हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): कोरोना संक्रमण को देखते हुए चुनाव आयोग ने वर्चुअल रैली की सलाह दी है। रोड शो पर प्रतिबंध लगा दिया है हालांकि 15 जनवरी के बाद इस पर विचार कर फैसला लिया जाएगा। वहीं वर्चुअल रैली करना भाजपा को छोड़कर अन्य पार्टियों के लिए आसान बात नहीं है। जनपद हापुड़ की बात करें तो कई ऐसे दावेदार हैं जो कि डिजिटल का महत्व समझते ही नहीं। ऐसे में उनकी चुनौतियां और भी बढ़ सकती हैं।
2014 के लोकसभा चुनाव से ही भाजपा ने खुद को डिजिटली स्ट्रांग किया है और अन्य सभी पार्टियों से डिजिटल मंच पर मजबूत नजर आ रहा है जिसे विपक्षी दल स्वीकार भी कर रहे हैं। कोरोना काल के दौरान भाजपा का यह नेटवर्क बूथ स्तर तक पहुंच गया है। आज के समय में BJP 50 हजार लोगों की एक साथ वर्चुअल रैली करने की क्षमता रखती है लेकिन अन्य सभी पार्टियां इंटरनेट, डिजिटल के मामले में काफी पीछे हैं। पार्टियों के वरिष्ठ नेता डिजिटल के महत्व से परिचित हैं और कोरोना काल में इस वर्चुअल के महत्व को समझते हैं लेकिन अन्य पार्टियों के नेता और पदाधिकारी आज भी इस तकनीक को समझने से कतरा रहे हैं।
हालांकि कुछ पार्टियों के नौजवान धीरे-धीरे डिजिटल का रुख अपना रहे हैं। सपा ने भी अपने आपको तकनीक से जोड़ने के लिए हर बूथ का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है। कांग्रेस भी डिजिटल माध्यम का बेहतर इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है। लगातार वर्चुअल बैठकों पर जोर दिया जा रहा है। कांग्रेस का मानना है कि वह डिजिटल वार के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रदेश में डेढ़ लाख व्हाट्सएप ग्रुप कांग्रेस ने बनाए हैं जिससे बूथ स्तर तक संपर्क जुड़ा हुआ है लेकिन आपको बता दें कि कई उम्मीदवार ऐसे हैं जो डिजिटल और वर्चुअल का महत्व समझ नहीं रहे और दूरी बना रहे हैं।
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