हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): हापुड़ का बिजली विभाग एक फिर आरोपों के कठघरे में खड़ा है। विद्युत विभाग पर एक बार फिर भ्रष्टाचार का दाग लगा है। मामला हापुड़ की सीमा से सटे धीरखेड़ा इंडस्ट्रीयल एरिया का है जहां एक फैक्ट्री संचालक ने हापुड़ विद्युत विभाग की विजिलेंस टीम पर चैकिंग की आड़ में दो लाख रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है। यहीं नहीं पीड़ित का कहना है कि इसका बिजली कनैक्शन भी काट दिया गया और उसे प्रताड़ित किया गया। हालांकि विभाग ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। पीड़ित ने मामले की जांच के साथ-साथ विभाग के अधिकारियों की संपत्ति की जांच की भी मांग उठाई है।
मेरठ निवासी अनमोल गोयल की जनपद हापुड़ की सीमा से सटे धीरखेड़ा इंडस्ट्रीयल एरिया में बैग बनाने की फैक्ट्री है जिसका निर्माण कुछ समय पहले ही पूरा हुआ है। इस दौरान अनमोल का आरोप है कि 25 मार्च को विद्युत विभाग की विजिलेंस टीम ने उसके यहां छापा मारा और खामियों के नाम पर उसे डराया गया और अलग से मिलने की बात कही।
अनमोल का कहना है कि उससे मामले निपटाने के लिए दो लाख रुपए रिश्वत की मांग की। इन सभी रवैये से अनमोल एकदम सहम गया जिसके बाद उसने आईआईए की टीम को मामले से अवगत कराया और आईआईए के पदाधिकारी अधीक्षण अभियंता यू. के. सिंह से मिलने पहुंचे और मामले की शिकायत की। अनमोल का कहना है कि शिकायत के बाद विजिलेंस टीम के अधिकारी आग बबूला हो गए और उन्होंने अनमोल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी और 21 दिनों की जगह एक साल की पैनल्टी लगा दी।
अनमोल का कहना है कि मामला बिजली विभाग ने लटका दिया और उसकी लापरवाही से फैक्ट्री की लाइट काट दी गई। कुछ कार्रवाई न होने पर पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी का दरवाजा खटखटाया। जिलाधिकारी अनुज सिंह ने मामले में जांच का आश्वासन उद्यमियों को दिया।
आरोपों की सूची इतनी ही नहीं है बल्कि इस लिस्ट में डराना और धमकाना भी शामिल है। खाकी का रौब दिखाकर कानूनी दाव पेच में उलझाने का भय भी शामिल है। मामले में जब एससी यादव से बात की गई तो उन्होंने कहा कि यह आरोप निराधार है।
वहीं एक्सएन हापुड़ मनोज कुमार ने बताया कि एक साल का प्रोविज़नल एसेसमेंट बनाया जाता जिसके बाद उसमें संशोधन किया जाता है। अनमोल का कहना है कि बिजली विभाग के अधिकारियों द्वारा मिले जवाब से वह संतुष्ट नहीं है। उन्होंने मांग की है कि बिजली विभाग की विजिलेंस टीम के अधिकारियों की संपत्ति की जांच की जाए। मामला अपने आप सुलझ जाएगा।
































