
“दीपावली महापर्व का प्रारम्भ 06 नवम्बर कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी हस्त नक्षत्र में धनतेरस व प्रदोष व्रत पूजन के साथ हो रहा है”: भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा
हापुड़, सीमन (ehapurnews.com): दीपावली महापर्व का प्रारम्भ 06 नवम्बर शुक्रवार कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी हस्त नक्षत्र में धनतेरस व प्रदोष व्रत पूजन के साथ हो रहा है. भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित के0 सी0 पाण्डेय काशी वाले ने बताया कि त्रयोदशी तिथि 06 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 30 मिनट से प्रारम्भ होकर 07 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा धर्मग्रंथों के अनुसार यदि दो दिन त्रयोदशी हो तो सायंकाळ प्राप्त त्रयोदशी तिथि में धनतेरस पूजन का विधान है जो 06 नवम्बर को ही प्राप्त हो रहा है समुद्रमंथन के बाद धन्वंतरि देव अमृत कलश लेकर तथा माँ लक्ष्मी जी भी कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को ही प्रकट हुई थी अतः सायं प्रदोषकाल में स्वास्थ्य व समृद्धि के लिए देव धन्वंतरी, धन के स्वामी कुबेर एवं लक्ष्मी जी का विशेष रूप से पूजन किया जाएगा सायंकाळ में निम्लिखित मंत्र- मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात्सूर्यजः प्रीयतां मम।। के साथ घर के बाहर यमदेवता के लिए चौमुखी दीपक अवश्य जलाना चाहिए इससे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता तथा परम्परानुसार धनतेरस के दिन सोना-चांदी, बर्तन या कोई अन्य धातु की वस्तु अवश्य खरीदना चाहिए, श्री लक्ष्मी – गणेश जी की मूर्ति, बहीखाता, कलम, झाडू, साबुत धनिया, पीली कौड़ी व अन्य दीपावली पूजन सामग्री के साथ नई वस्तुओं को खरीदना अत्यंत शुभ माना गया है धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस को ख़रीदी गई वस्तु से 13 गुना लाभ मिलता है धनतेरस की खरीददारी 07 नवम्बर को सुबह शुभमुहूर्त 9.21 तक किया जा सकता है
धनतेरस पूजन श्रेष्ठ शुभमुहूर्त :-
06 नवम्बर 2026, शुक्रवार
सायं 5.30 बजे से 7.57 तक प्रदोषकाल, वृषभ स्थिर लग्न
खरीददारी शुभ मुहूर्त :-
06 नवम्बर दोपहर पूर्व 11.40 बजे से 07 नवम्बर सुबह 9.21 बजे तक
होलसेल दामों पर खरीदें व बनवाएं कस्टमाईज़ड टाइल्स: 8449930105, 9837824010

























