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हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हापुड़ के जिला पंचायत के कुछ अधिकारी, हुक्मरानों के साथ मिलकर राजस्व को चूना लगा रहे हैं और रिश्वत वसूलकर खुद की आय को बढ़ा रहे हैं। जी हां… ग्रामीण क्षेत्रों में व्यवसाय कर रहे व्यापारियों से यह भ्रष्ट अधिकारी जमकर रिश्वत वसूल रहे हैं। फैक्ट्री के लाइसेंस के लिए किसी से पांच हजार तो किसी से बीस हजार वसूले जाते हैं। यह कीमत/रिश्वत पार्टी (व्यवसायी) और फैक्ट्री को देखकर वसूली जा रही है। बताते हैं रिश्वत का हिस्सा जिम्मेदार पद पर विराजमान प्रतिनिधियों तक भी जाता है। ऐसे में शासन को अन्य जिले की टीम द्वारा मामले में भौतिक सत्यापन कराने की जरुरत है जिससे भ्रष्टाचार की तस्वीर साफ हो जाएगी।
जिला पंचायत में जमकर भ्रष्टाचार:
भ्रष्टाचार के मामले में जिला पंचायत भी किसी से पीछे नहीं है। यहां के जिम्मेदार व्यवसायी से जमकर रिश्वत वसूल रहे हैं जो कि बड़े स्तर पर सरकार को चूना लगा रहे हैं। आलम यह है कि फैक्ट्री के लाइसेंस के लिए यहां सरकारी रसीद कटवा रहे व्यवसायी से कहा जाता है कि वह रसीद न कटवाए बल्कि रिश्वत देकर सस्ते में अपना पिंड छुड़ा लें। मान लीजिए यदि किसी की फैक्ट्री के लाइसेंस की सरकारी रसीद 21 हजार प्रति वर्ष के आसपास कटनी है तो यह रिश्वतखोर व्यवसायी से कहते हैं कि सरकारी रसीद कटवाने की कोई जरुरत ही नहीं है। वह महज छह से सात हजार रुपए देकर एक साल तक व्यापार चला सकता है। उसके बाद यह रिश्वत फिर वसूली जाती है।
सरकारी फीस में भी ले रहे हैं रिश्वत:
रिश्वतखोरों का आतंक इस कदर है कि अपना काला पेट भरने के लिए यहां जमकर काली कमाई कर रहे हैं। यदि कोई व्यवसायी सरकारी फीस देने को तैयार है तो यह उससे भी दो से तीन हजार रुपए की रिश्वत ऐंठ ही लेते हैं।
नहीं है कोई गारंटी:
रिश्वतखोर अधिकारी अपना ईमान बेचकर रिश्वत इक्ट्ठा कर रहे हैं। लेकिन आपको बता दें कि यदि किसी तरह फैक्ट्री में कोई हादसा हो जाता है तो यह भ्रष्ट अधिकारी रिश्वत लेने के बाद भी अपने हाथ पीछे खीच लेते हैं और ईंमानदारी का चोला पहनकर शासन के आदेश का पालन करते हुए फैक्ट्री पर कार्रवाई करने से भी नहीं हिचकते तो ऐसा न सोचा जाए कि रिश्वत देकर अधिकारी उनके हो गए। इसीलिए सरकारी फीस अदा कर ही लाइसेंस का नवीनीकरण कराना चाहिए।
भौतिक सत्यापन जरुरी:
शासन को अन्य जिले के अधिकारी की एक कमेटी का गठन कर जमीनी स्तर पर भौतिक सत्यापन करने की जरुरत है जिससे साफ हो जाएगा कि जिला पंचायत में किस कदर भ्रष्टाचार चल रहा है।
जिम्मेदारों की भी हो जांच:
ज्ञात हो कि हाल ही में जिला पंचायत अध्यक्ष रेखा नागर पर जिला पंचायत सदस्यों ने भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा था कि जो भी सामान जिला पंचायत ने लगवाया है उसकी कीमत मार्किट की कीमत से कई गुना अधिक लिखी गई है। हालांकि रेखा नागर ने अपने उपर लगे सभी आरोपों को निराधान बताया था। ऐसे में यदि सम्पत्ति की जांच व भौतिक सत्यापन हो तो सभी कुछ स्पष्ट हो जाएगा। (@incometax)
बांटे थे दो-दो हजार के लिफाफे:
जिला पंचायत किस तरह अपनी करतूतों पर पर्दा डाल रहा है इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक जनप्रतिनिधि के परिचित ने एक स्थान पर कुछ लोगों को दो-दो हजार रुपए के लिफाफे भी बांटे थे और माहौल को अपने पक्ष में करने की कोशिश की थी।
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