शल्य चिकित्सा इतने छोटे चीरे से संभव हो सकती है। उन्होंने सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल एवं डॉ. सौरभ गौर के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस उपलब्धि पर वरिष्ठ प्रबंधन टीम, जिसमें महाप्रबंधक एन. वर्धराजन, निदेशक (प्रशासन) रघुवर दत्त, अस्पताल प्रशासक वाई. सी. गुप्ता तथा चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मेजर जनरल चरनजीत सिंह अहलूवालिया शामिल हैं, ने पूरी चिकित्सा टीम को बधाई दी।
इसके अतिरिक्त सरस्वती समूह के संस्थानों के अध्यक्ष डॉ. जे. रामचंद्रन एवं उपाध्यक्ष राम्या रामचंद्रन ने भी चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं सहयोगी टीम को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं दीं।
यह ऐतिहासिक बाल्यावस्था किडनी शल्य चिकित्सा एक बार फिर यह सिद्ध करती है कि सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़ एंड हॉस्पिटल चिकित्सा उत्कृष्टता, नवाचार, किफायती उपचार और करुणामय सेवा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

घर बैठे (LOAN) कराएं: 9756129288 || उत्कृष्ट विहान, स्वर्ग आश्रम रोड़, हापुड़ ||








  • Related Posts

    एलायंस क्लब क्रिस्टल हापुड ने मनाया गणतंत्र दिवस

    🔊 Listen to this एलायंस क्लब क्रिस्टल हापुड ने मनाया गणतंत्र दिवस हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): गणतंत्र दिवस के अवसर पर देवकी कन्या प्राइमरी स्कूल में बच्चो ओर अध्यापकों के साथ…

    Read more

    महिला पतंजलि योग समिति ने मनाया गणतंत्र दिवस

    🔊 Listen to this महिला पतंजलि योग समिति ने मनाया गणतंत्र दिवस हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): महिला पतंजलि योग समिति हापुड़ के द्वारा फ्रीगंज रोड स्थित रेलवे पार्क में गणतंत्र दिवस…

    Read more

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    एलायंस क्लब क्रिस्टल हापुड ने मनाया गणतंत्र दिवस

    एलायंस क्लब क्रिस्टल हापुड ने मनाया गणतंत्र दिवस

    महिला पतंजलि योग समिति ने मनाया गणतंत्र दिवस

    महिला पतंजलि योग समिति ने मनाया गणतंत्र दिवस

    गणतंत्र दिवस पर शिक्षा का जनसंवाद, सहभागिता से सशक्त समाज

    गणतंत्र दिवस पर शिक्षा का जनसंवाद, सहभागिता से सशक्त समाज

    बाबूगढ़ थाने में गणतंत्र दिवस मनाया

    बाबूगढ़ थाने में गणतंत्र दिवस मनाया

    पिलखुआ में कांग्रेसियों ने मनाया गणतंत्र दिवस

    पिलखुआ में कांग्रेसियों ने मनाया गणतंत्र दिवस

    हापुड़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने मनाया गणतंत्र दिवस

    हापुड़ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने मनाया गणतंत्र दिवस
    error: Content is protected !!